अपनी माटी के मोह में छोड़ा सात समुंदर पार-शूरवीर सिंह गुसाईं की अनूठी पहल

 अपनी माटी के मोह में छोड़ा सात समुंदर पार-शूरवीर सिंह गुसाईं की अनूठी पहल

(डॉ.वीरेन्द्र बर्त्वाल, देहरादून)



शूरवीर सिंह गुसाईं नैलचामी पट्टी के युवाओं के प्रेरणास्रोत बन गए हैं। विदेश में बेहतरीन नौकरी कर रहे शूरवीर सिंह चाहते तो वहीं रहकर अच्छे पैसे कमा सकते थे, लेकिन उनके मन में अपनी माटी के प्रति प्रेम और यहां के बेरोजगार युवाओं के प्रति पीडा़ थी, इसलिए वे नौकरी छोड़ अपने गांव आए और यहां होम स्टे खोल स्वरोजगार के क्षेत्र में कदम रख दिया।



यदि आपके मन में अपनी जन्मभूमि के प्रति प्रेम और माटी की पीड़ा है तो सात समंदर पार की चमक-दमक भी आपको फीकी लगने लगे GCगी और आप एक दिन लौटकर अपने यहां आ जा जाओगे। टिहरी गढ़वाल के शूरवीर सिंह गुसाईं इन्हीं लोगों में एक कहे जा सकते हैं। उन्होंने विदेश से लौटकर अपने गांव में एक होम स्टे खोल दिया। 



   नैलचामी पट्टी के ओडाधार में उन्होने सात-आठ कमरों का एक भवन बना दिया और उसमें रहने-खाने की व्यवस्था कर दी। जनवरी, 2020 में इसकी औपचारिक शुरुआत हो गयी थी, लेकिन कोरोना के कारण व्यवधान उत्पन्न हो गया। अब व्यवस्था पटरी पर आने लगी है। वे इसमें न केवल अपने क्षेत्र के युवकों को रोजगार दे रहे हैं, बल्कि इसे योग और संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित कर रहे हैं।

    ओडाधार चिरबटिया नामक रमणीक स्थल से लगभग पांच किलोमीटर दूर ऋषिकेश-घनसाली-केदानाथ मार्ग पर है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह क्षेत्र वर्षों पहले से ही एक छोटे कस्बे के रूप में विकसित है। ओपोलो अस्पताल दिल्ली के साथ ही अमेरिका की एक कंपनी में टेक्नीशियन रह चुके शूरवीर सिंह पर्यावरण और शिक्षा के क्षेत्र में भी कार्य कर रहे हैं। अब अपने ही गांव में रहकर व्यवसाय करने और गांव के युवकों को रोजगार देने की उनकी इस पहल की क्षेत्र में सराहना हो रही है। 

   शूरवीर सिंह गुसाईं के अनुसार पहाड़ के अनेक युवा होटल लाइन में विदेश में कार्यरत हैं। उन्हें ऐसी ही पहल करनी चाहिए। शूरवीर सिंह पूरी नैलचामी बेल्ट को एक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने का सपना देख रहे हैं। उनके होम स्टे की सबसे बड़ी विशेषता आरोग्य थाली है, जिसमें पूरा भोजन पहाड़ी और जैविक होता है। यह स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतरीन कहा जा सकता है।

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