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एनआईटी श्रीनगर में लौट रही पुरानी रौनक

 एनआईटी श्रीनगर में लौट रही पुरानी रौनक लौट रहे हैं जयपुर कैंपस गए प्रोफेसर और स्टाफ, अब पढ़ाई यहीं से  डॉ.वीरेन्द्र बर्त्वाल देहरादूनः एनआईट...

 एनआईटी श्रीनगर में लौट रही पुरानी रौनक




लौट रहे हैं जयपुर कैंपस गए प्रोफेसर और स्टाफ, अब पढ़ाई यहीं से 


डॉ.वीरेन्द्र बर्त्वाल

देहरादूनः एनआईटी, श्रीनगर गढ़वाल की खोयी रौनक लौट रही है। यहां से जयपुर गई फैकल्टी और स्टाफ लौटने लगा है। सभी लोग 2 नवंबर तक हर हाल में यहां ज्वाइन कर लेंगे। अभी आॅनलाइन क्लाॅसें चल रही हैं, बाद में फिजिकल कक्षाएं यहीं चलने लगेंगी।

सुमाड़ी, श्रीनगर गढ़वाल में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) की स्थापना 

2010 में हुई थी। यह भारत का 31वां संस्थान है। राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में इसका बड़ा महत्त्व है। कुछ समय पूर्व इस संस्थान के परिसर के यहां निर्माण को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई थी। इस कारण यहां से फैकल्टी, स्टाफ और छात्र जयपुर परिसर में चले गए थे।

इस पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल ’निशंक’ ने प्रतिबद्धता के साथ कहा था कि एनआईटी का परिसर हर हाल में सुमाड़ी में ही बनेगा। उन्होंने दिल्ली में अधिकारियों की बैठक में स्पष्ट किया था कि इसके लिए 309 में से 2ं03 एकड़ जमीन उपयुक्त पायी गई है। इसलिए पहले वाले स्थान पर परिसर का निर्माण किया जाएगा। बैठक में सहमति बनी थी कि एनआईटी का आगामी शिक्षा सत्र इसी अस्थायी परिसर में प्रारंभ किया जाएगा। इसके बाद परिसर पर असमंजस और आशंकाओं के बादल छंट गए थे।  

अब जयपुर से फैकल्टी और स्टाफ लौटने लगा है। काफी लोग आ चुके हैं। बाकी 2 नवंबर तक हर हाल में यहां ज्वाइन कर लेंगे। इसके लिए आदेश जारी किए जा चुके हैं। छात्रों की पढ़ाई अभी आॅनलाइन चल रही है। मंत्रालय की गाइडलाइंस के अनुसार संस्थान के खुलने के बाद फिजिकल पढ़ाई सभी बच्चों की यहीं होगी। निर्माण कार्य भी आरंभ हो चुका है।

इस संबंध में एनआईटी के कुलसचिव डाॅ. धमेन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि जयपुर गए स्टाफ और फैकल्टी में से 14 लोग यहां आ चुके हैं। इतने ही लगभग अभी और वापस आने हैं। उन्हें 2 नवंबर तक हर हाल में इस परिसर में ज्वाइन करने को कहा गया है। इसकी सूचना मंत्रालय को दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय से जैसे ही गाइडलांस मिलती हैं, यहां सामान्य पढ़ाई आरंभ कर दी जाएगी, अभी पढ़ाई आॅनलाइन चल रही है।

उधर, डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक का इस संबंध में कहना है कि उत्तराखंड के लिए इस परिसर का विशेष महत्त्व है। इसमें जो कुछ कमियां थीं, वे पूरी कर दी गई हैं। अब इसका मार्ग निर्बाध हो चुका है। इस संस्थान के कारण

यहां के युवाओं को वह शिक्षा घर में ही मिल जाएगी, जिसके लिए उन्हें बहुत धन और समय खर्च करके बाहर जाना पड़ रहा था। साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध हो पाएगा। यह उत्तराखंड के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में एक होगा। डाॅ. निशंक के अनुसार एनआईटी जैसे अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के राष्ट्रीय स्तर के संस्थान का सुमाड़ी, श्रीनगर गढ़वाल में बनना हमारे लिए गौरव की बात है।

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