Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Hover Effects

TRUE

a1

{Entertainment}{slider-1}
{fbt_classic_header}

Header Ad

Breaking News:

latest

Ads Place

यह वक्त संकल्प को सफलता में बदलने का है-डाॅ.वीरेंद्र बर्त्वाल की कलम से

 यह वक्त संकल्प को सफलता में बदलने का है एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में कोविड-19 के बीच परीक्षाओं का सुचारु संचालन देहरादूनः संकल्प...

 यह वक्त संकल्प को सफलता में बदलने का है


एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में कोविड-19 के बीच परीक्षाओं का सुचारु संचालन




देहरादूनः संकल्प को सफलता में बदलना कठिन तो है, पर असंभव नहीं। समस्या है तो समाधान भी है। बस जरूरत परिश्रम, सावधानी और दृढ़ इच्छा शक्ति की होती है। कोरोना काल में लगभग पांच हजार बच्चों की एक साथ परीक्षा लेना मुश्किल था, लेकिन प्रशासनिक कुशलता, कार्मिकों-प्राध्यापकों के समन्वय, सहयोग और विद्यार्थियों के साथ मधुर संबंधों से यह कार्य सफल हो रहा है। बात हो रही है गढ़वाल विश्वविद्यालय की।

हेमवती नंदन गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्याल में इन दिनों ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं चल रही हैं। परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों में नाॅन प्रोफेशनल के साथ ही प्रोफेशनल कोर्सों के छात्र भी शामिल हैं। इन परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से ऊहापोह चल रही थी। कोविड-19 से सभी भयभीत थे। अनेक विद्यार्थी लाॅकडाउन के बाद अपने घरों को चले गए थे। उनके आवागमन की भी परेशानी थी। उनकी सुरक्षा को लेकर जितने बच्चों के माता-पिता चिंतित थे, उससे अधिक विश्वद्यालय प्रशासन था। 

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय पहले ही साफ कर चुका था कि ग्रेजुएशन और पीजी फाइनल के छात्रों को हर हाल में परीक्षा देनी होगी, क्योंकि यह इन बच्चों के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। मंत्रालय नहीं चाहता कि इन बच्चों की डिग्री पर कोविड-19 का ठप्पा लगे और इसका दुष्परिणाम बच्चों को करियर में नुकसान होने के रूप में भुगतना पड़े।

मंत्रालय के रवैये को देख विश्वविद्यालय प्रशासन परीक्षा की हरी झंडी के इंतजार में था। परीक्षा के लिए पहले से तैयारी कर बैठे विश्वविद्यालय प्रशासन ने निर्धारित समय पर परीक्षाएं शुरू करवा दीं। पहले और दूसरे दिन पौड़ी, चैरास (श्रीनगर) और बादशाही थौल (नई टिहरी) परिसरों में परीक्षाएं निर्बाध संपन्न होने के बाद विवि प्रशासन संतुष्ट और राहत में है। कोविड-19 से बचाव के दृष्टिगत भारत सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक सभी छात्रों के बैठने और परीक्षा देने की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा और भविष्य दोनों का ख्याल रखा जा रहा है। इस परीक्षा में तीनों परिसरो ंमें लगभग 5000 हजार बच्चे भाग ले रहे हैं। खास बात यह है कि परीक्षा में अनुपस्थित बच्चों की संख्या बहुत कम है, जबकि आशंका थी कि कोरोना के भय से काफी बच्चे परीक्षा देने से बचेंगे। चैरास (श्रीनगर) कैंपस में आयोजित परीक्षा में पहले दिन तीनों पारियों में बहुत कम बच्चे अनुपस्थित रहे। 

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल के अनुसार विश्वविद्यालय प्रशासन सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन करते हुए परीक्षा आयोजित कर रहा है। प्राध्यापकों, कार्मिकों के बेहतरीन समन्वय और नियमबद्धता के कारण परीक्षा सुचारु संचालित हो रही है। छात्र भी नियमों का पालन करने में पूरा सहयोग कर रहे हैं। किसी भी छात्र को मास्क उतारने नहीं दिया जा रहा है। सेनिटाइजन, सोशल डिस्टेंसिंग इत्यादि की पूरी व्यवस्था है। एक छात्रा जो कोरोना पाॅजिटिव निकली थी, उसकी परीक्षा आइसोलेशन में कराई जा रही है। उसका समय बरबाद नहीं होने दिया जाएगा। व्यवस्थाओं पर बारीक नजर रखी जा रही है। हमें बच्चों के साथ ही अपने कार्मिकों और प्राध्यापको की सुरक्षा की भी चिंता है। इसके लिए सभी व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त की गई हैं। मुझे उम्मीद है कि यूनिवर्सिटी परीक्षाओं का सुचारु और निर्विघ्न संचालन करेगी। 19 सितंबर को आरंभ हुई परीक्षाएं 9 अक्टूबर को संपन्न होंगी।

उधर, केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल ने परीक्षाओं के सुचारु संचालन के लिए एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय प्रशासन को बधाई और विद्यार्थियों को 

शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि हम अपने लक्ष्य में सफल जरूर होंगे। बच्चों के भविष्य के लिए परीक्षाएं जरूरी थीं, लेकिन परीक्षाओं के दौरान उन्हें स्वास्थ्य के लिहाज से कोई नुकसान न हो, यह भी जरूरी है। इसलिए हमने गंभीरता से चिंतन-मंथन कर ऐसे कदम उठाने पड़े। डाॅ. निशंक ने कहा कि आज कि विपरीत परिस्थितियों से जूझने वाले बच्चे अधिक सफल होते हैं। मुझे उम्मीद है कि कोरोना काल में चुनौतियों का सामना करते हुए परीक्षा दे रहे बच्चे जरूर बड़ी सफलता हासिल करेंगे।

वरिष्ठ पत्रकार लेखक

(डाॅ.वीरेंद्र बर्त्वाल)

No comments

Ads Place