यूपीएससी में 257 रैंक हासिल कर चमोली की प्रियंका ने पहाड़ की बेटियों को देश में दिलाई नई पहचान

 नाज है ऐसी बेटी पर!-- रामपुर (देवाल) की प्रियंका नें यूपीएससी में 257 रैंक प्राप्त कर पहाड़ की बेटियों को दिलाई पहचान, देवाल में हुआ सम्मान...



(ग्राउंड जीरो से संजय चौहान!)

आज पूरा देश 74 वां स्वतंत्रता दिवस पर खुशियां मना रहा है। लेकिन चमोली जनपद की पिंडर घाटी के लोग बीते एक पखवाड़े से देश की प्रतिष्ठित परीक्षा यूपीएससी में अपनी बेटी के चयनित होने पर खुशियां मना रहा है। हो भी क्यों न क्योंकि पहली बार पिंडर घाटी की किसी बेटी नें यूपीएससी की परीक्षा में 257 रैंक प्राप्त कर परचम जो लहराया। 


-- पहाड़ की बेटी का पहाड़ जैसा हौंसला, खुद की मेहनत के जरिए हासिल किया मुकाम!



अगर आप लक्ष्य पर फोकस कर रहे हैं, मेहनत कर रहे हैं तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती। सफलता मिलनी तय है। जी हां उक्त पंक्तियों को सार्थक कर दिखाया है सीमांत जनपद चमोली के देवाल ब्लाॅक के पिंडर घाटी के रामपुर गांव की प्रियंका नें। यूपीएससी की परीक्षा में 257 रैंक प्राप्त कर प्रियंका नें पहाड़ की बेटियों के लिए नये प्रतिमान स्थापित किये हैं। प्रियंका नें अपने गांव रामपुर के प्राथमिक विद्यालय से पांचवी तक की पढाई की जबकि 3 किमी दूर तोर्ती गांव से कक्षा 6 वीं से 10 वीं तक की पढाई की। जिसके बाद प्रियंका नें 12 की पढाई और स्नातक की डिग्री गोपेश्वर से प्राप्त की। वर्तमान में प्रियंका देहरादून के डीएवी कालेज में एलएलबी की अंतिम सत्र की छात्रा है। 


-- सेल्फ स्टडी और निरंतरता को बनाया सफलता का हथियार!




प्रियंका नें यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी के लिए कोई कोचिंग संस्थान ज्वाइन नहीं किया। सेल्फ स्टडी, निरंतरता और लाइब्रेरी के जरिए खुद नोट्स बनाये और तैयारी की। गोपेश्वर महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान तत्काल जिलाधिकारी से मिली प्रेरणा नें प्रियंका के सपनों को पंख लगायें जबकि प्रियंका के मामा नें भी प्रियंका का मार्गदर्शन किया। प्रियंका नें बच्चो को ट्यूशन भी पढाया।


प्रियंका की सफलता नें पहाड़ की बेटियों के लिए दिलाई पहचान!


लोगों को आज भी पहाड़, पहाड़ की नजर आता है। लेकिन यहाँ की प्रतिभाओं नें हमेशा सीमित संसाधनों, आभावों और बेहतर माहौल न मिलने के बावजूद सदैव अपनी प्रतिभा का लोहा मनाया है। खासतौर पर पहाड़ की बेटियों को आगे बढ़ने के समुचित अवसर नहीं मिल पाते हैं। परंतु प्रियंका की सफलता नें इस मिथक को तोड दिया है। अब पहाड़ की बेटियां भी अपनी मंजिल खुद तय कर सकती है। प्रियंका अब पहाड़ ही नहीं उत्तराखंड की लाखों बेटियों के लिए राॅल माॅडल है। प्रियंका से सीख लेकर अब हर साल यूपीएससी की परीक्षा में पहाड़ की बेटियां भी अपना परचम लहरायेंगी।


-- यहाँ है प्रियंका का गांव रामपुर!



चमोली जनपद के दूरस्थ ब्लाॅक देवाल से लगभग 50 किमी दूर है पिंडर घाटी में रामपुर गांव। लगभग 70-80 परिवार वाले इस गांव की जनसंख्या लगभग 280 है। गांव में मूलभूत सुविधायें अभी भी नहीं पहुंच पायी है। दूरसंचार, विधुत, स्वास्थ्य, परिवहन की सुविधा नहीं है। 


-- गृहक्षेत्र देवाल में मिले सम्मान से अभिभूत हुयी प्रियंका!


यूपीएससी में चयनित होने के बाद से ही पिंडर घाटी में खुशी का माहौल है। यूपीएससी की परीक्षा में 257वां स्थान हासिल करने के बाद अपने गृहक्षेत्र देवाल पहुंचने पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और लोगो ने प्रियंका का स्वागत किया। इस दौरान प्रियंका ने युवाओं से अनुभव साझा करते हुए कहा कि मेहनत व लगन से हर मंजिल आसान हो जाती है। प्रियंका नें कहा की जो भी युवा सिविल सेवा की तैयारी कर रहे हैं, वे अपनी रुचि के अनुसार ही विषय को चुने। परीक्षा को लेकर वह उनकी हर संभव मदद करेगीं। हर विषय का मन लगाकर अध्ययन करना चाहिए। आईएएस को रणनीति नहीं, समर्पण जरुरी है।


वास्तव में देखा जाए तो प्रियंका नें प्रतिष्ठित यूपीएससी परीक्षा में सफलता से पहाड़ की बेटियों के लिए नये प्रतिमान स्थापित किये। प्रियंका नें दिखलाया है कि यदि पहाड़ की बेटी यदि ठान ले तो कोई भी कार्य असंभव नहीं हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले समय में प्रियंका से प्रेरणा लेकर हर साल यूपीएससी की परीक्षा में पहाड़ के युवा भी सफल होंगे।


हमारी ओर से प्रियंका को यूपीएससी की परीक्षा में चयनित होने पर ढेरों बधाईयाँ। साथ में उनके माता पिता और पूरे परिवार को भी। आखिर उनकी बेटी नें एक नयी लकीर जो खींची है। भले ही प्रियंका के गांव के ठीक सामने बहने वाली पिंडर नदी में हर रोज हजारों क्यूसेक पानी यों ही बह जाता हो लेकिन पहाड़ की इस बेटी नें अपना हौंसला नहीं खोया। विपरीत परिस्थितियों और संघर्षों के जरिए अपना मुकाम खुद हासिल किया।


स्वतंत्रता के असली सारथी पहाड़ की इस बेटी को हजारों हजार सैल्यूट।

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