गैरसैंण का तौं गीत लगो-तौं डांडियों फिर जगो-वरिष्ठ पत्रकार वेदविलास उनियाल की कलम से लिखा गीत

फाइल फोटो-गीत के लेखक वेदविलास उनियाल

गैरसैण ग्रीष्मकालीन राजधानी बन गई है। आइए गैरसैण पर यह गीत सुनिए । हम सबकी भावनाए गैरसैण से जुडी है। केवल भावनात्मक नहीं राज्य के चहुमुखी विकास के लिए यह निर्णय जरूरी है । गैरसैंण एक राजधानी ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण उत्तराखण्ड के विकास के लिए  जरुरी है। गैरसैंण  कितना जरुरी था इसके लिए वरिष्ठ पत्रकार वेदविलास उनियाल ने समय समय पर लेख लिखे एसे ही  किसी क्षण अपनी भावनाओं को गीत का रुप दिया और हुड़का को माध्यम बनाया । इस गीत को उत्तराखण्ड की जानी मानी गायिका रेखा धस्माना ने गाया जब से उत्तराखण्ड सरकार ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया तब से यह गीत सोशल मीडिया पर खूब वायरल होरहा है ।
फाइल फोटो-प्रसिद्ध लोकगायिका रेखा धस्माना



बोल मेरा हुडका बोल अब त बोल
गैरसैण का गीत लगो भडों का गीत पंडो नचो
डोडियां नरसिंह बुला त्यौ डांडियों फिर जगो
माधो का मलेथा बोल अब त बोल
कन लडी छे तीलू बालागोरा देवी न बचैं डाला
नारी का हाथो जगी रे ज्वाला
जय नंदा जय हिमाला


ठगुली और बिशनी कू बोल अब त बोल
चुल्हा भड्डू तोर की तोलमुनस्यरी की राजमा लाल
फाणु डुबका कू उबाल चल रे भुला थोडा उकाल
मां का हाथ मूला कू झोल
मा वैण्यू की खौरी बोल अब त बोल
डबडबांदी तेरी आंखी
गौं गंदनियों कैन झांकी
 ह्यूंद हवा सरसरांदी
जुकड़ी आग झूरझूरांदी
तेरी डांड्यों कु लग्यों मौल
वीर चन्द्र की भूमि बोल

वाबन गढ का देश बोल
अब त बोल
चंद्र सिंह की धरती बोल
अब त बोल
गढ कुमो जोनसार बोल
अब त बोल
पितरों की भूमि बोल
अब त बोल

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