गढ़वाळि कवयित्रियों को पैलो ऐतिहासिक वृहद कविता संग्रै "आखर कु ह्वे लोकार्पण

 गढ़वाळि कवयित्रियों को पैलो ऐतिहासिक वृहद कविता संग्रै "आखर" (दिसा- धियाण्यूं को पैलो वृहद गढ़वाळि कविता संग्रै ) को श्रीनगर गढ़वाल मा ह्वे  लोकार्पण -

(संदीप रावत ,श्रीनगर गढ़वाल)


  गढ़वाळि कवयित्रियों को पैलो ऐतिहासिक वृहद कविता संग्रह "आखर" (दिसा- धियाण्यूं को पैलो वृहद गढ़वाळि कविता संग्रै ) को लोकार्पण आज नगरपालिका सभागार, श्रीनगर गढ़वाल मा मुख्य अतिथि अर श्रीनगर गढ़वाल नगरपालिका कि माननीय अध्यक्ष श्रीमती पूनम तिवाड़ी जी, कार्यक्रम अध्यक्ष अर विभागाध्यक्ष (अंग्रेजी विभाग) हे0 न0 ब0 ग0 के0 विश्व विद्यालय कि  प्रो.सुरेखा डंगवाल जी ,वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती उमा घिल्डियाल जी अर डॉ0 कविता भट्ट ' शैलपुत्री ' का हथों से  ह्वे।


  "आखर" (दिसा- धियाण्यूं को पैलो वृहद गढ़वाळि कविता संग्रै ) को सम्पादन गढ़वाळि भाषा साहित्य तैं समर्पित संस्था ,'आखर ' समिति (श्रीनगर गढ़वाल) का संस्थापक,गढ़वाळि भाषा - साहित्य सेवी,  शिक्षक संदीप रावत अर सूरत (गुजरात) बटि युवा गढ़वाळि साहित्यकार ,भाषा - साहित्य विचारक  श्री गीतेश सिंह नेगी जीन सयुंक्त रूप से कर्यूं छ। 


   कार्यक्रम कि शुरुवात  मंचासीन  अतिथियूं द्वारा द्यू बालिक अर  कवयित्री आरती पुंडीर जी कि  गढ़वाळि सरस्वती वंदना से ह्वे। वे का  बाद मंचासीन अतिथियों को बैच अलंकरण कैरिक आखर स्मृति चिन्ह भेंट करे ग्ये।


लोकार्पण समारोह मा शामिल प्रबुद्ध साहित्यकारों , गणमान्य नागरिकों तैं संबोधित कैरिक श्रीमती पूनम तिवाड़ी जीन 'आखर' का सम्पादन कार्य तैं गढ़वाळि साहित्य मा एक नै अर ऐतिहासिक पहल बतै अर येका वास्ता द्वी संपादक  कि सराहना करि।


     प्रो0 सुरेखा डंगवाल जीन गढ़वाळि साहित्य मा 'आखर' का प्रकाशन तैं मुन्यारो ढुङ्ग बतै अर बोलि  कि  'आखर' केवल  गढ़वाळि कवितौं कु संकलन नि , यो ये समाजै अद्धा आबादि  यानि  जनान्यों अभिव्यक्ति को ज्यूँदो - जागदो दस्तावेजीकरण च।


   यां का बाद वरिष्ठ कवयित्री डॉ0 उमा घिल्डियाल जी अर  डॉ0 कविता भट्ट ' शैलपुत्री 'जीन फैलास कैरिक  "आखर" (दिसा- धियाण्यूं को पैलो वृहद गढ़वाळि कविता संग्रै ) पर अपणा  समीक्षात्मक विचार रखीं। 


          संदीप रावतन  अपणा  वक्तव्य मा आखर समिति,श्रीनगर गढ़वाल द्वारा सितम्बर 2018 मा श्रीनगर- गढ़वाल मा उर्यां गढ़वाळि का पैला कवयित्री सम्मेलन अर गढ़वाळि साहित्य मा दिसा- धियाण्यूं  का ये पैलो ऐतिहासिक कवयित्री संकलन कि संपादक द्वय  द्वारा संकल्पना अर नै पहल परैंं अपणी  बात रखी अर बोलि  कि दुन्यौ हर कारिजौ तरां गढ़वाळि साहित्य मा बि दिसा- धियाण्यूं  योगदान अविस्मरणीय छ। गढ़वाळि साहित्य मा दिसा- धियाण्यूं को यो पैलो कविता संग्रै एक नै पवांण च अर हमतैं पुरो विश्वास च कि ये का बाद ना सिर्फ कविता मा बल्किन हौरि बि विधाओं मा  दिसा- धियाण्यूं का सृजन परैं केन्द्रित साहित्यिक कारिज उर्ये जाला ,वूं परैं गम्भीरता से विचार होलु ,अगर इन्नि  सकारात्मक कार्य होला त हम अपणी ईं नै अर ऐतिहासिक  पहल तैं सुफल समझला। वोंन बोली कि- उत्तराखण्डै प्रख्यात समाज सेविका अर गढ़वाळि साहित्यै पैली कवयित्री स्व. विधावती डोभाल अर वू का  प्रेरक योगदान तैं सुमरिक  यो  संग्रै वूतैं ही समर्पित करे    ग्ये किलैकि वू नारी जागृति अर शिक्षा संचेतना कि  सामाजिक प्रतीक छाई अर वोंन  हमारा समाजै दिसा- धियाण्यूं तैं लिखण-पढ़णै प्रेरणा दे। ये कार्यक्रम मा मंचासीन मुख्य अतिथि,अध्यक्ष जी , द्विया मुख्य वक्ता अर संचालिका बि आज हमारा बीच हमारा  समाजै  प्रेरक मातृशक्ति ही छन । हम वूतैं नमन करदों।


     वून 'आखर' का प्रकाशक ,रावत डिजिटल का श्री अनूप सिंह रावत अर ये आयोजन तैं सुफल बणाण वळा सब्बि कारिबारियूँ अर शामिल हुण वळा श्रीनगर का सब्बि गणमान्य जनों को बि हार्दिक आभार व्यक्त करि।


 कार्यक्रम को सुन्दर संचालन  शिक्षिका, कवयित्री अर गायिका श्रीमती बबीता थपलियाल जीन करि । आयोजन मा शामिल सब्बि अतिथियों कु स्वागत  रेखा चमोली जीन करी। 


 कार्यक्रम मा श्रीनगर का तहसीलदार साब अर कवि श्री सुनील राज जी, श्रीमती आरती पुण्डीर  , श्रीमती अंजना  घिल्डियाल, सभासद विनोद मैठानी, श्रीमती रेखा चमोली, श्रीमती रेखा रावत,  श्रीमती अनिता काला, श्रीमती सायिनी उनियाल,श्रीमती प्रियंका नेगी,श्री डी. पी.खंडूड़ी ,डॉ0 अरुण कुकसाल,श्री दीवान सिंह मेवाड़ , प्रसिद्ध कवि श्री जय कृष्ण पैन्यूली अर  श्री देवेन्द्र उनियाल, पूर्व प्रधानाचार्य श्री ताजबर सिंह नेगी,श्री सत्यजीत खंडूड़ी,श्री मुकेश काला, श्री विजय मेवाड़, Etv  का श्री सुधीर भट्ट,  श्री कृष्ण उनियाल  आदि गणमान्य लोग शामिल ह्वेनी ।

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां