ख्वटा पसार्दि बीमारी अर हरचदि मनख्यात"--जरूर पीढ़ियां

 -"ख्वटा पसार्दि बीमारी अर हरचदि मनख्यात"--


                   -----@दीपक कैन्तुरा ग्राम लुठियाग पो.ओ.चिरबटिया  जिला रूद्रप्रयाग जखोली ब्लॉक




"आज मनख्यात का भौ हरचदि जांणा

हैंसदा सुखिला दिनों हर क्वी बधै द्योणू च

दुख्यारा कडांदा दिनों क्वे संत खबर नी ल्योणा

अब तुम बोला दूं, मनखी कै दिशा जांणू च

बीमारी मा संत खबर नी ठीक ह्वे तैं दारु की पाल्टी खुजाणु च

जरा सोचा की हमारु समाज कख जाणु च"

  • एक दगडिया मेरू दिल्ली मा रेंदू वै तैं भी कोरोना ह्वेगी एक दिन राजी खुशी पुछणक फोन करी त ऊ धण-मण-धण-मण रोण लगी मैन पूछी किले रोणु दगडिया दगडिया की बात सुणिक मैं हैरान रेगियों दगडिया न बोली की कम सी कम त्वींन त फ़ोन करी  अर दगड़ी दगड़ी बोली की एक मैना बटि कोरोना सी संक्रमित कैकु फोन नी आई  जबकि300 लोग मेरा स्टाफ मा च 5000 फेसबुक मा च अर 3500 वटसप पर च पर कै निर्दयन फोन नी करी जबकि हमारा मालिक लगातार संत खबर ल्यणा च पर जूं दगड़ी रोज की महफिल जमदी थे जौंका सुख दुख मा साथ दिनी जौं तैं हात पकड़ी सिखाई तौंन एक फोन करी तैं नी पुछी की कनि च तुम्हारी तबियत । जब तै दगड़िया की बात सुणि त अचंबा ह्वे अर मैं तैं ये लेख लिखणक तैं मजबूर करियाली 
  • आज कु समै यनू नी की फोन पर रिचार्ज नी यनू भी नी की समै भी नी सब कुछ सुविधा होंणा का बाद इंसानियत हरचणी च ।
  • जब तक अफु पर क्वीं दुख बीमारी समस्या न ओ तब तक हम तैं तैं समस्या नी समझणा च।
  • अब तुम्ही बोला कोरोना से कने जंग जीती सकदा?

        


ईं पंक्ति आज सैरा समाज तै ऐना च जख आज मनखी भलि शिक्षा का खातिर सैरौ  तरफ औंदा पर यूं सैरौ मा जथगा चकाचौंध च, तखि मनख्यात  का नौं पर, यूं सैरौ मा अंधाघोर च!  अर हाल यु च, कि एक ही घौर मा यक-हैका दगड़ि बुलांदा तक नी!  केतै दुख बीमारी ह्वो त, सैयोग त दूर की बात,संत-खबर तक नि पूछदन!  दुख्यारा मनखी तरफां  मुख फरकौंदा अर पाणी तक नि पूछदा।

 या ब्यथा च सैरो की, जौं सैरों मा हम  अपणी थाती-माटी छोड़ीक तै आयां छिन अर गौं छोड्या छिन, अपणी तरक्की का खातिर!  नौन्यालौं की पढ़ै- लिखे का खातिर!

यनु ना कि तरक्की नी कना, अच्छा पद पौ-प्रतिष्ठा पर भी छिन, पर सब कुछ ह्वोंणा का बाद भी जु कमी च स्या च,  मनखि अर मनख्यात का भौ।

 धीरे –धीरे हर्चणी च मनख्यात,  किलैकि मनखि बस अफु तक ही सीमित रैगी, अपणा दुख तै ही दुख माण्णूं च, अपणि समस्या तैं ही समस्या माण्णूं च! होरोंकि समस्या तै दिखोटीपन  बथौणा छिन, येमा पूरु समाज ना, बलकन कुछ असामाजिक लोग छिन जु अफु तै, ऊंचा दिखौणा का चक्कर मा चापलूसी अर चाटुकारिता कर्दन यि लोग मनख्यात  तै एक वायरस बणीन, इंसानियत नौं की चीज दिनों-दिन खतम होंणी च।




गौंकी बात भी कर्दा-

 हम गौंकी जब भी, बात कर्दन त हमारा दिल दिमाग मा इंसानियत की अलगे तस्वीर बणि जांदी,  जब केतै भी दुख बीमारी ह्वोंदि त गौंका लोग सब एकमुठ्ठ ह्वे जांदन, अर एक हैका तै पूछदन ।

 संत-खबर कन वळौकि लैन लगी रंदि, इथगा ही ना यख  तक कि क्वे मातृ शक्ति बीमार ह्वोंदी त दीदी-भूल्यों खबर कनौ लैन लगी रंदि।

अर हर क्वी सारु दैंदु, हर क्वीं तन-मन से मौ-मदद कर्द।

क्वे धौन गौडी देखदा त क्वे घास पुंगण्यूं नळये-ग्वडै।

 आज भी हमारा गौंमा, पाड़ मा, मनख्यात का भौ, भै-भयात् जुंदा छिन।  बोल-चाल कै भी मनमुटाव ह्वे जो, पर दुख मा सब घिर कठ्ठा ह्वे जांदन, किलैकि हमारी माटी-थाती, पूर्वजों का संस्कार छिन हमारा खून मा,अर तबैत आज यख इंसानियत का भौ ज्यूंदा छिन।




कोरोना कु समै-


जब बटि कोरोना ह्वे, तबार बटि सब चखल- पखल ह्वयूं च, जरा क्वे छींकणु च, खासणू च, त लोग तेका धोरा नजीक तक नी ओंणा। 

आजकाल जुखाम सर्दी वौळा समै मा भी ये दौर सी लड्णा छिन लोख।

 कैका घर आवत- जावत च जरा सी भी खांसी ह्वेगी लोग कुंड़ा तक नी ख्वना किलैकि  सबुका दिल अर दिमाग मा बस कोरोना कु बैम च, अगल-बगल क्वे कोरोना पॉजिटिव ऐगि त वैकु दिन कु खाणु अर रात की नींद हराम ह्वई च अर आदा-आदा रात स्वींणा मा चचलांणा छिन, कखी कोरोना त नि ह्वेगी, अर लोग आधा सी जादा लोग मानसिक तौर पर बीमार छिन।  ये कोरोना न  जख इंसान जिन्दगी अर मौत का बीच फस्यूं च वखि कोरोना मानव जाति पर भी खतरा बण्यूं च  मनख्यात का भौ  भी कोरी कोरी खाणु च लुकाणू च। 

 इंसान निर्दयी ह्वोणू च , अर कोरोना मा यन-यन मामला औंणा छिन जौंका बारा मा हम कबि  सोची  नि सकदा।

जे ब्वेन नौ मैना तक कोख मा पाळी-सैंती लडयैन, तैई मां का अंतिम संस्कार सी भी हम कतरांणा छिन अर मां का सरील छोड़िक तै चलिगिन।

 उत्तरप्रदेश का रामपूर मा ही बीत्यां दिनौ कु मामलू च जख कोरोना से बाळा की तबियत बिगड़ी त वेतैं  एक निजी अस्पताल मा भर्ती कर्येगे अर जब वैकु टेस्ट करि त वेकी रिपोर्ट पॉजिटिव पायीगे। मासूम बिचारा की मौत ह्वेगी जब वेका बाबन सूणी रिपोर्ट पॉजिटिव थै, तून सूणिक तै अपडा  नौन्याळ कु शव अस्पताल मा ही छोड़ीक तैं घर भागी गैन।

 यन कै मामला सामणि ऐन,

 झारखण्ड की राजधानी रांची मा ही देखा, जख 18 दिन का नवजात तै छोडी दादा दगड़ी च अर मां-बाप कु क्वीं पता नी।   

वखी एक यनि हैकि घटना बिहार का नवादा जिला की च, जख 66 साल की चंद्रकांति सिन्हा की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थै अर 14 जूलाईक तैं चंद्रकांति सिन्हा की अस्पताल मा मौत ह्वेगी मौत का बाद ऊंका बड़ा बेटान मृत्यु  प्रमाण पत्र त बणांई च, पर कोरोना सी संक्रमित मां तै अस्पताल मा  ही छोड़िक तै भाजी गे।

  अब आप ही सोचा की जैं मां न 9 मैना तलक कोख उठे, भार सै होलु अर रुडी कु घाम सै होलू ह्यूंद कु जाड़ू सारी ह्वोली,  बसगयाळ की बरखा मा रुझी होला अर स्वीलि पीड़ा सै होली अर अफु भूखी तीसी रै होली अर अपणा बांठो कु अपणा नौन्याल दीनि होलू!  आखिर मा ऊं नौन्याळुन आखिर बगत मां  तै ना पाणी पिले अर ना ही लाखड़ू दीनी!

 भले हम माण्दा कि कोरोना च, पर इंसानियत ज्यूंदी ह्वोंदि त अंतिम संस्कार भी ह्वोंदू लेकिन कोरोना कु बानू लगैक  मनख्यात हर्चौणा छिन!

कोरोना संक्रमित बिचारा त द्वारि मार झ्यन्ना छिन

जु आज कोरोना संक्रमित च सि द्वारी मार झ्यना छिन, एक त सि कोरोना सी जिन्दगी अर मौत का बीच झूलणा-जूझणा छिन त दूसरि तरफां समाज ऊतै दोस द्येणू च।

 कोरोना संक्रमितों से बात ह्वे त ऊंकु बोलणू च की जब हमारी रिपोर्ट पॉजीटिव आंई त ऊंतें एक अपराधी की नजर सी दिख्ये जाणू च अर तौतैं दोस द्येणा छिन।

जै कोरोना होणू च

लोग तैक ब्वना तु कख बटिन कोरोना ल्योंणू च

एक तरफ बीमारी सी परेशान दूसरी तरफ समाज पिथोणू च

इंसान की अपड़ी इंसानियत हरचणी हेका मां इंसानियत खोजणू च


 तुम कख बटिन कोरोना ल्यैन?

    सकुटूम्ब बिचारा ई मार झेलणा छिन!

 अब आप सोचा की आप चांदा छिन कि  हम पर यन घातक बीमारि ना लगु।

 हम  सबुतै  मिलीतै बीमारी दगड़ी लड़ण पडलू, कोरोना सी जंग जीतण और इंसानियत की अलख जगौण पडली।

  आखिर मनख्यात जूंदी राखण भी हमारू फर्ज च।

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