पथरी की पीड़ा के बावजूद लोगों की सेवा कर रही आरती जोशी

 रामरतन सिंह पवांर/जखोली


  • पथरी की पीड़ा के बावजूद लोगों की सेवा कर रही आरती जोशी

  • दो नन्हीं बालिकाओं की देखभाल के लिए माता-पिता को बुलाया रुद्रप्रयाग

  • प्रेरणादायक है आरती की कर्तव्यपरायणता

  • आरती को  पहाड़ प्रेम खींच लाया रुद्रप्रयाग

आरती को  पहाड़ प्रेम खींच लाया रुद्रप्रयाग जोशी 


रुद्रप्रयाग। कोविड-19 से आम लोगों की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य कर्मी फ्रंट लाइन वर्कर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। हरेक स्वास्थकर्मी अपने जीवन को खतरे में डालकर मानवता की सेवा में जुटा हुआ है। इनमें आरती जोशी एक ऐसी स्वास्थ्य कर्मी है, जो पथरी से पीड़ित होने के बावजूद भी कोरोना से लड़ी जा रही इस जंग में दृढ़ता के साथ खड़ी है। आरती जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग में उपचारिका के पद पर कार्यरत है। 

आरती के हौसले को सलाम


आरती जोशी आईसीटीसी डिपार्टमेंट की संविदा स्टाफ नर्स होने के बावजूद कर्मचारियों की कमी के चलते जिला अस्पताल की अन्य नियमित उपचारिकाओं की भांति कोविड में अहम सेवाएं दे रही है। आरती स्वयं पिछले कई दिनों से अस्वस्थ है। उनकी किडनी में पथरी के कारण सूजन है। पिछले माह 20 अप्रैल को निर्मल हॉस्पिटल ऋषिकेश में ऑपरेशन के माध्यम से उनकी पथरी निकाली जानी थी। जिसके लिए उन्हें कम से कम 10 दिन का अवकाश लेना पड़ता। कोविड में ड्यूटी लगने और स्टॉफ की कमी को देखते हुए आरती ने फिलहाल ऑपरेशन न करने का निर्णय लिया। 


आरती का कहना है कि इस वक़्त चिकित्सालय को उनकी सेवाओं की आवश्यकता है। ऐसे में इस समय अवकाश लेना सही नहीं है। जब राष्ट्र इतनी पीड़ा से गुजर रहा है तो कुछ दिन पथरी की थोड़ी पीड़ा वह भी सहन कर सकती हैं। आरती की दो नन्हीं बेटियां हैं। जिनकी देखरेख के लिए उनकी मां संगीता भट्ट और पिता दयाराम भट्ट साथ रह रहे हैं। आरती मूल रूप से ऋषिकेश की है। पहाड़ के प्रति प्रेम और सेवा भाव उन्हें पहाड़ की ओर खींच लाया। वह चाहती तो ऋषिकेश-देहरादून में भी सेवाएं दे सकती थी, लेकिन उनकी प्राथमिकता में हमेशा से पहाड़ रहा। 


आरती जोशी के पति प्रसिद्ध समाजसेवी एवं लोक संस्कृति कर्मी कमल जोशी ने बताया कि उनकी पत्नी कोविड सैंपलिंग में ड्यूटी दे रही हैं। उनकी सेवा भावना को देखकर हमें भी गर्व होता है। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी के साथ ही अन्य स्वास्थ्य कर्मी भी दिनरात सेवायें दे रहे हैं। स्वास्थ्य कर्मियों के सामने एक-एक जीवन बचाने की चुनौती है। 


बहरहाल, सीमित संसाधनों के बावजूद उपचारिका आरती जोशी सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की सेवा भावना प्रेरणादायी है। यह समय विषम परिस्थितियों में सेवाएं दे रहे स्वास्थ्य कर्मियों की हौसला-अफजाई करने का है। जिससे उनकी जिजीविषा और आत्मबल मजबूत रहे।

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