वीर भड माधो सिंह भण्डारी सी जुडी च इगास

 

                       वीर भड माधो सिंह भण्डारी सी जुडी च इगास




   दीपक कैन्तुरा  
  रुद्रप्रयाग जखोली ब्लाक का ललूडी गाँव का वंशज छा माधौ सिंह भण्ड़ारी 
एकादसी यनि इगास का ये त्योहार कू भड़ शिरोमणी से भौत गैरु समबन्ध च कवि भोला दत्त देवरानी जी का यों शब्दों की विवेचना , पटकथा लेखक विशाल नैथाणी जी अपणी भाव नाटिका वीर भड़ माधो सिंह भण्डारी मा करदन 
                   एक सिंघ रेंद बण मा
                  एक सिघं गायका
                 एक सिघं माधो सिंह
                 और सिंह काहेका 

एक सिंघ बल सुच ,जु जंगलू कू राजा च अर एक सिंघ बल गाय कू बछेडा, यानि बैल च जु धरती पर हल चलैक इन्शान का भरण पोषण का वास्ता अन्न पैदा कन्नू च अर मनख्यों म एक सिंघ यानि तीसरा सिंघ माधो सिघं भण्डारी ह्वैन , जौन धरती की तीस मिटौंण की खातिर अपणा ये कुल पुत्र गजे सिंह कू बलिदान दी- दिनी याँका अलावा दुनियाँ मा और क्वी सिंघ पैदा नि ह्वै।
वीर भड़ माधोसिंह भण्डारी जी का पिता सौण बाण काला भण्ड़ारी पीलीभीत लखनापुर का आंया बताये जांदन जु महाराजा मानशहा का कार्य काल मा गढवाल का सुप्रसिद्धसेना पति रैन , तौंकी वीरता अर प्राक्रम का ही फल स्वरुप ऊंका पुत्र माधोसिंह भण्डारी जी भी अपणा पिता जी प्रेरणा लेंदन, अर वीर – भड़ का रुप म ख्याति विख्यात होंदन . कुछ समय पश्चयात , ततकालीन गढनरेश महाराजा माहिपति शहा वौं  तैं श्रीनग्र बुलैक तौं तैं गढवाल का सेनापति को पद देंदन , तै दरमियांन एक बार वीर माधोसिंघ भण्डारी ,उछन्द गढ कुमांऊ की वीर बाला राजकुमारी उदीना तैं सुपिना मा देखदन जू अगने चलिक माधोसिंघ भण्डारी जी की अर्धागिनी का रुप मा वौंकी जीवन संगिनि बणदिन 
                           ( सुपीना का दंद- देखी ऊदीना बौराण)
कांठा मां की यें जोन देखिक , वीर बाला उदिना का प्रति माधो सिंघ भण्डारी जी कू आकर्षण ह्वै जांदू अर तब एक दिन प्रकृति की सुरम्य घाटियों म भड़ शिरोमणी वीर माधो सिंह भण्डारी अर सगै यें अप्सरा कु मिलन होंदू जु मिलन धीरे –धीरे द्वियूं का प्रेम प्रसंग मा बदलि जांद,
तब तक गढवाल की उत्तरी सीमा पर पैन खण्डा अर दशोली का सीमांत परगनौ मा तिब्बती सेना घुसपैठ करिक चौरी – छिपि आक्रमण करदी , महाराजा माहिपतिशाह माधो सिंह भण्डारी तैं  सीमा की रक्षा कू दायित्व सौंपी देदन , कि तुम उत्तरी सीमा पर जावा अर पैनखण्डा – दशोली का परगनौं तैं लूट- मार सी बचावा । यख माधौ सिंह भण्डारी अर उदीना बौराण कू प्रेम प्रसंग थौ अर वख सीमा की रक्षा कू सवाल 
जब माधौ सिंह भण्डारी सीमा रक्षा की खातिर चलदन त वीर –बाला ऊदीना माधौ कू तिलक करैक तें ऊंते रण जाणा का खातिर विदा करदिन ।
माधो । सीमा रक्षा म अपणी सेना सहित डटयां  रंदन यख बग्वालीयूं कू त्योहार ऐजांदन ,पर पहाड़ मा बै बक्त बग्वाली यानि दीपावली नी मनाये जांदी  किलै कि माधो की सेना मा गढवाली हजारों वीर सपूत सीमा पर दुशमन कू मुकाबला कन्ना रैंदन , वै ही बगत कू गीत च 
                  दाळ – दळयीं रैगी , माधो सिंघ,
                चौंल छडिडयां रैग्या माधो सिंह 
             सभी घर ऐन माधो सिंह मेरु माधो नी आई माधो सिंघ
             तेरी जिया बोई माधो सिंघ
             रोंदी – दण मण , माधो सिंह 
हिमालय का जौं दरों ह्वै माधो सिंह भण्डारी जी की फोज लाँम लड़न गै थै , तौं दरों मा भारी बर्फ – बारी होण का कारण तौंकू रस्ता सु मार्ग अवसघ हवै जांद अर सेना वापस कू मार्ग खुजौंणी रंदी, 
ठीक मंगसीर का मैना उच्छंद गढ मा उदीना तैं विवैक ल्हीजाण की खातिर द्वी भड़ अपणी सेना लीक , अपणी बरात सजैक गढ पर आक्रमण करदन वीं बरात की  सिणैं यानि मशक बाज की धुन सुणिक उदीना अपणा माधो सिंह का विरह मा ब्याकुल हवैक रोंण ल्है जांदी अर मन ही मन गांदी – ब्योमा सिणै ना बजो  मन खूदेणु च मेरु । उंदीना का दरवार मा माधो सिंह भण्डारी कू सेवक चम्पा हुडकिया थो , जु उदीना की ब्यथा अर दसा देखिक माँ भगवती राजेश्वरी तें अपणी जागरी विधया से जागृत करदू भगवती माधोसिंह भण्डारी  का सुपिना मा जैक सारु वृतांत सुणोंदी , तब माधोसिंह भण्डारी रण- जीतिक बोडी औंदन अर उदिना तें विवैक ल्हीजाणी बरात का दगडी युद्ध लडिक उदीना की डोली लूटिक श्रीनगर मलेथा ल्ही औंदन अर  विधिवत विवाह संस्कार करिक महाराजा द्वारा दिनी जागीर तैं दिखौंण उदीना तैं ल्ही जान्दन मलेथाकी बिनपाणी धरती देखिक उदीना माधो सिंह भण्डारी का सामणी  मलेथा पाणी ल्योणकू प्रस्ताव रखदन  अर माधो सिंह भण्डारी दुगडा- डांग चौरा बटि मलेथा की पाणी ल्योण कु स्वीणा साकार होंदू ।

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