निशंक की एक और उपलब्धि, ’वातायन’ अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मान

 केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ.निशंक की एक और उपलब्धि




उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ.रमेश पोखरियाल निशंक को हिन्दी साहित्य लेखन में विशिष्ट योगदान के लिए ’वातायन’ अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मान (वातायन लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड) से अलंकृत किया गया। साथ ही प्रसिद्ध कवि मनोज मुंतशिर को ’वातायन’ अंतर्राष्ट्रीय कविता सम्मान (इंटरनेशनल वातायन लिटररी अवार्ड) से विभूषित किया गया। डाॅ. निशंक ने इस सम्मान को पूरे हिंदुस्तान का सम्मान बताते हुए कहा कि यह सम्मान मेरे देश के उन करोड़ों युवाओं को समर्पित है, जो मेरे देश को पुनः विश्वगुरु बनाने की ओर अग्रसर हैं। डाॅ. निशंक की इस बड़ी उपलब्धि पर देश-दुनिया के अनेक साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने प्रसन्नता व्यक्त कर उन्हें शुभकामनाएं प्रदान की हैं। भारतीय समय के अनुसार शाम 8.30 बजे आरंभ हुए इस वर्जुअल कार्यक्रम में अनेक देशों के विद्वानों, लेखकों, कवियों और शिक्षाविदों ने सहभागिता की। 

डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक ने इस पुरस्कार को हिंदुस्तान का सम्मान करार देते हुए कहा कि यह पुरस्कार मेरे देश के उन युवाओं को समर्पित है, जो मेरे भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने की ओर अग्रसर हैं। 

अपनी साहित्यिक यात्रा पर डाॅ. निशंक ने कहा कि मेरी रचनाओं में उस पहाड़ी गरीब बालक का दर्द है, जो एक गरीब परिवार में पैदा हुआ, रोजाना पहाड़ी पगडंडियों पर आठ-नौ किलोमीटर पैदल चलते हुए जिसने शिक्षा हासिल की, अध्यापक बना और इसके बाद उत्तर प्रदेश में कैबिनेट मंत्री उत्तराखंड में मुख्यमंत्री बनने के बाद भारत के शिक्षा मंत्री की कुर्सी तक पहुंचा। मेरी जीवन की कठोर और संघर्षमयी यात्रा ही मेरे साहित्य में बसती है, जिसमें तनाव-अभाव से ग्रस्त न जाने कितने पहाड़ी मजबूर युवाओं का दर्द उकेरा गया है।

उन्होंने कहा कि मैं अचानक राजनीति में आ गया, यह एक संयोग था, जिसके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था। अब इस क्षेत्र में आ ही गया हूं तो अपने देश के लिए वह करने का पूरा प्रयास करूंगा, जो मेरा बचपन से ही सपना था। मैं हर युवा के हाथ में काम देखना चाहता हूं, वह युवा शिक्षित और संस्कारयुक्त हो, उसकी आत्मा में भारत बसता हो। डाॅ. निशंक ने इस मौके पर अपनी दो कविताएं-’मैं पहाड़ हूं’ और ’अभी भी है जंग जारी’ सुनायीं। मनोज मुंतशिर ने ’तुमसे यह नहीं हो पाएगा’ कविता सुनायी। अनिल शर्मा जोशी ने डाॅ. निशंक को ’वातायन’ अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मान से अलंकृत किया। 

बहुत-बहुत शुभकामनाएं एवं बधाई।

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