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मानसून में रहता है आंखों की इस बीमारी का बड़ा खतरा

मानसून में रहता है आंखों की इस बीमारी का बड़ा खतरा डॉ राजे नेगी प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक ऋषिकेश   मॉनसून के इस मौसम में जहाँ बारिश ...


मानसून में रहता है आंखों की इस बीमारी का बड़ा खतरा

डॉ राजे नेगी प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक ऋषिकेश


 मॉनसून के इस मौसम में जहाँ बारिश की बूंदे लोगो को गर्मी से राहत दे रही है वही बारिश के बाद कि धूप से आंखों में बीमारियां भी पनपने लगी है अपने साथ हल्की बारिश का खुशनुमा मौसम लाने वाले इस मॉनसून के दौरान आंखें लाल होना, आंखों में खुजली, आंखों से पानी आना, आंखों में दर्द और आँखों से चिपचिपा पदार्थ निकलने जैसी कई परेशानियों भी उत्पन्न होने लगती है।
नगर के नेत्र चिकित्सक डॉ राजे नेगी के अनुसार बरसात के दिनों में आंखों की बीमारियां होना आम है।आंखों की बीमारियों में सबसे कॉमन कंजंक्टिवाइटिस है।आंख के ग्लोब पर (बीच के कॉर्निया एरिया को छोड़कर) एक महीन झिल्ली चढ़ी होती है, जिसे कंजंक्टाइवा कहते हैं। कंजंक्टाइवा में किसी भी तरह के इंफेक्शन या एलर्जी होने पर सूजन आ जाती है, जिसे कंजंक्टिवाइटिस कहा जाता है। इसे आई फ्लू भी कहा जाता है।  आई फ्लू(कंजंक्टिवाइटिस) तीन तरह का होता है:- वायरल, एलर्जिक और बैक्टीरियल।
कुछ जरूरी बातों को ध्यान में रखकर इन बीमारियों से अपनी आँखों का बचाव आसानी से किया जा सकता है जैसे बचाव के लिए साफ-सफाई रखना सबसे जरूरी है। इस मौसम में किसी से भी, जिसे कंजंक्टिवाइटिस हो हाथ मिलाने से भी बचें क्योंकि हाथों के जरिए बीमारियां फैल सकती हैं। दूसरों की चीजों का भी इस्तेमाल न करें।
-आंखों को दिन में 5-6 बार ताजे पानी से धोएं। अच्छी क्वॉलिटी का धूप का चश्मा पहनें। चश्मा आंख को तेज़ धूप, धूल और गंदगी से बचाता है, जो एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस के कारण होते हैं।
-सुबह के वक्त आंख चिपकी मिलती है और कीचड़ आने लगता है, तो यह बैक्टिरियल कंजंक्टिवाइटिस का लक्षण हो सकता है। 
-अगर आंख लाल हो जाती है और उससे पानी गिरने लगता है, तो यह वायरल और एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस हो सकता है। वायरल कंजंक्टिवाइटिस अपने आप 3-5 दिन में ठीक हो जाता है लेकिन इसमें बैक्टीरियल इन्फेक्शन न हो, इसलिए  ऐंटिबायॉटिक आई-ड्रॉप का इस्तेमाल कर सकते है।
-आंखों को दिन में 5-6 बार साफ ठंडे पानी से धोएं।आंखों को मसलें नहीं, क्योंकि इससे आंख की पुतली में जख्म हो सकता है।अधिक समस्या होने पर खुद इलाज करने के बजाय  चिकित्सीय परामर्श लें।आई-ड्रॉप्स सिर्फ चिकित्सक के कहने पर ही डालें।

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