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बुढ़ना(फतेडू) में रूपेश और प्रवेन्द्र ने शुरु किया चप्पल बनाने का व्यवसाय-चप्पलों की स्थानी लोगों में भारी डिमांड

  लॉकडाउन में बुढ़ना(फतेडू) में रूपेश सिंह और प्रवेन्द्र सिंह ने शुरु किया चप्पल बनाने का व्यवसाय-चप्पलों की स्थानी लोगों में भारी डिमांड रा...

 

लॉकडाउन में बुढ़ना(फतेडू) में रूपेश सिंह और प्रवेन्द्र सिंह ने शुरु किया चप्पल बनाने का व्यवसाय-चप्पलों की स्थानी लोगों में भारी डिमांड



रामरतन सिह/जखोली  उतराखंड का पर्वतीय क्षेत्र जो कि अपनी बिषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकसित नही हो पाया तथा परम्परागत कृषि/उधान व पशुपालन इ स क्षेत्र का आज की दौर मे मुख्य ब्यवसाय भी नही कहा जा सकता है।क्योंकि स्वयं के परिवार हेतू अनाज की उपलब्धता उनके भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नही है,जिससे कि पहाड़ से निकल कर कहीं बहारी राज्यो या सूदूर देशो के अन्य संगठित क्षेत्र मे रोजगार को तलाशते युवा वर्ग जो सहास नहीं आपनी पैतृक भूमि मे अपने आजीविका के साधन अपना कर रोजी रोटी का साधन बना कर किया जा सकता है।वर्तमान समय मे 19 कोविड के कारण जो लोग अपनी रोजी रोटी के लिए बहारी राज्यों मे फैक्ट्रियो, होटलो दफ्तरों मे नौकरी करते थे वे आज असंमजस मे है कि किस प्रकार से अब जीवन यापन किया जा सकता है।जबकि एक कहावत बिशेष तौर पर प्रचलित है कि पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी पहाड़ के काम नही आती।कठिनाइयों की अधिकता के कारण हर कोई यहां पर हर कोई अपना उधोग या कारोबार को इन भौगोलिक बिषमताओ के कारण शूरू नही कर पाते है लेकिन इन सबको भूला कर विकासखंड

जखोली के ग्राम पंचायत बुढना के निवासी रुपेश सिह गहरवार और प्रवीन्द्र सिह राणा ने फतेड़ू बाजार मे चप्पल बनाने की मशीन लगा डाली।ताकि ये लोग अपनी आजीविका चला सके,इस चप्पल बनने की हाइड्रोलिक मेन्यूवल मशीन को लगाने मे लगभग तीन लाख रुपए का खर्चा आया।इस मशीन को लगाने मे इन दोनो प्रवासियो ने कोई सरकारी सहायता नही ली ब्लिक अपने खुद के दम पर इस मशीन को इन लोगो के द्वारा लगाया गया, रुपेश और प्रवीन्द्र का कहना है कि कई लोगो ने कृषि,पशुपालन को बढावा दे रहे है लेकिन हमने चप्पल बनाने का रास्ता चुना।बता दें कि बीते माह यानी अगस्त मे हमने एक छोटी सी चप्पल बनाने की मशीन लगायी थी, शूरुआती दौर मे तो चप्पल बनाने का धन्धा कुछ अटपटा सा लगा लेकिन अब हर कोई उनके धन्धे की तारीफ कर रहे है।वैसे तो अब तक पहाड़ के लोग मैदानी भागो मे बनाए जाने वाले चप्पलें ही पहनता था लेकिन अब धीरे धीरे समय बदलने के साथ साथ पहाड़ के युवाओं की सोच भी बदल रही है।वैसे भी वो दिन अब दूर नहीं जब स्थानीय माँग के अनुरूप पहाड़ मे ही पूरा माल तैयार होने लगेगा, प्रतिदिन मेहनत करके ये दोनो प्रवासी दो सौ से अधिक चप्पल तैयार कर रहे है।इनका ये भी कहना है कि इसके साथ साथ हम लोग अन्य किसी बेरोजगारो को इस व्यवसाय के माध्यम से रोजगार देने की भी पहल कर रहे ताकि वो लोग भी अपने परिवार का आर्थिक संकट से ऊबर सके, तथा माल को अधिक मात्रा मे तैयार कर बहारी क्षेत्रों मे सफ्लाई कर उचित मूल्य पर बेचा जा सके।

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