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Tuesday, April 06, 2021

फिर से लौट रहा है आयुर्वेद का दौर-जानिए पूरी खबर

 फिर से लौट रहा है आयुर्वेद का दौर

हिमालयीय आयुर्वेदिक मेडिकल काॅलेज में आयुर्विद्या आरंभ संस्कार


देहरादून। शिक्षण संस्थानों का बड़ा होना, तभी सिद्ध होता है, जब उनमें संस्कार भी हों। संस्कारयुक्त संस्थानों में शिक्षकों और विद्यार्थियों का संस्कारवान होना स्वाभाविक है। बात हिमालयीय विश्वविद्यालय की करें तो यहां हमें वही प्राचीन शैक्षिक संस्कार और परंपराएं दिखायी देती हैं, जो शिक्षा के केंद्र हमारे गुरुकुलों की पहचान हुआ करती थीं। विश्वविद्यालय के हिमालयीय आयुर्वेदिक मेडिकल काॅलेज में आयुर्विद्या आरंभ संस्कार ऐसा अनोखा संस्कार है, जिसमें विद्यार्थियों को आयुर्वेदिक चिकित्सा की शिक्षा देने की औपचारिक शुरुआत होती है। 15 दिवसीय यह कार्यक्रम आरंभ हो गया है। कार्यक्रम में छात्रों मंे आयुर्विद्या के संस्कारों का बीजारोपण कर उन्हें आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का परिचय कराया जाता है और उसका महत्त्व बताया जाता है।

इस मौके पर हिमालयीय विश्वविद्यालय के गुरुकुल परिसर के निदेशक एवं वरिष्ठ कायचिकित्सक डाॅ0 अरुण कुमार त्रिपाठी ने कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सा का आने वाले समय में और अधिक महत्त्व बढ़ जाएगा। भारतीय प्राचीन ज्ञान की यह पद्धति मनुष्य को पूर्ण स्वस्थ्य रख्  है। आज आधुनिक खान-पान, रहन-सहन और बेढंगी दिनचर्या से मनुष्य का स्वास्थ्य निरंतर खराब हो रहा है। एलोपैथिक चिकित्सा से वह तत्काल ठीक तो हो जाता है, लेकिन उन दवाओं से उसे अन्य कई रोगी घेर लेते हैं। इसलिए हमें यथासंभव आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति अपनानी चाहिए।

डाॅ0 अरुण कुमार त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय के हिमालयीय आयुर्वेदिक मेडिकल काॅलेज में छात्रों के 15 दिवसयी इस आयुर्विद्या आरंभ संस्कार कार्यक्रम में कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति भारत की अमूल्य ज्ञान निधि है। मानव के स्वास्थ्य और उपचार में इसकी अहम भूमिका है। आज पश्चिम के लोग भी इसे अपनाने को मजबूर हो गए हैं। कोरोना काल में इस पद्धति ने हम भारतीयों की सुरक्षा में बड़ी सहायता की है। आज के दौर में आयुर्वेदिक चिकित्सकों का समाज के प्रति दायित्व बढ़ गया है। उन्हें इस बारे में समाज को अधिक से अधिक जागरूक और प्रेरित करना होगा। आयुर्वेद के विषय में सही तथ्य और सत्य समाज के समक्ष रखने होंगे। कुछ लोगों ने गलत जानकारियों और मिथकों के कारण आयुर्वेद को बदनाम किया है। इसलिए हमें आयुर्वेद के विषय में सही जानकारियों और उसके लाभों के विषय में समाज को बताना होगा। इस अवसर पर संस्था के सचिव बाल कृष्ण चमोली,प्रधानाचार्य डॉ०अनिल कुमार झा, वरिष्ठ संकाय डॉ० निशांत राय जैन, डॉ नितिन पांडे मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ० वंदना चैहान और डॉ०नीरज श्रीवास्तव ने किया।