पृथ्वी दिवस की 51 वीं वर्षगांठ पर हेमंवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय में आयोजित किया गया राष्ट्रीय वेवीनार

 

पृथ्वी दिवस की 51 वीं वर्षगांठ पर हेमंवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय में आयोजित किया गया राष्ट्रीय वेवीनार






पृथ्वी दिवस की 51 वीं वर्षगांठ पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग द्वारा राष्ट्रीय वेविनार का आयोजन किया गया. हमारी पृथ्वी को पुनरस्थापित करना इस वर्ष पृथ्वी दिवस का मुख्य विचार था. इस ऑनलाइन राष्ट्रीय वेबीनार का उद्धघाटन हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर अन्नपूर्णा नौटियाल द्वारा किया गया. इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा आज पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन से पृथ्वी पर जो संकट आया है वास्तव में इसके लिए मानव स्वयं जिम्मेदार है, जिसकी सजा उसको स्वयं भुगतनी पड़ रही है.पृथ्वी पर मानव द्वारा उत्पन्न की गई इन समस्याओं से मुक्ति अथवा कमी पृथ्वी को पुनर्स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा.उपृथ्वी पर आज कोरोना एक बहुत बड़ी महामारी के रूप में सामने आई है, पृथ्वी  पर रहने वालों को इस तथा इस तरह की समस्याओं से न जूझना पड़े इस पर भी वैज्ञानिकों शोधकर्ताओं को गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है.उन्होंने कहा भूगोल विभाग समय-समय पर इस तरह के आयोजन कर सराहनीय कार्य कर रहा है. इस राष्ट्रीय वेविनार के संयोजक एवं विभागाध्यक्ष भूगोल हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय प्रोफेसर महावीर सिंह नेगी ने अपने संबोधन में कहा अनियोजित एवं अनियंत्रित विकास के कारण जिस तेजी से वनों को काटा गया, खेती से अधिक से अधिक उत्पादन की चाहत के कारण बड़े पैमाने पर रासायनिक खादों, कीटनाशकों के प्रयोग ने व बड़े पैमाने पर प्लास्टिक के प्रयोग ने इस पृथ्वी में कई समस्याएं पैदा कर दी हैं. वनीकरण, जैविक खेती व नियोजित विकास से हम इस धरती को पुनर्स्थापितकरने में हम कुछ हद तक सहायक हो सकते हैं. भूगोल विभाग  पृथ्वी दिवस, पर्यावरण दिवस व हिमालय दिवस के अवसर पर पिछले कई वर्षों से लगातार कार्यक्रम आयोजित करता आ रहा है . इस अवसर पर भारत सरकार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सलाहकार तथा पूर्व निदेशक सीएसआईआर के साथ भारत सरकार के कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके डाक्टर मनोज कुमार मनोज कुमार पटैरिया ने कहा मानव  को अपनी गतिविधियों को इस तरह से संचालित करना चाहिए जिससे इस पृथ्वी को कम से कम नुकसान पहुंचे.हमें कुछ ऐसे संस्थान बनाने होंगे जो जो इस दिशा में प्रयास करें.  पृथ्वी हमारी है व हमारे लिए है इसे किसी तरह का नुकसान पहुंचता है  तो उसकी सजा हमें ही भुगतनी पड़ेगी. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ए एल रामानाथन ने अपने संबोधन में कहा मानव और प्रकृति के बीच अच्छा सामंजस्य होना बहुत जरूरी है.हिमनदों, पानी के प्राकृतिक स्रोतों पर जो आज खतरा उत्पन्न हो गया है वह मानव जीवन  क़े सबसे बड़े संकट में से एक है. पानी के प्राकृतिक स्रोत की स्थिति वहां की प्रकृति की स्वस्थता को दर्शाते हैं. लद्दाख में कृत्रिम ग्लेशियर बनाने के प्रयास की उन्होंने सराहना की.

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक मैं भूगोल विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एस.के बंसल ने कहा पृथ्वी हमारी संपत्ति नहीं है तथा पृथ्वी पर उपलब्ध सभी संसाधनों पर हमारा अधिकार नहीं है.पृथ्वी की तरफ हमारी यह जिम्मेदारी है कि जिस स्थिति में पूर्वजों ने उसे हमें सौंपा उसे और बेहतर बना कर हम उसे अगली पीढ़ी को सौंपे.

केंद्रीय विश्वविद्यालय आइजोल मिजोरम मैं भूगोल विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वीपी सती कहा पृथ्वी पर वायु, जल,थल जीवन के अत्यंत उपयोगी तत्व हैं,जिनके बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं है.यह तत्व तो सिर्फ पृथ्वी पर ही पाए जाते हैं. आज इन्हीं सब पर मानव गतिविधियों ने बड़ा संकट उत्पन्न कर दिया है सबको संरक्षित व पुनर्स्थापित करना मानव के अस्तित्व के लिए बहुत जरूरी है.इस अवसर पर उत्तराखंड उद्यानिकी एवं कृषि विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग में  एसोसिएट प्रोफेसर  एस.पी सती ने अपने संबोधन में कहा संसाधनों का समुचित उपयोग पृथ्वी को संरक्षित करने में एक बड़ा कदम होगा. ग्लोबल वार्मिंग भयावह परिणामों  की एक श्रृंखला को जन्म दे रही है. आज मानव की उपभोग वादी नीतियों ने हमारी इस प्रकृति की कई प्रजातियों को खोया है,कैसे हम इन्हें पुनर्जीवित व पुनर्स्थापित  करें,इसके लिए प्रयास किये जाने चाहिए. प्रसिद्ध सर्जन डॉ महेश भट्ट ने स्वास्थ्य व पृथ्वी की पुनर्स्थापना विषय पर अपना प्रस्तुतीकरण दिया. जिसमें उन्होंने कहा मानव के विचार प्रभावशाली शक्तिशाली हैं वे आसपास के अपने पर्यावरण को प्रभावित करते हैं.मानव का मनोविज्ञान जैव मंडल से बहुत निकट का संबंध रखता है.विकासवादी सोच ने जैवमंडल को काफी नुकसान पहुंचाया है.सतत विकास मध्य का रास्ता हो सकता है

इस इस अवसर पर भूगोल विभाग के वरिष्ठ शिक्षक प्रोफेसर बीपी नैथानी, डॉ एल पी लखेड़ा एवं डॉ राजेश भट्ट ने भूगोल विभाग की ओर से सभी का आभार व्यक्त किया तथा कुलपति महोदय का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका मार्ग दर्शन भूगोल विभाग को प्राप्त होता रहता है, जिससे हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है.

ऑनलाइन आयोजित राष्ट्रीय वेबीनार में प्रोफेसर आर एस राणा डीन स्कूल ऑफ अर्थ साइंस, प्रोफेसर वाई. पी रेवानी डीन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, प्रोफेसर एम.एम. सेमवाल विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान विभाग, वृक्ष मित्र डॉ त्रिलोक चंद सोनी, डॉ रमेश भट्ट डॉ नेहा तिवारी, डॉ भालचंद्र नेगी, डॉ मंजू भंडारी, डॉ लक्ष्मी गार्गी,डॉ एके द्विवेदी,डॉक्टर ममता शर्मा,डॉक्टर कोमल, डॉक्टर कंचन सिंह, डॉक्टर नीरज असवाल, रेनू सनवाल  प्रोफेसर क़े सी पुरोहित, प्रोफेसर बीएल तेली, प्रोफेसर अनीता रुडोला डॉक्टर, एम.एस चौहान,डॉ मुकेश नैथानी डॉक्टर सुनील चौहान डॉ अतुल कुमार,डॉ उपेंद्र सिंह, डॉक्टर अभिलाष सूर्या, अशोक कुमार, डॉ वाई एस नेगी, डॉक्टर के एस बिष्ट डॉक्टर शिवांगी पचारने दत्ता डॉ ताजबर सिंह पडियार डॉ उपेंद्र चौहान, डॉक्टर डीडी प्रसाद डॉक्टर बबलू कुमार,डॉक्टर प्रेमलता, डॉक्टर शेयरी चौधरी, नेहा चौहान, सुनील सिंह, विकास रावत सहित शोध छात्रों तथा बड़ी संख्या में भूगोल विभाग के स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के छात्रों ने जूम एप तथा फेसबुक लाइव के माध्यम से वेविनार में प्रतिभाग किया.

1 Comments

  1. मुझे खुशी है कि मुझे सुबह वेबीनार में सम्मिलित होने का मौका मिला तथा विभिन्न विद्वानों से ज्ञान एवं विज्ञान तथा पृथ्वी दिवस पर सीखने का मौका मिला

    ReplyDelete

Post a comment

Previous Post Next Post