घेस के युवाओं के हुनर जज्बे को सलाम-सेना में रिकार्ड भर्ती होकर रचा इतिहास

 घेस क्षेत्र के लिए बड़े गौरव का दिन

-मां नंदा भगवती क्षेत्र पर कृपादृष्टि यूं ही बनाये रखे

(वरिष्ठ पत्रकार अर्जून सिंह बिष्ट की फेसबुक वॉल से)



 चमोली-उत्तराखंड के जनपद चमोली का सीमांत घेस क्षेत्र एक बार फिर चर्चाओं में है। इस दूरस्थ क्षेत्र के युवाओं ने अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिखाते हुए सेना भर्ती की कड़ी बाधाओं को पार करते हुए बड़ी सफलता अर्जित की है। शनिवार व रविवार को सामने आये लिखित परीक्षा के परिणाम के बाद घेस घाटी के 11 युवक सेना की विभिन्न शाखाओं में सेवाएं देने के लिए चयनित हुए हैं। चयनित 11 युवकों में से आठ ग्राम सभा घेस के ही हैं, जबकि दो युवक हिमनी व एक पिनाऊं गांव से है। कड़ी शारीरिक परीक्षा व मेडिकल के बाद इन युवाओं को लिखित परीक्षा के लिए चुना गया था। क्षेत्र के लिए गर्व की बात यह है कि शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ही पिछड़ा होने के बावजूद इस गांव के सभी बच्चों ने लिखित परीक्षा में सफलता पायी है।

सफलता पाने वालों में दो बच्चे स्पोर्ट्स कोटे में चुने गये हैं। चुने गए युवक निम्न हैं। 

 1— रवि बिष्ट पुत्र मोहन सिंह बिष्ट ( बालीबाल)

2—देवेंद्र सिंह पुत्र कुंदन सिंह बिष्ट (बाक्सिंग)

3—नीरज सिंह पुत्र लक्ष्मण सिंह बिष्ट (जीडी)

4—चंदन सिंह पुत्र गोविंद सिंह बिष्ट (जीडी)

5—भगत सिंह पुत्र नारायण सिंह बिष्ट (जीडी)

6—कमल सिंह पुत्र धन सिंह बिष्ट (जीडी)

7—कमल सिंह पुत्र गोविंद सिंह (जीडी)

8—बाबी बिष्ट पुत्र प्रताप सिंह (जीडी)

(ये सभी ग्राम सभा घेस से हैं) इसके अलावा

9—धर्मेंद्र पुत्र सुबेदार खिलाफ सिंह दानू (जीडी) (पिनाऊं)

1— नंदन सिंह पुत्र राजेन्द्र सिंह दानू (जीडी) (हिमनी)

1१— अनिल पुत्र कुंदन सिंह दानू (जीडी) (हिमनी) से हैं। 

कुछ माह पहले हिमनी गांव के दो युवकों का चयन आईटीबीपी में भी हो चुुका है। 

सैन्य बलों के माध्यम से देश सेवा का अवसर पाने वाले सभी चयनित  युवकों व उनके परिजनों को ढेर सारी बधाई, शुभकामनाएं।

सफल हुए सभी युवकों का आह्वान करते हैं कि वे घाटी के पूर्व सैनिकों के द्वारा स्थापित उच्च सैन्य मापदंडों का पालन करते हुए इस घाटी और अपने माता—पिता का नाम रोशन करेंगे। प्रसन्नता की बात यह है अधिकतर युवा किसी न किसी रूप में सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े हैं और वे एक सैनिक के धर्म, अनुशासन व कर्तव्य जैसी बुनियादी बातों को अपने घर से ही समझते हैं।

घेस क्षेत्र यद्यपि दूरस्थ होने के कारण विकास से वंचित रहा है। बावजूद इसके क्षेत्र के लोगों ने सेना के साथ ही जहां भी उन्हें अवसर मिला, अपनी मेहनत के बल पर प्रतिभा दिखाने में पीछे नहीं रहे। इस कड़ी में पहला नाम मेजर देव सिंह दानू (पिनाऊं) का है, जिन्होंने इस क्षेत्र को बड़ा सम्मान दिलाया। गढ़वाल राइफल के सुबेदार मेजर देव सिंह दानू नौकरी छोड़कर आजाद हिंद फौज में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अंगरक्षक बटालियन के सीओ रहे और उन्हें मेजर का रैंक दिया गया। वीर चक्र विजेता राइफलमैन जमन सिंह दानू (बलाण) ने अपने सैन्य कर्तव्य के निवर्हन के लिए वीर गति पायी थी तो स्व. कैप्टन बहादुर सिंह पटाकी (हिमनी वाले) नागा रेजिमेंट से क्षेत्र के पहले आनरेरी कैप्टन बने। पिनाऊं निवासी सुबेदार मेजर आलम सिंह दानू का योगदान भी यादगार है। फर्स्ट गढ़वाल (बाद में सिक्स मैकेनाइज्ड) के सुबेदार खडक़ सिंह बिष्ट पहले आनरेरी सुबेदार मेजर बने। इसके साथ ही 13वीं गढ़वाल के सुबेदार मेजर आनरेरी कैप्टन केशर सिंह बिष्ट जो रेजिमेंट के बेस्ट जेसीओ माने जाते थे, को दो बार भारतीय सैन्य अकादमी में प्रशिक्षक रहने का सौभाग्य मिला। हिमनी निवासी सुबेदार मेजर आनरेरी कैप्टन हरचंद सिंह दानू भी 11वीं गढ़वाल के सुबेदार मेजर रहे। असम राइफल में 12 साल तक सुबेदार मेजर रहे बलवंत सिंह पटाकी व 23 असम के वर्तमान सुबेदार मेजर जय सिंह दानू, सेंटर बैंड से सुबेदार मेजर गोपाल सिंह बिष्ट को दर्जनों बार रिपब्लिक डे परेड में अपनी टुकड़ी का नेतृत्व करने के साथ ही भूटान आर्मी के बैंड प्रशिक्षक के रूप में नियुक्ति पाने का गौरव मिला। उनके छोटे भाई सिग्नल रेजिमेंट में तैनात, सुबेदार मेजर सोबन सिंह बिष्ट। एवरेस्टर सुबेदार मेजर हीरा सिंह दानू आज 19 गढ़वाल राइफल्स में तैनात हैं।

इसी कड़ी में 12वीं गढ़वाल के दो सीनियर जेसीओ सुबेदार खिलाफ सिंह दानू (पिनाऊं) और मेरा छोटा भाई सुबेदार लक्ष्मण सिंह बिष्ट (घेस) नयी पीढ़ी के वो होनहार फौजी हैं, जो अपने सैन्य कैरियर के शिखर यानि सुबेदार मेजर के पद पर पहुंच रहे हैं। इन दोनों को ही अगले कुछ माह के भीतर सुबेदार मेजर की जिम्मेदारी मिलनी तय है। सुबेदार लक्ष्मण बिष्ट इन्फैंट्री स्कूल महू में दो बार कैटेगरी बी व दो बार कैटेगरी ए इंस्ट्रक्टर रहने के साथ ही इम्ट्राड में रायल भूटान आर्मी के पीसी इंस्ट्रक्टर रह चुके हैं।

 इन सफल सैनिकों का उल्लेख यहां इसलिए कर रहा हूं, क्योंकि इस दूरस्थ क्षेत्र के लोग शिक्षा के अभाव के बावजूद सफलता की सीढिय़ां चढऩे में पीछे नहीं रहे। नई पीढ़ी के सैनिक अपने इन अग्रजों का अनुशरण करते हुए इस क्षेत्र की सैन्य परंपरा को और अधिक गौरवान्ति करेंगे, ऐसी हम सभी क्षेत्रवासी उम्मीद करते हैं।

एक बार पुन: आप सबको बधाई, आपके परिजनों को बधाई। आप सभी उच्चकोटि की सैन्य सेवाएं देकर क्षेत्र का नाम रोशन करें, यही कामना है।  

-अर्जुन बिष्ट, पत्रकार।

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