संडे पिकनिक की महफिल तो लूट ले गये सीएम त्रिवेंद्र-काम बोलता है

 संडे पिकनिक की महफिल तो लूट ले गये सीएम त्रिवेंद्र

( साभार-वरिष्ठ पत्रकार अर्जून बिष्ट की वॉल से)

लंबे समय बाद पिछले संडे को कुछ मित्रों ने पिकनिक का प्रोग्राम बनाया। कुल बारह—तेरह लोग थे। आधे से अधिक मेरे परिचित थे तो कुछ नये चेहरे भी थे। वकील, बैंक इम्पलाय, रिटायर्ड आर्मी पर्सन, शिक्षक मित्र सहित दो—दीन सरकारी मुलाजिम भी थे, तो भाजपा और कांग्रेस में जिलास्तरीय जिम्मेदारियां निभा रहे दो साथियों के साथ ही हम दो पत्रकार भी इस जंगल पिकनिक का हिस्सा बने। करीब पांच छह घंटे की इस  महफिल में बस एक ही चर्चा रही। 

महफिल संडे की हो और हर तरह के लोग उसमें हों तो स्वाभाविक है चर्चाएं भी होनी ही थी। मालदेवता से करीब सात—आठ किलोमीटर आगे सजी महफिल में इस बार का विषय ढूंढने की जरूरत ही नहीं पड़ी।  

कांग्रेस के रामेश्वर प्रसाद ने (सभी नाम बदले हुए) भाजपा के कृष्णा सिंह को कुछ यूं छेड़ा, कैसी चल रही है भाई कृषणा जी आपकी पार्टी की सरकार। वो मुख्यमंत्री जी पर आयी सर्वे रिपोर्ट तो ठीक है, न। रामेश्वर प्रसाद के ऐसा कहते ही सबका ध्यान उधर ही चला गया।

पतीले में करछी घुमा रहा रमेश भाई बोला, अरे यार तुम लोग यहां राजनीतिक चर्चा मत करो। पिकनिक मनाने आये हो, मजे करो यार, कोई बहस नहीं होनी चाहिए। इस पर सबने कहा यार चर्चा करो, लेकिन बहस मत करना, पार्टी का मजा किरकिरा नहीं होना चाहिए। बस सब इस बात का ध्यान रखना। बैंक वाले भाई पुंडीर जी और मैने भी बोला बिलकुल ठीक, भाई चर्चा चर्चा की तरह हो।  

इसके बाद कांग्रेस के रामेश्वर प्रसाद के सवाल का जवाब देने भाजपा के कृष्णा सिंह आगे आये। बोले, भाई क्या चाहते हो, सीएम बदलना चाहिए क्या, तो रामेश्वर प्रसाद छूटते ही बोले बिलकुल पहले ही बदल देना चाहिए था। भाजपा के कृष्णा सिंह बोले, यार अगर सीएम काम नहीं कर रहे हैं तो तुम विपक्ष के लोगों को तो चाहिए ऐसा ही सीएम बना रहे और चुनाव बाद तुम सरकार बना लो, लेकिन तुम्हारी बातों से लगता है कि जैसे विपक्ष के लोग इन सीएम से घबराये हुए हैं। तुम लोगों को लगता है कि ये टिके रहे तो तुम्हारे अगले पांच साल भी गये। इसलिए तुम लोग चाहते हो कि ये जितनी जल्दी हट जाएं, अच्छा है।

इस पर कांग्रेसी रामेश्वर प्रसाद ने अगला सवाल दागा, क्या किया यार तुम्हारे सीएम ने चार साल हो गये। भाजपा के कृष्णा सिंह भी कम न थे, हंसते हुए बोले बड़े काम गिनाऊं कि छोटे-छोटे।

फिर कृष्णा सिंह हो गये शुरू, बोलेे देखो भाई गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का दम किसी में नहीं था, हमारे सीएम ने ही किया। ये तो तुमको मानना पड़ेगा। राजधानी के विकास के लिए दस साल में पच्चीस हजार करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा भी मुख्यमंत्री जी कर चुके हैं।

अब ये चारधाम देवस्थानम बोर्ड को ही देख लो। राज्य बनने के बाद हर सरकार में वैष्णों देवी की तरह श्राइन बोर्ड बनाने व शीतकालीन यात्रा जारी रखने की बात होती रही, किया किसी ने। इन्होंने कर दिया न। देखना अगले कुछ सालों में धामों में कितनी सुविधाएं बढ़ती हैं। तब जो लोग आज विरोध कर रहे हैं, वो भी तारीफ करेंगे। हमारे धामों में विश्वस्तरीय सुविधाएं होंगी। तब वकील साहब राकेश जी बोले, हां बात तो ठीक है। सीएम ने इन कामों के लिए हिम्मत तो जुटायी यार, देखा न कितना विरोध हो रहा था। देवस्थानम बोर्ड का बहुत विरोध हुआ। भाई लोग कोर्ट तक चले गये यार। उन्होंने यार ट्रांसफर एक्ट ला करके बड़ा काम किया। शिक्षक मित्र प्रदीप जी ने भी वकील साहब का समर्थन किया। 

कृष्णा सिंह बोले और बताऊं भुला रामेश्वर! एक बात बता, तूने वो आयुष्मान कार्ड तो बनवा लिया है न। नहीं बनवाया है तो बना ले, बड़े काम का है। रामेश्वर ने बताया हां बनवा लिया है। कृष्णा बोला, पता है न उत्तराखंड अकेला ऐसा राज्य है, जिससे सभी तेईस लाख परिवारों को पांच—पांच लाख तक की मेडिकल सुविधा फ्री दी जा रही है। ये काम हमारे सीएम साहब का ही है। देश के बाइस हजार अस्पतालों में कहीं भी इलाज करा सकते हैं। कृष्णा सिंह बोला, मेरे मोहल्ले में एक बंदा है प्रवीन कुमार। वो बीमार पड़ गया था, पिछले साल, अस्पताल में भर्ती हुआ तो तीन लाख का खर्चा बता दिया। उसके तो परिवार वालों का बहुत बुरा हाल था, कि कैसे करेंगे। किसी ने उनका आयुष्मान कार्ड बनवा दिया और प्रवीन कुमार का सारा इलाज फ्री में हो गया। तुम कांग्रेस वाले भी न, गजब हो,  इसको तो काम मानो यार।

अच्छा रामेश्वर भाई एक बात बताओ, सबको फ्री इलाज वाली इस योजना को भी अपनी सरकार आने के बाद बंद कर दोगे क्या। 

 हा हा हा हा हा, जैसा कि तुम्हारे नेता बोल रहे हैं कि हमारी सरकार आयी तो देवस्थानम बोर्ड भंग कर देंगे, ये कर देंगें, वो कर देंगे।

इस बीच मेरे साथ ही बैठे पत्रकार साथी आमोद कुमार बोलने लगे, भाई ये काम करना सरकार का काम है और विपक्ष का काम है सरकार के किये धरे पर पानी फेरना, अगर विपक्ष ऐसा नहीं कर पाया तो फिर वह काहे का विपक्ष। महफिल ठहाकों से गूंज उठती है। भाजपाई कृष्णा सिंह व कांग्रेसी रामेश्वर प्रसाद की बहस फिर भी जारी रहती है। हंसते हुए बोलते हैं भाई कुछ हौर भी बताना है या इतना काफी है। कृष्णा बोले, चलो पार्टी खत्म होने के बाद जब वापस जाएंगे तो अपने घर से दो किलोमीटर दूर मोहकमपुर चले जाना, फ्लाई ओवर देखकर तुमको लग जाएगा कि इसी सरकार का काम है। पता है न मुख्यमंत्री ने इस फ्लाई ओवर व अजबपुरकलां का फ्लाई ओवर समय से इतना पहले बनवा दिया कि दोनों पर सरकार ने करोड़ों रुपये भी बचाये। वही आगे देखो, डाट काली मंदिर के पास नया टनल। कभी जाना हुआ कि नहीं वहां, जाकर देखो उसे भी तय समय से पहले बनवाकर सरकार का पैसा बचवा लिया। अरे हरिद्वार रोड पर चले जाओ, फोरलेन का काम कितने साल से रुका हुआ था कि नहीं। अब देखो, धड़ाधड़ कैसे पुल भी बन गये हैं और काम भी हो रहा है। रामेश्वर भाई थोड़ा और आगे चलते हैं, वो देखों, सूर्यधार झील बन गयी है। कभी सुना कि इतने कम समय में कोई झील या बांध बना हो। भाई एक बात बताऊं, जिस जगह पर अभी हमारी पार्टी चल रही है न, यहीं दूसरी तरफ सौंग बांध भी बनने जा रहा है। पता है, इससे क्या होगा, देहरादून को अगले 100 साल तक पानी की कमी नहीं होगी और बिजली भी बनेगी। यहीं हर्रावाला में 300 बेड का अस्पताल, कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर पता नहीं और क्या—क्या बन रहा है।

मगर कांग्रेस के रामेश्वर प्रसाद कहां मानने वाले थे, पूरी तरह विपक्ष की भूमिका में थे।  फिर कृष्णा सिंह पर दागे सवाल, बोले, यार तुम्हारी सरकार चाहे जो भी हो, महंगाई और नौकरी के मामले में तो फ्लाप ही हुई है। इस पर कृष्णा बोले, भाई एक बात तो सबको समझनी होगी, सरकारी नौकरियों की संख्या तो सीमित है, इसके बाद भी हमारी सरकार ने सभी विभागों के खाली पदों को भरने की कोशिश की है, देखो न कितने मास्टरों की नियुक्ति हो गयी, आयोग लगातार खाली पदों की परीक्षाएं कर रहे हैं। कृष्णा बोलते हैं कि एक बात गौर करनी होगी, सरकारी नौकरियां कम होने केे कारण खुद सीएम साहब ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू की है। देखना तुम आने वाले समय में इस योजना का लाभ लेने वाले यहां के उद्यमी होंगे, प्रत्येक न्याय पंचायत पर ग्रोथ सेंटर, पर्यटन के होमस्टे, सोलर फार्मिंग, पिरूल संग्रहण, उद्यान में विस्तारीकरण, सहकारिता को कृषि से जोडऩा, हायर एजुकेशन में हजारों नियुक्तियां हुई और योजनाएं बनी हैं, बहुत काम हैं यार गिनाने को। कृष्णा सिंह बोले, मैं कहीं पढ़ रहा था कि चार साल में सरकार ने तीन—चार सौ से अधिक पुल बना दिये और दो हजार से अधिक किलोमीटर सडक़ें बना ली।

इसके बाद बहस को मोडऩे के मूड में कृष्णा बोले चलो छोड़ो यार, और बताओ, भ्रष्टाचार तो खत्म हुआ है न।  रामेश्वर प्रसाद सोच में पड़ गया। बोला, हां भाई चार साल में सीएम पर कोई दाग तो नहीं लगा। लोगों ने फंसाने की कोशिश तो बहुत की, लेकिन सीएम इनके पंजे में तो नहीं आया। 

इस पर पूर्व फौजी भाई हरेन्द्र सिंह बोले, भाई एक बात मैं भी बोलूं, मेरे पड़ोसी हैं, डाक्टर साहब। दो साल पहले वो सीएमओ बने, गहरे दोस्त हैं तो मैंने मजाक में पूछ लिया डाक्टर साहब कितना माल दिया। डाक्टर साहब ने कसम खाकर बताया कि भाई, पहली बार ऐसा हुआ कि सीएमओ बिना पैसा दिये बन गये, वर्ना यहां तो जो लूट मची थी क्या कहना। अरे यही नहीं, किसी का लोक सेवा आयोग से नौकरी में चयन हुआ था, साक्षात्कार होना था, उसको कोई ऐसा नहीं मिला जो उसकी नौकरी दिलाने का ठेका ले ले और पैसा ले ले।

रामेश्वर प्रसाद इस पर भी नहीं माने, फिर एक बार बहस को मोडऩे की कोशिश की। भाई जब ये सब है और अच्छा ही अच्छा हो  रहा है तो फिर ये जो सर्वे रिपोर्ट सीएम के खिलाफ आयी है, ये क्या है।

मेरे साथ ही एक पत्थर पर बैठे, साथी पत्रकार आमोद कुमार तो मानो जैसे इसी विषय पर बोलने को तैयार बैठे थे। वो बोले, किसी भी सरकार का कामकाज जनता के सामने ले जाने के लिए मीडिया मैनेजमेंट होता है। इसके लिए बहुत मोटी तनख्वाह, गाड़ी, घोड़ा और तमाम दूसरी सुविधाएं देकर सलाहकार व समन्वयक नियुक्त होते हैं। उन लोगों का काम होता है कि सरकार के अच्छे फैसलों को जनता के बीच ले जाना और सरकार के स्तर पर होने वाली कमियों को मीडिया में आने से रोकना या उसमें सुधार करवाना।  इसके लिए उन्हें मीडिया के लोगों के साथ समन्यव यानि अच्छे रिश्ते बनाकर रखने होते हैं। पत्रकार आमोद कुमार ने कृष्णा सिंह को कहा कि भाई इन दोनों ही मामलों में आपकी सरकार का मीडिया मैनेजमेंट बुरी तरह फेल हुआ है। सरकारी खजाने से हर महीने लाखों रुपये डकार रहे ये सलाहकार और समन्वयक टाइप के लोग आखिर सरकार के लिए क्या काम कर रहे हैं, ये बाहर तो नहीं दिख रहा है। आमोद कुमार बोलते हैं कि ये जिस सर्वे की बात हो रही है, यह राजनीतिक विरोधियों के द्वारा प्लांटेड लगता है। वो कहते हैं कि राजनीति में ऐसा होता रहता है, यह स्वाभाविक भी है, कोई भी राजनीतिज्ञ व्यक्ति क्यों चाहेगा कि उनका कोई प्रतिद्वंद्वी लगातार पांच साल तक सीएम की कुर्सी पर बना रहे और अगला चुनाव भी उसी के नेतृत्व में लड़ा जाए। पत्रकार आमोद कुमार सीएम के एक बड़े दावेदार का जिक्र भी यहां करते हैं, उन्हें सब जानते हैं कि उनका कद भी बड़ा है, लेकिन काडर बेस पार्टी भाजपा बाहरी लोगों को अपने साथ तो खड़े कर लेती है, लेकिन जब जिम्मेदारियां देने की बात आती है तो वह अपने काडर को ही महत्व देती है। आमोद कुमार कहते हैं कि राज्यसभा की दो सीटों को ही देख लें। कांग्रेस से भाजपा में आये एक पूर्व मुख्यमंत्री को दोनों ही बार मौका नहीं दिया गया, जबकि उनका पहले दिन से ही राज्यसभा के लिए सबसे मजबूत दावा था।

नदी किनारे करीब चार-पांच घंटे की चर्चाओं में और भी बहुत कुछ बातें हुई। ये वाली चर्चा समसामयिक लगीतो मन हुआ मित्रों के साथ शेयर कर दें। इस चर्चा के दौरान अधिकतर मित्रों ने सीएम के कार्यों व साहस की सराहना की तो कुछ ने उन पर व्यवहार कुशल नहीं होने जैसी बातें भी बेबाकी से कही। खैर हमारे साथी पत्रकार आमोद कुमार के पास सारे सवालों का जवाब होता है, इसलिए व्यहारिक पक्ष को उन्होंने यह कहकर नकार दिया कि सीएम एक शासक है तो चेहरे पर भी सख्ती का अहसास होना चाहिए। सनडे की यह पिकनिक इन चर्चाओं के साथ समाप्त।

 अब देखते हैं कि फिर कब किस अवसर पर लिखने का मूड बनता है।

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