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सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि-एम्स ऋषिकेश में एयर एंबुलेंस का सफल ट्रायल- सीएम रावत का है ड्रीम प्रोजेक्ट

                                                                               मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का ड्रीम प्रोजेक्ट हो रहा स...

                                                                               मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का ड्रीम प्रोजेक्ट हो रहा साकार   



                                                                                                                                                                                                                                                   मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में एयर एंबुलेंस सेवा की ट्रॉयल लेंडिंग सफल रही। इसके साथ ही एम्स ऋषिकेश देश का पहला ऐसा सरकारी स्वास्थ्य संस्थान बन गया है जिसमें अपनी हेलीपेड की सुविधा उपलब्ध है। इससे राज्य के विभिन्न हिस्सों में आपदा के समय घायल होने वाले लोगों को सुगमता से उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश पहुंचाया जा सकेगा। जिससे आईडीपीएल,जौलीग्रांट आदि स्थानों पर एयर लिफ्ट कर लाए जाने वाले मरीजों को एम्स तक पहुंचाने में लाइफ सेविंग की दृष्टि से होने वाली देरी अब नहीं होगी।                                                                                                                                                                                                                   गौरतलब है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में होने वाली आपदाएं अथवा सड़क दुर्घटनाओं में गंभीररूप से घायलों को राज्य सरकार की ओर से एयर लिफ्ट करके एम्स में उपचार के लिए भर्ती कराया जाता है। इससे पूर्व घायलों को आईडीपीएल हेलीपैड, जौलीग्रांट आदि स्थानों पर हेलीकाप्टर को लेंड कर घायलों को सड़क मार्ग से एम्स ऋषिकेश पहुंचाया जाता था।जिससे मरीजों को एम्स तक पहुंचाने व उपचार में विलंब होता था, जिससे मरीजों खासकर ट्रॉमा पेशेंट की रिकवरी में जोखिम बना रहता था।                                                                                                                         राज्य में विभिन्न दुर्घटनाओं में घायलों को तत्काल एम्स में उपचार के लिए पहुंचाने के मद्देनजर एम्स प्रशासन ने कैंपस में  हेलीपैड बनाया था । सिविल एविएशन की गाइडलाइन्स के अनुसार, एम्स प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय विमान पत्तन प्राधिकरण के मानकों  पर आधारित हेलीपैड तैयार कर दिया गया था,जिसे बीते दिवस नागर विमान मंत्रालय के तहत कार्यरत डीजीसीए द्वारा अनापत्ति प्रमाणपत्र दे दिया था।  डीजीसीए की एनओसी के बाद मंगलवार को एम्स के हेलीपैड पर पहली ट्रॉयल लेंडिंग सफलतापूर्वक कर ली गई।
इस ट्रायल लैंडिंग में एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत जी जॉलीग्रांट से एम्स  हेलीकॉप्टर द्वारा पहुँचे। इनके साथ उत्तराखंड सरकार के नागरिक उड्डयन सलाहकार कैप्टेन दीप श्रीवास्तव भी थे। उन्होंने बताया कि यह मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी का ड्रीम प्रोजेक्ट था जिसकी ट्रायल लैंडिंग  सफल रही ।  एम्स ऋषिकेश में एयर एम्बुलेंस सेवा का मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत निकट भविष्य में विधिवत उद्घाटन करेंगे।                                                                                                                                         इस अवसर पर एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी ने बताया कि गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार दिलाने के लिए राज्य सरकार के साथ साथ एम्स प्रशासन भी गंभीर है,जिसके मद्देनजर एम्स की ओर से परिसर में हेलीपैड का निर्माण करा दिया गया है। उन्होंने बताया ​कि उक्त कार्य में राज्य सरकार व सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी की ओर से एम्स को हरसंभव सहयोग किया गया।                                                                      एम्स ऋषिकेश के एविएशन एवं एयर रेस्क्यू सर्विसेज के इंचार्ज डॉ. मधुर उनियाल जी ने बताया कि एम्स राज्य के किसी भी हिस्से में होने वाली आपदा व सड़क दुर्घटना के घायलों को तत्काल उपचार दिलाने के लिए राज्य सरकार के साथ पूरी तरह से संकल्पबद्ध होकर सहयोग कर रहा है,जिसके मद्देनजर मरीजों की लाइफ सेविंग के लिए कैंपस में ही हेलिपैड बना लिया गया है,जिससे भविष्य में घायलों को परिसर में एयरलिफ्ट कर पहुंचाया जा सकेगा और जल्द से जल्द उनका इलाज शुरू कर दिया जाएगा। इस अवसर पर ​डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता, डीन अस्पताल प्रशासन प्रो. यूबी मिश्रा, उपनिदेशक प्रशासन अंशुमान गुप्ता, प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह, प्रो. कमर आजम,  अधीक्षक अभियंता अनुराग सिंह, डा. बलराम जीओमर, जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल, रजिस्ट्रार राजीव चौधरी तथा अन्य संकाय सदस्य आदि मौजूद थे।

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