वैश्विक महामारी के बीच मिशाल बना जखोली ब्लाक का लुठियाग गांव जय नगेला देवता समिति बनी प्रवासियों के लिए वरदान-देखें पूरी खबर



                       वैश्विक महामारी के बीच मिशाल बना लुठियाग---
           रूद्रप्रयाग: दीपक कैन्तुरा
•         ना शासन प्रशासन को कोसा अपने दम पर कुछ अलग सोचा
•         सरकार की मदद करना हमारा भी दायित्व बनता है- नगेला देवता समिती
•         देश विदेश से लौटे प्रवासियों ने किया समिति और गांव का सहयोग


  • जय नगेला देवता समिति के साथ ग्राम प्रधान दिनेश कैन्तुरा क्षेत्र पंचायत सदस्य शशी देवी मेहरा नगेला देवता समिति के अध्यक्ष प्रदीप सिंह कैन्तुरा सचिव कुलदीप सिंह मेहरा, सामाजिक कार्यकर्ता सैन सिंह मेहरा,सोहन सिंह मेहरा,के साथ गांव के लोगों ने अपनी एकता का सामाजिक परिचय दिया।

जय नगेला देवता समिति


जखोली- आज पूरा विश्व कोरोना महासंकट से जूझ रहा है,लगातार देश में कोरोना का खतरा पांव पसारता रहा है। हमारे कोरोना वारियर्स दिन-रात लोगों की सेवा में  जुटे हुए हैं।

लुठियाग गांव का मुख्य बाजार चिरबटिया

हर कोई अपने स्तर पर इस संकट की घड़ी में देश की मदद के लिए आगे आ रहे हैं, कोई  पीएम केयर फंड़ व सीएम राहत कोष में दिल खोलकर दान दे रहा है तो कोई प्रवासी लोगों की मदद कर अपने स्तर पर अपनी सामर्थ्य से समाज सेवा मे लगे है।
कुछ लोग जरुरतमंदों को भोजन मास्क व सैनिटाइजर बांट रहे हैं ।

सोशल विकास पाक्षिक समाचार पत्र में छपा लेख

उत्तराखण्ड की माटी में रचा बसा सेवा सद्भाव का सिलसिला आज इस महामारी में भी जारी है।
कोरोनाकाल में सबसे बड़ी चुनौती थी, प्रवासियों को गाँव लाना और उनको रहने खाने व क्वारंटिन करने की व्यवस्था किस तरह से की जाए?
इसके लिए सरकार ने गाँवों की जिम्मेदारी  ग्राम प्रधानों के कंधों पर डाल दी और गांव में प्रधानों के लिए ये चुनौती अग्निपरीक्षा बन गई। यही वजह रही कि कई गांवों में साधनों की छोटी चादर से क्वारंटीन सेंटर के सहुलियत का जिस्म नहीं ढका जा सका.. जिसके चलते कई क्वारंटिन सेंटर्स में कई अप्रिय घटनायें भी देखने को मिली।

समिति को दानदाताओं की सूची

इस दुविधा की घड़ी मे एक और सामाजिक तानेबाने मे बंधे गाँव की तस्वीर डगमगाई दूसरी और कई लोगों ने आत्मीयता के साथ इस दुखद घड़ी मे प्रवासियों का साथ देकर अपनत्व की भावना को बरकरार रखा।
कुछ ऐसा ही देखने को मिला
रुद्रप्रयाग जनपद के जखोली ब्लॉक अंतगर्त ग्राम सभा 'लुठियाग' चिरबटिया,में ।
 लुटियाग ग्राम सभा तीन भागों में बंटी हुई है, पहला भाग ग्राम सभा 'लुठियाग'  दूसरा भाग 'चिरबटिया' और तीसरा भाग 'खल्वा' है। चिरबटिया इस ग्राम सभा का केन्द्र बिन्दु है। लिहाजा चिरबिटिया में ही क्वारंटीन सेंटर बनाया गया। लेकिन दिक्कत ये थी कि, लुठियाग से चिरबिटिया आने में तीन घंटे और खल्वा से चिरबिटिया जाने में दो घंटे लगते.. यानि लुठियाग गांव के परिवार घर लौटे अपने परिजन को सुबह का नाश्ता दोपहर तक पहुंचाते..यही हाल खल्वा गांव का भी होता...जिन्हें रात का भोजन पुहंचाने लिए शाम को दौड़ लगानी पड़ती। ऐसे में लुठियाग ग्राम सभा के लिए क्वारंटीन सेंटर में रोटी-पानी का इंतजाम एक बडी चुनौती था। बावजूद इसके इस समस्या के निदान के लिए लुठियाग की महान जनता ने  न तो सरकार को कोसा, न प्रशासन की दहलीज पर मदद के लिए गिड़गिड़ाए..स्वाभिमान की सौगंध ली और समाधान के समुद्र में गोता लगा दिया.. ताकि उपाय का मोती हाथ लग सके।



दानताओं की सूची

 नतीजा ये हुआ कि  लुठियाग के नौजवानो गांव के माथे पर उभरी शिकन को 'जय नगेला देवता समिति' के जरिए मिटा दिया... समिति में ग्राम सभा की तरफ से प्रस्ताव रखा गया, कि हम किसी के भरोसे न रहकर, हम अपने प्रवासियों की सेवा खुद करेंगे।  समिति के नौजवानों ने अपने गाँव के सामने मदद की चादर फैला दी...बस फिर क्या था ग्रामीणो ने अपने सामर्थ्य से दान दिया और समिति के सभी लोगों ने हाथ बढ़ाया..और फिर हाथ से हाथ मिलते चले गए। मिसाल के लिए नई पटकथा लिखने की शुरूआत हो गई । प्रवासियों की हिफाजत को बढ़े हाथों के चलते कही से बर्तन मिले तो कहीं से खाना पकाने के लिए सिंलेंडर  कहीं से गद्दे मिले तो कहीं से चादर और रजाइयों का इंताजम
 परदेश से घर लौटे प्रवासियों की मदद को बढ़े हाथों ने देखते ही देखते पचास हजार की रकम का इंतजाम कर दिया.. इस रकम से प्रवासियों के खाने-पीने का पुख्ता इंतजाम किया गया ताकि घर लौटे परदेशी को गांव सालों बाद भी अपना सा लगे।  ग्राम सभा प्रधान दिनेश कैंतुरा कहते हैं, ” नगेला देवता समिति की मदद से बने क्वांरटिन सेंटर में अभी तक सौ से ज्यादा लोग आ चुके हैं। जिनमें पचास फीसदी लोग अपना क्वारंटीन पीरियड पूरा करके अपने घर चले गए हैं.. संकट के समय घर लौटे भाई बंधों के लिए जो हमारे गांव वालों ने सहयोग के हाथ बढाए उनसे प्रवासियों का हौसला बढा है.. प्रधान कहते हैं..क्वारंटीन अवधि के दौरान घर लौटे लोगों ने जो सहयोग दिया उससे क्वारंटीन सेंटर का इंतजाम करने में उन्हें कोई तकलीफ नहीं हुई”
कहा गया है, अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता, सहयोग में जो ताकत होती है उसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता.. सहयोग से लिखी इबारते मिसाल बन जाती हैं.. लुठियाग गांव के ग्रामीण और नगेला समिति ने जो कोशिश की है वो नजीर बन गई है .. ऐसी नजीर जिसका सुख-दुख के पलों में हमेशा जिक्र किया जाएगा। हम तो यही कहेंगे शुक्रिया लुठियाग गांव की जनता और युवाओँ की नगेला देवता समिति।    

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