सुप्रीम कोर्ट से सीएम रावत को राहत-विरोधियों को झटका

 सुप्रीम कोर्ट को सीएम रावत को राहत-विरोधियों को झटका



सीबीआई जांच के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत (Trivendra Singh Rawat) को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसमें सीएम त्रिवेंद्र सिंह के खिलाफ CBI जांच के आदेश दिए गए थे।



एक स्टिंगबाज कथित पत्रकार द्वारा लगाए आरोपों के आधार पर मंगलवार को हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि सीएम त्रिवेंद्र के खिलाफ सीबीआई जांच की जाय। आरोप लगाया गया कि सीएम त्रिवेंद्र ने झारखंड प्रभारी रहने के दौरान अमृतेश चौहान से 25 लाख रुपए लिए हैं, ये पैसे सीएम के रिश्तेदार हरेंद्र रावत के खातों में डाले गए हैं। हालांकि हरेंद्र रावत ने आगे आते हुए कहा था कि सीएम से उनका दूर दूर तक कोई नाता नहीं है और न ही उनके किसी भी खाते में एक पैसा भी पहुंचाया गया है। हरेंद्र रावत ने इस मामले में उमेश कुमार के खिलाफ भी शिकायत की है जिसकी एसआईटी जांच चल रही है।




इसके बाद भी स्टिंगबाज उमेश कुमार ने झूठ पर झूठ गढ़ कर हाईकोर्ट में मुद्दे को मसालेदार बना दिया, हाईकोर्ट ने सीएम को पार्टी बनाये बगैर ही सीएम के खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश पारित कर दिया था।

इस मामले को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट में बताया कि उत्तराखंड हाईकोर्ट का फैसला पूरी तरह से गलत है। यह एक मामला है जहां पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है और जांच चल रही है। दूसरे पक्ष को सुने बिना आदेश उत्तराखंड हाई कोर्ट द्वारा पारित किया गया है।

जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मुख्यमंत्री को सुने बगैर ही हाईकोर्ट द्वारा इस तरह का सख्त आदेश देने से सब भौंचक्के रह गए क्योंकि पत्रकारों की याचिका में रावत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध भी नहीं किया गया था। सीएम और राज्य को पार्टी बनाए बिना इस तरह का आर्डर पास किया गया है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीआई जांच के आदेश पर रोक लगाई जाती है। कोर्ट ने फिलहाल दोनों पक्षों से 4 हफ्तों में विस्तृत जवाब मांगा है

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