21 नवंबर को मिलेगा वातायन लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड

 विशिष्ट रचनाधर्मिता के लिए लंदन में विभूषित होंगे डाॅ. निशंक





21 नवंबर को मिलेगा वातायन लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड


नई दिल्ली। हिन्दी साहित्य लेखन में विशिष्ट योगदान के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल विदेश में सम्मानित होंगे। उन्हें लंदन में 21 नवंबर को आयोजित होेने वाले वातायन-यूके सम्मान समारोह में वातायन अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मान (वातायन लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड) से नवाजा जाएगा। वहां के समय के हिसाब से पूर्वाह्न 3ः00 बजे और भारतीय समय के अनुसार शाम 8ः30 बजे होने वाले इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि मनोरंजन मुंतश्ज्ञिर को वातायान अंतर्राष्ट्रीय कविता सम्मान (इंटरनेशनल वातायन लिटररी अवार्ड) से विभूषित किया जाएगा।

आज से 17 साल पहले 2003 में प्रतिष्ठित लेखक और कैंब्रिज विश्विद्यालय के भाषा विज्ञान के रीडर डाॅ. सत्येंद्र श्रीवास्त ने वातायनः पोएट्री आॅन साउथ बैंक नामक संस्था का शुभारंभ किया था। साहित्यिक क्षेत्र में कार्य करने वाली इस संस्था का उद्देश्य कवियों, लेखकों, कलाकारों के हित के दृष्टिगत सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित करना तथा शांति एवं सद्भाव को बढ़ावा देना है। संस्था साहित्यिक क्षेत्र मंे उत्कृष्ट और विशिष्ट कार्य करने वाले रचनाकारों को अलंकृत करती है। 2004 में संस्था ने वार्षिक वातायन कविता पुरस्कार आरंभ किया था। संस्था अभी तक अनेक हस्तियों को अलंकृत कर चुकी है। इनमें प्रसून जोशी, जावेद अख्तर,, निदा फाजली, कुंवर बेचैन, लक्ष्मीशंकर वाजपेई आदि शामिल हैं।

डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक के रचनाकर्म की व्यापकता और विशिष्टता को देखते हुए संस्था ने उन्हें वातायन अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मान (वातायन लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड) देने का निर्णय लिया है। डाॅ. निशंक पहले भारतीय केंद्रीय मंत्री हैं, जिन्हें हिन्दी साहित्यिक गतिविधियों के लिए विदेश में विभूषित किया जा रहा है। वातायन यूके की संस्थापक दिव्या माथुर ने बताया कि डाॅ. निशंक जैसे प्रख्यात साहित्यकार को हमारी संस्था द्वारा अलंकृत किया जाना हमारे लिए ही गौरव की बात है।

इस संबंध में डाॅ. निशंक का कहना है कि यह सम्मान मेरा व्यक्ति सम्मान नहीं, बल्कि हमारी हिन्दी भाषा का सम्मान, भारत का सम्मान और भारत के के हर नागरिक का सम्मान है। उन्होंने कहा कि साहित्य रचना एक गुण-धर्म है, साहित्य साधक के सामने अनेक बाधाएं गौण हो जाती हैं, चाहे वे धन की बाधाएं हों या समय की। साहित्य साधक समाज का सजग प्रहरी होता है। साहित्य के क्षेत्र में निःस्वार्थ भाव से कार्य करने वाली संस्थाएं बधाई की पात्र हैं।

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