कोरोना और भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को लेकर किया गया एक राष्ट्रीय बेबीनार देश की कई जानी-मानी हस्तियों ने लिया हिस्सा

कोरोना और भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को लेकर किया गया एक राष्ट्रीय बेबीनार देश की कई जानी-मानी हस्तियों ने लिया हिस्सा 
वेबीनार में हिस्सा लेने वाले विभिन्न क्षेत्र के लोग

आज दिनांक २० जुलाई २०२० को प्रातः १० बजे श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर गोपेश्वर चमोली , उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी एवं आर्यवर्त शोध संस्थान (देoभूoविoमo) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कोविड-19 महामारी के परिप्रेक्ष्य में भारतीय उपचार पद्धतियां (योग, आयुर्वेद, मर्म, प्राकृतिक चिकित्सा) विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया. जिसका उद्घाटन परम पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी अध्यक्ष पतंजलि योग पीठ हरिद्वार के द्वारा भगवान् धन्वन्तरि की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करके किया गया. 

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोo ओo पीo एसo नेगी, कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय बादशाही थौल, नई टिहरी के कुलपति प्रोo पीo पीo ध्यानी, एवं माननीय भगवती प्रसाद राघव जी क्षेत्रीय संयोजक प्रज्ञा प्रवाह पo उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड तथा डॉo चैतन्य भंडारी अध्यक्ष देवभूमि विचार मंच उपस्थित रहे. 

आचार्य बालकृष्ण जी ने अपने उद्घाटन भाषण में कोरोना महामारी के पीछे चीन व अन्य अंतर्राष्ट्रीय षणयंत्रों का भंडाफोड़ करते हुवे ये कहा की ये वायरस प्रयोगशाला निर्मित है और ये जैविक युद्ध की भी शुरुवात हो सकती है, जिसके कारण इम्युनिटी बूस्टर के रूप में बनी करोनिल दवा की आलोचना व दुष्प्रचार इन्ही शक्तियों के द्वारा किया जा रहा है जो नहीं चाहते की मानव जाति कोरोना के संकट से निजात पाए.

इसके पश्चात उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोo ओo पीo एसo नेगी ने मुख्य अतिथि व अन्य अतिथियों का स्वागत करते हुवे वेबिनार के उद्देश्यों तथा विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुवे पतंजलि के द्वारा किये गए प्रयासों को साधुवाद दिया. 
मुख्य वक्त के रूप में डॉo अनुराग वाष्णेय प्रतिष्ठित चिकित्सा वैज्ञानिक एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष पतंजलि शोध संस्थान हरिद्वार ने कोरोना महामारी के सन्दर्भ में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का दृश्टिकोण व धारणा का सारगर्भित विश्लेषण किया और अपने वक्तवय के द्वितीय भाग में कोरोना पर आयुर्वेदिक दवाओं के प्रभाव का विश्लेषण किया. उन्होंने ये भी बताया की किस प्रकार करोनिल दवा के विभिन्न घटक इस बीमारी पर सकारात्मक प्रभाव डालते है.
प्रथम तकनीकी सत्र में विश्वविख्यात भारतीय पोषण विज्ञानी तथा मधुमेह विशेषज्ञ डॉo विश्वरूप राय चौधरी ने कोरोना को लेकर व्याप्त भ्रांतियों का प्रामाणिक विदेशी सन्दर्भों के साथ निराकरण किया तथा इसके पीछे छिपे भय के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का पर्दाफाश किया. उन्होंने कोरोना के इलाज हेतु विदेशो में प्रमाणित तकनीकों तथा अच्छी भोजन पद्द्यति (DIP DIET) के माध्यम से सफलतापूर्वक निशुल्क इलाज का दावा किया. उन्होंने ये भी बताया की अब तक उनके एवं उनकी टीम के द्वारा लगभग 5000 लोगों को सफलतापूर्वक इस बीमारी से उबारा जा चूका है.
कार्यक्रम अध्यक्ष प्रोo पीo पीo ध्यानी अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सभी वक्ताओं एवं अतिथिओं का आभार व्यक्त करते हुवे इस पहल को सराहनीय बताया तथा सभी वक्ताओं एवं अतिथिओं का इस महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार रखने के लिए आभार व्यक्त किया गया तथा भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकताओं पर जोर दिया. 
वेबिनार निदेशक प्रोo आरo केo गुप्ता प्राचार्य श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर गोपेश्वर (चमोली) ने वेबिनार के प्रारंभ में वेबिनार की रूपरेखा तथा कोरोना में भारतीय उपचार पद्यतियों पर प्रकाश डाला.
सेमिनार का संचालन करते हुवे डॉo भानु जोशी विभागाध्यक्ष योग उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने कोरोना के प्रभाव पर चर्चा करते हुवे योगमय जीवनशैली पर जोर दिया. इस वेबिनार हेतु सम्पूर्ण भारत के विभिन्न स्थानों से लगभग 1200 प्रतिभागियों ने रजिस्ट्रेशन कराया एवं लगभग 1000 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन वेबिनार में प्रतिभाग किया.
अंत में डॉo ललित एम्o तिवारी असिस्टेंट प्रोफेसर (शारीरिक शिक्षा) श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर गोपेश्वर (चमोली) ने इस महामारी के सम्बन्ध में जागरूकता पैदा करने के लिए सभी आयोजन संस्थाओं को धन्यवाद ज्ञापित किया. इस अवसर पर श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर गोपेश्वर (चमोली) से डॉo एम्o केo उनियाल, डॉo बीo सीo शाह, डॉo शिवचंद्र रावत, डॉo गिरधर जोशी, डॉo जगमोहन नेगी एवं मीडिया प्रभारी डॉo दर्शन सिंह नेगी मौजूद रहे.

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