स्वरोजगार की मिसाल पेश करता हुआ जखोली ब्लाक का नौजवान सुरेश थपलियाल

रामरतन सिह पवांर/जखोली

स्वरोजगार की मिसाल पेस करता हुआ जखोली ब्लाक का नौजवान सुरेश थपलियाल
मशरूम के क्षेत्र में भी महारत हासिल कर रहे हैं सुरेश


उतराखंड और पलायन का एक पुराना नाता रहा हैकुछ समय पूर्व तक प्रदेश के सैकड़ों गाँव बिरान पड़े थे ज्यादा तर लोग बहार के बिभिन्न राज्यो के बड़े शहरो. अपनी रोजी- रोटी के तलाश मे.अपने गाँव,पहाड़ों से पलायन कर गये।लेकिन कोरोना वायरस कोविड 19
जैसे महामारी बिमारी के चलते हजारो प्रवासी उतराखंड लौट आये है लेकिन अब अपने गाँव वापस लौटे प्रवासियों को रोजगार की चिंता सताने लगी है,लिहाजा प्रवासियों को स्वरोजगार कैसे मिलेगा प्रदेश सरकार हर सम्भव बेरोजगार को स्वरोजगार देने हेतू भ्रसक
प्रयास कर रही है मगर अब देखना ये है कि सरकार की ये 
स्वरोजगार परक निति कितना रंग लाती है।मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत बेरोजगारों को स्वरोजगार से जोड़ने बैंको से ऋण देकर आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी बनाई गई है।



सुरेश द्वारा उगाये गए मशरूम

अब बात करते है जनपद रुद्रप्रयाग के जखोली ब्लाक के जैन्ती गांव के रहने वाले सुरेश थपलियाल के द्वारा स्वरोजगार पर किये गये कार्य
अपने व क्षेत्रवासियों के लिये प्रेरणा श्रोत जरुर बन रहें है
बता दे कि सुरेश थपलियाल ने अपने ही गाँव मे रह कर खेतो मे साग सब्जी उगाने का काम करते है जिससे वे लगभग तीन लाख रू सालाना कमाते है।सुरेश थपलियाल ने बताया है कि
विगत 15 मेरे. पिता जी बागवानी के रुप मे फलदार वृक्ष व सब्जी उत्पादन का कार्य  शूरु किया था।धीरे धीरे इस नौजवान ने इसको स्वरोजगार के रुप मे अपनना शूरु कर दिया।सुरेश थपलियाल का कहना. है वर्तमान समय मे मै मशरुम का भी उत्पादन कर रहा हूँ ।



मशरुम भी पूर्ण रुप से तैयार हो चुके है।फूलो का बगीचा भी इनके द्वारा तैयार किया है
जिससे कि वे अच्छा मुनाफा कमा लेते है।जो लोग बागवानी मे कार्य करने के इच्छुक है उनको इस नौजवान से खेती करने की सीख लेनी चहिये।अगर प्रवासी इसी तरह स्वरोजगार के रास्ते अपनाये तो पहाड़ मे सब्जी उत्पादन से लोगो को रोजगार के व्यापक अवसर मिल सकते है

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