नै साल पर मातृभाषा की अलख--अर--'कलश

 नै साल पर मातृभाषा की अलख--अर--'कलश'


मातृभाषा आंदोलन की अलख जगौंदु 'कलश' आज केदारघाटी रुद्रप्रयाग मा ही ना बलकन उत्तराखंड का गौं-गौं, कोणा-कुमच्यरों तलक गढ़भाषा की तागत पौंछौंणू च।




   सोलह साल की भाषा साहित्य की जातरा मा एक से बढ़ी एक, लिख्वारों की बिज्वाड़ जमीं भी च अर खूब रौज्यां-पौज्यां भी छिन।

    निरंतर भाषा साहित्य दगड़ि संस्कृति की धै जगौंदि कलश की मशाल कु ही परिणाम च कि श्रद्धेय नरेन्द्र सिंह नेगी जी समेत चिर-प्रतिष्ठित लिख्वार रूद्रप्रयाग की  ईं धर्ती पर साहित्य की नजिली थाति की मोहर लांदन।

   कोरोना काल का लंबा नीरस टैम मा भी कलशन औनलैन कार्यक्रम चलैन, अर दिखदरौं खूब छत्रछैल भी बरखुदू रै तबैत  'वी गढ़वाली', 'उत्तराखंड देवभूमी', 'उत्तराखंड अर्थपैराडाइस'  बटि 'आश' 'माथम' जन श्रृंखला खूब चलिन अर खूब पसंद करिन सबुन।

    कोरोना मामारी दौर बटि लगभग दस मैंना बाद नया साल पर तीन जनवरी तैं कलशन आठवूं स्थापना दिवस- समौंण होटल, सिल्ली- अगस्त्यमुनि मा मनै।

कार्यक्रम शुर्वात मा कार्यक्रम अध्यक्ष श्री चन्द्रशेखर बेंजवाल (पूर्व प्रधानाचार्य) 

 मुख्य मैमान श्रीमती अरुणा बेंजवाल (अध्यक्ष) नगर पंचायत अगस्त्यमुनि, डाॅ निधि छावड़ा (विभागाध्यक्ष हिन्दी) रा०स्ना०महाविद्यालय अगस्त्यमुनि,

विशिष्ट मैमान-श्रीमती गीता रौथाण( अध्यक्ष नगर पालिका रुद्रप्रयाग) व श्री मोहन रावत जिला महामंत्री (व्यापार संघ रुद्रप्रयाग) न माँ सरसुती दिवा बाळी कार्यक्रम शुरु करी।

  कार्यक्रम द्वी किस्तों मा चली, पैलि कलशन विशेष कार्य का वास्ता कुछ साहित्यकारों तैं कलश सम्मान  दीतै सम्मानित करिन।

स्व० श्रीधर चमोला जी  जौंकु सम्मान तौंका छोटा सुपुत्र आदरणीय श्री अखिलेश चमोला जीन प्राप्त करी।

 श्री बृज मोहन भट्ट जी, श्री गिरीश चन्द्र बेंजवाल जी, श्री राजेन्द्र प्रसाद गोस्वामी जी, श्री चन्द्र सिंह नेगी जी, श्री उम्मेद सिंह रौथाण जी, कु० सिमरन रावत जी व विनोद सिंह नेगी(दिव्यांग, जो कि दिव्यांगों तै मुफ्त मा कंप्यूटर सिखौणा) सम्मानित कर्ये गै।

दूसरी किस्त मा नै छवाळि का तौं लिख्वारोंन कविता पाठ करि जौंन अबि तलक कै भी मंच पर कविता नि बांची छै।

जौंमा कक्षा 10 कु छात्र सूरज पंवारन पलायन अर लौकडौन पर अपणि कविता-

'हे मां तु किलै लगी धाणी पर, ऐस कर दू,

हम ऊन्द छन जांणा तु दादा दादी दगड़ बैस कर दू'..

 रा०इ०का० कण्डारा का कक्षा 10 का ही छात्र प्रियंक रावतन मातृभाषा पर अपणि कविता - 'मातृ भाषा तैं ना भूलि'

पाला कुराली चिरबटिया बटि छात्रा कु०कविता कैंतुरा न अपणि कविता  "नयु साल फिर बौड़ी ऐगे.''

 बैनोली बटि डॉ० सुशील सेमवाल न "कलसस्य मुखे विष्णु"

लोक सृजन काव्य प्रतियोगिता की विजेता मयाली की छात्रा कु०रिंकी काला न अपणी कविता 'बेटी का सवाल' प्रस्तुत करी।

कलश की जखोली संयोजिका श्रीमती विमला राणा जीन - 'अब त गौं  का गौं खाली ह्वैगिन-

गौं मा खाली बूड बुड्या रेगिन'

श्री माधव सिंह नेगी जीकि कविता 'पैंसा भगवान ह्वैगि' प्रस्तुत करी।

ये मौका पर सुधीर बर्त्वाल, उपासना सेमवाल, बेदिका सेमवाल, ऊखीमठ बटि भूपेन्द्र राणा, बीर सिंह रावत (कु० सिमरन रावत के पिता) रिंगेड़(बैनोली), अश्वनी गौड़, कु० शिवानी, डॉ० राकेश भट्ट,विपिन सेमवाल, गढ़ कवि जगदंबा चमोला, डॉ0 गीता नौटियाल, श्रीमती उर्मिला सेमवाल, हेमंत चौकियाल अर भौत सारा गढभाषा पिरेमी उपस्थित छा। कार्यक्रम कु संचालन कलश की केदारघाटी की संयोजिका श्रीमती कुसुम भट्ट दीदी जी अर कलश का सैरा कार्यक्रम तै संतर्यौंदा अर सजौंदा गढभाषा ध्वजवाहक भैजी ओमप्रकाश सेमवाल जी न करी।

   -------@अश्विनी गौड़

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