उत्तराखंड का पनीर विलेज बना टिहरी जिले का रोतू की बेली-जानिए इस गांव की खासियत

 उत्तराखंड का पनीर विलेज बना टिहरी जिले का रोतू की बेली-जानिए इस गांव की खासियत



उत्तराखंड़ के पहाड़ी इलाकों में स्थानीय लोगों के स्वरोजगार के लिए कई साधन मौजूद हैं बस जरूरत है उन मौको को लपकने की.... दरअसल आजकल टिहरी जिले केजौनपुर ब्लॉकका रौंतू की बेली गाँव पनीर विलेज के नाम से खासा मशहूर हो रहा है। पनीर विलेज के नाम से अपनी पहचान बना चुका रौंतू की बेली गांव के पनीर की बाजार में खूब डिमांड़ है आलम ये है कि लोग इस गाँव के बने पनीर की एडवांस बुकिंग करवाते हैं अब गांव के कई परिवार अपने घरों में ही पनीर बना कर अपनी आर्थिकी को मजबूत करने के साथ-साथ गांव का नाम भी रोशन कर रहे



गौरतलब है कि करीब 250 परिवार वालों रौंतू की बेली गांव के 60 से 70 फीसदी परिवार खेती-बाड़ी केसाथ-साथ गाय - भैंस भी पालते हैंऔर इन पशुओं के दूध से रोजाना अपने घरों में ही पनीर बनाने का काम करते हैं...इसकी बजह से अब गाँव के लोगों की अच्छी खासी आमदनी होने लगी है... आपको बता दें किइस गाँव के लोग रोजाना करीब 50 किलो से ज्यादा पनीर बनाते हैं....अपने लाजबाव स्वाद बजहकी से लोगो में  इस पनीर की खासीडिमांड है, इसीलिए ये पनीर दोपहर होने से पहले ही सारा बिक जाता है।और इस गाँव केकई परिवार आज पनीर के जरिए हर महीने करीब 10 से ₹12 हजार रुपए की  कमाई कर रहे हैं इस गाँव के लोगो का बनाया पनीर कीमत की लिहाज से भी काफी किफायती है और 240 रुपए  किलो के हिसाब से बाजार में बेचा जाता है

अक्कसर लोग सुबिधाओं का रोना रोते रहते है... लेकिन कम संसाधनो में भी तरक्की की एक नई इबादत लिखना कोई टिहरी के रौंतू की बेली के ग्रामीणों से सीखे... क्योंकि जिस तरीके से इन ग्रामीणों ने दूरदराज के अपने गाँव में ही पनीर का उत्तपादन करके बाकी लोगो को भी तरक्की के लिए एक नई राह दिखाई है.. वो वाकई ...काबिले तारीफ है...


टिहरी से ओम रमोला की रिर्पोट....


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