फिर लोटिक तैं ओला थौळा मेळा - कोरोना की वजै सी नी ह्वे सकी ऐंसू बैशाख का थलू

फिर लोटिक तैं ओला  थौळा मेळा
              
दीपक कैन्तुरा जखोली रूद्रप्रयाग

देश दुनिया सी कोरोना मिटी जालु
फिर सी उलार्या बैशाख बौड़िक तैं आलू
 फिर देवी देवताओं की पूजा होली
  फिर दर्शन द्योली देवों की डोली
 फिर मैतूड़ा आली दिशा धियांण
फिर ओली जलेबी पकोड़ीयों की रस्याण
फिर लौटिक औला हमारा मेला थौला
 अगला साल बैशाख दगड़्यों का गौला भिंटियोला
(दीपक वाणी)



रंत रैबार-पैलि बार पुरा उत्तराखण्ड़ मा ये बार बैशाख मैना लगण वाला  थौळा मेला नी लगिन जै कु कारण कोरोना च। उत्तराखण्ड का हर क्षेत्र मा हर गौं मा बैशाख का मैनी क्वी नी क्वी थलु होंदू अर ये थलु मा हमारी दिशा धियांणी रिस्तादार अर दूर प्रदेश बटिन भाई लोग घर ओंदा था पर ये बार सब कोरोनान चौपट करली । आप तैं बथै देंदन की हमारा पहाड़ मा  जेठ बैखाख मैना का  थौला मेळों की रीत परम्परा भौत पुराणी च अर युं मैलू कु अपणु धार्मिक अर आर्थिक महत्व और सामाजिक महत्व भी च । अनेक देवी देवताओं का नौं पर ऊंका मंदिरों मा येंकु आयोजन होंदू । अर येमा क्वीं अनुष्ठान ना बल्कि केवल अवतरण अर नृत्य ही होंदू। अर यों मेलों मा देव डोलियों अर निशानों की शोभायात्रा अर नाच दर्शनीय होंदू।पैला समै मा युं मेळों मां बेटी ब्वारियों कु मिन-जुनक तैंजरुरी माध्यम माण्ये जांदू । प्रत्येक थौळू एक ही दिन कु होंदू ज्यादात्तर मेलों कु एक ही दिन होंदू पर कुछ मेलू का मुर्हत निकेंळ पड़दू  आप तैं बथैं देंदन की गढ़वाल का मुख्य मेळा ये प्रकार सी च । हमारा मेळों मा हमारा इष्ट देवी देवताओं का नौंसी होंदन


        कोरोना का कारण नी ह्वे सकिन ऐंसू थळू
 जादात्तर थौला- मेळा पैलि देवी देवतों का होंदा त पर अब यीं थौला मेला बणिगी।
 पर हमारा उत्तराखण्ड मा सदियों सी पुराणी  बैशाख का थौळा- म्यला की या परम्परा रीत च।सबसी पैलि  बात करदन। टिहरी गढवाल का वीर सपूत अर प्रथम विश्व युद्ध मा शहिद होंया बिक्टोरिया क्राँस  विजेता गब्बर सिंह मेला  यु मेलु हर साल  8 अप्रैल क चंम्बा मा लगदू। जु ये बार कोरोना का कारण नी लगि पाई


·        सदियों सी पुराणु थौलु जनपद रुद्रप्रयाग का जखोली ब्लाक लुठियाग  चिरबटिया मा सदियों सी लगदू बूजर्ग की माणा त यीं 100 साल सी भीन जादा कु समै ह्वेगी ये थळु मा भूमियाल देवता।नागराजा अर इष्ट देवता नगेला की डोली  अर घडियाल देवता की डोली का दगडी लस्या का नगेला की डोली भी नाचदी यु नगेला देवता कु थौलु च जु -11,12,13  मई कतें लगदू पर ये बार कोरोना की वजै सी यु थळू नी ह्वे पाई  
·        बैशाखी का मैना लगण वाला बधाणी ताल म्यला की। जनपद रुद्रप्रयाग का जखोली ब्लाक मा बागर पट्टी का बधाणी ताल गौंउ मा यु मेलू 29 साल बटि लगदू यु हर साल बैशाखी पर लगदू ये कौथिक की पछ्याण च ये मेला की सबसे खास पछ्याण च । रंग- बिरंगा  माछा च। पर कोरोना की वजै सी ना मेळू लगी पाई अर ना लोग रंग बिरंगा माछों का दर्शन नी करिपाईन
·        सुरकंडा कु मेळु- मसूरी सी अगनै धार्मिक अर सिद्धपीठ मा सुरकंडा का नौंउ सी 12-13 अप्रैल क तें लगदू। पर जब सी कोरोना ह्वे तब सी ना भक्त मांका दर्शन करि पाईन अर ना सिद्धपीठ मा सुरकंड़ा कु मेलू लगी सकी
·        खान सौड़ कु थौलु- यु थौलु भौत प्राचिन च अर यु थौलु वे इलाका कु सबसे पुराणु थौळु च  यु 22 गौंउ लस्या कु थौलू होंदू जैमा 22 गौंउ का लौग फांटू जमा करदन अर मिलिक तैं थौलु करदन। पर कोरोना का कारण जनपद रुद्रप्रयाग का जखोली ब्लाक मा लगण वाळू यू थलू नी ह्वे सकी
·         गैंथल कु थौलु-यु थौलु पाँच गति टिहरी जनपद का घणसाली मा पट्टी नैलचामी का ( थौलु धार मा) मां होंदू ये तें घण्डियाल का थळु का नौंउ सी जाण्ये जांदू।
·        12 गती – घनसाली का अंतगर्त नैलचामी पट्टी का बढियार गौंउ तितराणा मा प्रसिद्ध सकलैणा कु थौलु होंदू जै पर कै गीत भी बणिया च ।
·        कुंड कु थौलु- जखोली ब्लाक पट्टी लस्या मा उठनागोर्तीइजरा  उरोली धनकुराली वाळा- ये तीन दिन कु थौलु करदन जुं कुण्ड का सौड मा  कै सालों बटि होणु च।
·        ह्वलाणा खाळ कु थौळु- 11 गति बैशाख यु थौळु  टिहरी गढवाल का घनसाली क्षेत्र मा पट्टी हिन्दाव का हुलाणा खाळ मा होंदू  ये थौलु कु अपणु अलग महत्व च।
·        महेन्द्रु कु थौळु- टिहरी गढवाल का घनसाली क्षेत्र का सारी गौंउ मा लगभग 20 साल बटिन महेन्द्रु देवता कु थौळु लगदु यू थलु 30 गति बैशाख लगदू यु एक भौत प्रसिद्ध मेळु च।
ये थलु का बारा मा एक कथा प्रचलित च  । की महेन्द्रु एक शिकारी थौ अर ऊं शिकार करण दगडयों दगडी डांडा गै । जख दगडयों न चांट पर महेन्द्रु दगडयों न मारी अर भौत साल बाद देवता का रुप मा भौ लिनीन अर हर साल गौं वाळु सी अपणा नौंउ कु थौलु की मांग कैरी। तब सी यु थलु हर साल होंदू।

·        देवी सौड कु थौलु- 1गति  बैशाख मा लगदू जु उत्तरकाश मा लगदु
·        2 गति उत्तरकाशी मा नगुन कु थौळू
·        रेणु का देवी कु थौलु नौं जगा लगदू जख जख मा रेणुका का सिद्धपीठ च।
·        डांडा नागराज कु थौळु- डांडा नागराजा मंजिरे की स्थापना 150 साल पैलि ह्वे थै। ये मंदिर मा हर साल मा 13-14 तारिक बैशाख डांडा नागराज कु थौलु जै थलु मा गोंउ की बेटी ब्वारी खास पकवानों कु डांडा नागराज तें भौग चढोंदिन।
·        बिस्सू मेला जौनसार भाबर कु- बमटाड का विस्सू मेला मा 24 गाँव का लोग शामिल होंदन । 119 साल सी यु मेलु लगदू . ये मेळा कु महत्व फसलों की कटै का बाद मोसम की शुरुवात कु प्रतिक च। यु मेलु स्थानीय लोगों की खुशहाली कु प्रतिक च।
·        स्याल्दे मेला- स्यालदे कु मेळा बिखोती का दिन द्वारहाट मा अल्मोडा मा लगदू।
·        थल- मेळा- पिथोरागढ का बालेश्वर मंदिर मा  बैशाखी का दिन थळ मेळा- लगदू यु मेळा मा 1940 सी बैशाखी का दिन जलियाबाग  दिवस मनाये जांदू 6 दशक सी यु मेलु लगदू जु 20 दिन तक चलदू।
बैशाख का थौळा- मेळों पर लोक भाषा मा कै गीत बणिया च जैमा नेगी जी कु प्रसिद्ध गीत



 ये का अलो प्रमुख थौळू ये प्रकार सी च

द्वीं गते------- डांड़ा नगरजा ,पौड़ी
चार गते----- नैखरी(चंद्रबंदनी कु थौळू)
पांच गते------ प्रतापनगर ,कु थौलू
 सात गते------ जगदी नैलचामी
 छ गते-------- मैगा महादेव,मैगाधार ग्यारह गौं
 सात गते-------- धन सिंह रथी देवता किलूखाल
 आठ गते-----------जागधार गड़ोलिया


नौ गते। -----------         भैरवमूलगढ़नैलचामी
पांच गते  ---------     बरगुल (खासपट्टी)
छह गते।  -----------     अमिल्डा(खासपट्टी)
सात गते  ------------      डंगचौंरा और कांडीखाल
आठ गते ------------      हिंडोलाखाल
नौ गते   ----------      केवल पाटाखाल 
दस गते -------------       डांडापानी  
ग्यारह गते। ----------   देवीहुलानाखालग्यारहगांव
ग्यारह गते   ------------     सूर्यों नांदी
बारह गते--------------        डागर 
तेरह गते  ----------      चौरखाल
चौदह गते  ------------        मांडाजखण्ड 
पन्द्रह गते  -----------    नाथबुध (न्यूली)
सोलह गते ------------     भुवनेश्वरी देवी(टकोली)
बीस गते।  ----------------      मदन नेगी
दो गते जेठ-----------    घनसालीहनुमान मंदिर

उत्तराखण्ड का थौला-मेळों मा हमारी संस्कृति परमपरा बसी च।अर हमारा पीडियों की याद भी मेळों सी जुडी च जों पर हमारी आस्था अर विश्वास बणियों च हमारा पाड की संस्कृति की असली पछ्याण हमारा थौला मेला च । अब जरुरत च यों मेळु तें संरक्षित अर सरक्षण की की यीं ऐतिहासिक थौल मेळा समलोण्या रोला। पर ऐंसू कोरोना की वजै सी हमारा थौळा मेळों का रस्याण फिकी रेगी पर हम सबि देवी देवताओं सी प्रार्थना करदन की जल्दी जल्दी युं कोरोना मिटलू  अगला बैशाख फिर हमारा थळु मेळा होला ढ़ोल-दमौं शंख बजला देवों की डोली नाचली दिशा धियाण मैत ओली फिर हमारा थौला मेळू की बहार ओली।

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां