समाज सेवा को समर्पित बुजुर्ग सुंदर सिंह चौहान

 समाज सेवा को समर्पित बुजुर्ग सुंदर सिंह चौहान

(मनोज नोडियाल)




कोटद्वार।वास्तविक समाज सेवा वर्तमान में एक दुष्कर कार्य है । वैसे तो समाज सेवा से भावुक हृदय, कोमल मनोभाव और दूसरों की पीड़ा समझने वाले लोग अपनी अपनी क्षमता अनुसार समाज हित में लगे रहते हैं । कई समाजसेवी संस्थाओं के माध्यम से जनसेवा का बीड़ा उठाए हुए हैं तो कुछ ऐसे विरले भी हैं जो एकला चलो की राह पर चलकर समाज की पीड़ा दूर करने का प्रयास कर रहे हैं ।

ठा० सुंदर सिंह चौहान  उत्तराखंड के पौड़ी जिले में कई लोग निस्वार्थ समाज सेवा के कार्य से जुड़े हुए हैं जिन्हें में ना तो अखबार बाजी पसन्द है और न चैनलों का हिस्सा बनना । परंतु उसके बावजूद भी स्थानीय स्तर पर लोगों ने उनके कार्यों को खूब सराहा और सम्मान भी दिया । सतपुली स्थित वृद्ध आश्रम गुमनाम समाज सेवक के रूप में अपने क्षेत्र में सीमित रह कर पूरे देश की सेवा का व्रत लिए एक ऐसे ही समाजसेवी से जो रूबरू कराने  जा रहा है जो जमीन से जुड़ा होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर स्थानीय लोगों को रोजगार देकर उनके परिवार का भरण पोषण में सहायक बन रहा है । जरूरतमंदों के लिए हर समय मौजूद है और अब उन्होंने अपने वानप्रस्थ जीवन में एक और बीड़ा उठाया है कि उत्तराखंड सहित पूरे देश के तिरस्कृत उपेक्षित और असहाय बुजुर्गों को उनके जीवन के अंतिम पड़ाव में सेवा कर पुण्य लाभ कमाया जाए ।

पौड़ी जिले सतपुली कस्वे के उद्योगपति और निस्वार्थ समाजसेवी ठाकुर सुन्दर सिंह चौहान । जी हां सतपुली के इस उद्योगपति ने साबित कर दिखाया है कि मनुष्य का जीवन केवल धन अर्जित करना ही नहीं समाज सेवा करना भी है वह भी निस्वार्थ बिना सरकारी सहायता के बिना । ठाकुर सुंदर सिंह चौहान ने अपने कार्यक्षेत्र सतपुली को ही अपनी समाज सेवा के केंद्र के रूप में चुना है । मजदूरी करने से लेकर आज पौड़ी जिले के श्रेष्ठ उद्योगपतियों में स्थान बनाने वाले चौहान जी पौड़ी जिले के एक सफल उद्योगपति तो है ही साथ ही निस्वार्थ भाव से समाज सेवा करने वाले समाज सेवक भी हैं । वर्तमान में पहाड़ के छोटे से क्षेत्र सतपुली में 100 से ज्यादा लोगों को रोजगार देकर उनके परिवार अन्नदाता बने चौहान जी सतपुली में होटल व्यवसाय करते हैं तो सतपुली से आगे 6 किलोमीटर दूरी पर उनके द्वारा स्टोन क्रेशर, बॉटलिंग प्लांट भी लगाया है । जहां स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिला है । सतपुली के नयार नदी के तट पर ऊंची नीची पहाड़ियों और चीड  बुरास के जंगलों से सटे प्राकृतिक प्रकृति से भरपूर मलेथा गांव की गोद में एक आधुनिक सुविधाओं से युक्त व 50 और उससे अधिक  बुजुर्गों विशेषकर निराश्रित लोगों के लिए आश्रम की स्थापना कर पुनीत कार्य किया है । वृद्धाश्रम जनवरी 2021 तक प्रारंभ होने की संभावना है । वर्तमान में उसमें रात दिन जोर शोर से कार्य चल रहा है । सुंदर सिंह चौहान जी ने बताया कि उनका एक सपना था कि जब आर्थिक रूप से सक्षम होंगे तो पहाड़ में कुछ ऐसी जन सेवा करेंगे जिससे उनका जीवन तो सार्थक होगा ही साथ ही समाज के लिए सार्थक बन सके । समाज के तिरस्कृत, उपेक्षित और असहाय बुजुर्गों को सम्मान से जीने का सुख मिल सके, उनके लिए एक ऐसे आश्रम स्थापना कर जिसमें उन्हें अपने मनुष्य जीवन में आने पर दुख नहीं होगा वरन खुशी होगी, ऐसा माहौल वाला वृद्धाश्रम तैयार करना उनके जीवन का उद्देश्य है । 70 वर्ष से अधिक की आयु के चौहान जी अपने वृद्ध आश्रम में बुजुर्गों को सब सेवाएं देने का प्रण लिए हैं जो तिरस्कार का एहसास ना होने दें । वृद्धाआश्रम मे अभी 50 से 60 लोगों की व्यवस्था है लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे और अधिक संख्या वाला बनाया जाएगा । चौहान जी समाज सेवा पर नही रुकते हैं चौहान जी द्वारा अपने क्षेत्र और पौड़ी जिले के कई गरीब निराश्रित बच्चों को शिक्षा दीक्षा, गरीब निर्धन कन्याओं पर विवाह का पूरा खर्च उठाना और निराश्रित विधवा महिलाओं को सम्मान से जीने के लिए उन्हें स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के लिए भी प्रेरित करने जैसे कार्य प्रेरणा दी जा रही है । एक और पुनीत कार्य ठाकुर चौहान जी के द्वारा अपने क्षेत्र में किया जाता है जब आसपास के गाँवो से किसी व्यक्ति शव  नयार .नदी के तट पर लाया जाता है तो शव दाह के पश्चात दूर से आए लोगों को निशुल्क भोजन की सुविधा दिलाने जैसा पुनीत कार्य भी किया जाता है । ठाकुर सुंदर सिंह चौहान समाज सेवा के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं जो निस्वार्थ सेवा करना चाहते हैं । बिना सरकारी मदद के वृद्ध आश्रम की स्थापना करना जरूरतमंदों को मदद पहुंचाना ठा . सुंदर सिंह चौहान का जुनून बन चुका है । निरंतर जरूरतमंदों के लिए आज अपनी वानप्रस्थ जीवन में भी जी जान से तन मन धन से समाज के लिए निस्वार्थ रूप से जुड़े सुंदर सिंह चौहान को उनके जीवन के अंतिम पड़ाव में ईश्वर चिरायु बनाए, उनके कार्यों के लिए शक्ति दे ।

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