फूलदेई पर कवि अश्वनि गौड की कविता-आप तैं रैबार पहाड़ की तरफ बटिन हार्दिक शुभकामनाएं व बधाई

फूलदेई पर घर घर मा फूलवारी लिए जांदा नोन्याल

जै घोघा माता "
डाली बोटयो मोळयार ऐगि 
चौदिसो बसंत रैबार ल्येगे
डाळयों फुलिग्ये पैंया बुराॅश 
डांडी काठ्यो हैंसदू हिंलाश
पुंगणी पाॅख्यो मा फ्यूंली फूल
गोधूलि बगते हैंसि उडदि धूल
फूलू कि संजोलि,नौन्याळु हाथ,
जौ जस देंदि जै घोघा माता।

जै घोघा माता पैया पाति फूल,
जै घोघा माता बुराॅशि का फूल, 
पाख्यो कि हैसदि, पिंगलि फ्योलडि,
डैल्यो पौछिग्ये जो जस  ल्येक
सूना पण्या छा म्वोर द्वार 
बिजालि गैनि फुलारयू डार।

वेलि खोलि पलि खोलि घोघा नचाए
घोघा पुजारी पता नि पाई।
जै घोघा माता पैया पाति फूल

फूल फुलारि फूल ले ऐन
स्येई डेल्यू तै बीजालि गैन
हाथ सजोळि फूलुन भौरि
कांधि मा घोघा माता धौरि

रौडि-दौडि नाचदि बिगरैलि डोलि
जै घोघा माता पैया पाति फूल
बाळा नौन्याळु कि मिठि मिठि बोळि
स्येई ख्वोलि म्वोर फुळार्यू कि टोळि
जै घोघा माता पैया पाति फ्यूल्या फूल।

अश्विनी गौड रूद्रप्रयाग।

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