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Tuesday, June 15, 2021

तीसरी बार नर्सिंग स्टाफ की परिक्षा रद होने पर मेडिकल छात्रों ने सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन और दी उग्र प्रदर्शन की चेतावनी


तीसरी बार नर्सिंग स्टाफ की परिक्षा रद होने पर मेडिकल छात्रों ने सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन और दी  उग्र आंदोलन की चेतावनी




 देहरादून नर्सिंग स्टाफ की परीक्षा  स्थगित होने पर आज नर्सिंग मेडिकल के छात्र छात्राओं ने राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया आपको बता दें कोरोना के चलते राज्य सरकार की ओर से प्रदेश में नर्सिंग स्टाफ की परीक्षा को तीन बार  स्थगित कर दिया गया है जिसमें 16 अप्रैल 27 मई  के बाद आज 15जून को होने वाली परीक्षा को स्थगित किया। जिसको लेकर मेडिकल के छात्र छात्राओं में काफी रोष है ,, छात्रों की मानें तो जब तक राज्य सरकार की ओर से परीक्षा नहीं कराई जाती है तब तक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन जारी रहेगा



                      

            ये हैं   प्रमुख प्रमुख मांग

  • 01- जब भर्ती नियमावली के आधार पर हो रही है तो ऐसे स्थिति में संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का कोई औचित्य नहीं है। क्योंकि उत्तराखंड के लगभग सभी सरकरी विभागों में भी संविदा कर्मी उपनल के माध्यम से लगे हैं। यदि यहां संविदा नर्स को नियमित किया जायेगा तो अन्य विभागों में 15000 से अधिक लोग संविदा में कार्य कर रहे हैं सभी को नियमित करना पड़ेगा जिससे मेहनती विद्यार्थी को कभी मौका नहीं मिलेगा।



  • 02 2010-12 पहले उत्तराखंड में सिर्फ हर साल 50-80 बच्चे नर्सिंग डिप्लोमा / डिग्री से पासआउट होते थे उस समय वरिष्ठता के आधार नियुक्ति करना उचित था किंतु वर्तमान में उत्तराखंड में सरकारी / निजी संस्थानों से प्रत्येक साल 1000-12000 बच्चे पासआउट हो रहे हैं पिछले 10 सालों 12000 से अधिक अभ्यर्थी कोर्स कर चुके हैं तथा आने समय में यह आंकडा दो से तीन गुना बड़ जायेगा ऐसी स्थिति में वरिष्ठता के आधार पर चयन पक्रिया होने से सभी को मौका नहीं मिलेगा तथा सबको चयनित होने में 25-30 से अधिक वर्ष लग जायेंगे।

  • 03 वर्तमान नर्सिंग अभ्यर्थियों तथा वर्तमान समय में कोर्स कर रहे विद्यार्थी तथा आने वाले समय में कोर्स करने वाले बच्चों के भविष्य के लिए चयन प्रक्रिया लिखित परीक्षा के आधार पर होनी चाहिए जिससे सभी को समान अवसर मिलेगा तथा सभी मेहनत और लगन के साथ तैयार करेगे।

  • 04 – बिना लिखित परीक्षा से संविदा / NHM स्टाफ कर्मचारियों नियमित करने का कोई प्रावधान नहीं है क्योकि संविदा कर्मचारियों को सिर्फ संविदा पर जॉब करने के लिए बांड के आधार पर जॉब मिलती है जिस साफ-साफ लिखा होता है वह भविष्य में निय होने के हकदार या दबाव सरकार पर नहीं डालेगी। ऐसी स्थिति में इनका यह कहना उचित नहीं है कि इन्हें नियमित किया जाय।

  • 05 – अपने स्वार्थ के लिए संविदा कर्मचारियों द्वारा धरना / हडताल करना उचित नहीं है जब प्रदेश में

  • शांतिपूर्ण ढंग से लिखित परीक्षा हो रही है ।

  • 06 - वर्तमान समय में सभी नर्सिंग अभ्यर्थी अपनी सेवा विभिन्न सरकारी तथा निजी संस्थानों में दे रहे हैं साथ ही समय निकाल कर अपनी परीक्षा की तैयारी भी कर रही है। ऐसी स्थिति में लिखित प्रक्रिया स्थगित करना उचित नहीं है। ये सरकार हमारे साथ छल कर रही है।

  • 07 संविदा कर्मचारियों द्वारा कहा जा रहा है कि हम नये बच्चों के साथ बराबरी नहीं कर सकते हैं। ये अभी कोर्स कर आ रहे हैं इस सम्बन्ध में बताने चाहते हैं कि सभी लोग वही नर्सिंग पढ़ाई कर के आये हैं जो कि संविदा कर्मचारियों द्वारा किया गया हमें कोई अन्य कोर्स नहीं कराया गया

  • 08- संविदा कर्मचारियों द्वारा कहा जा रहा है कि डिप्लोमा वाले डिग्री वालों के साथ कैसे परीक्षा दे सकते हैं। इस सम्बन्ध में हम बताना चाहते है कि उत्तराखंड नसिंग भर्ती विज्ञापन पत्र में साफ लिखा हैं कि दो पेपर लिखित परीक्षा के होंगे जिसमें एक पेपर सामान्य ज्ञान तथा दूसरा पेपर नर्सिंग विषय का होगा जो कि डिप्लोमा स्तर का होगा डिग्री स्तर का नहीं। दोनो कोर्स नर्सिंग से सम्बन्धित है तथा समस्त भारत में स्टाफ नर्स की परीक्षा में डिप्लोमा तथा डिग्री दोनों को समान रूप से अवसर दिया जाता है फिर यहां ये प्रश्न उठाने का कोई औचित्य नहीं है ।

  • 09.हम चाहते हैं कि प्रदेश में से में संविदा / गेस्ट प्रथा समाप्त किया जाये क्योंकि यहां पर चयन प्रक्रिया नहीं करायी जाती है बल्कि किसी पहचान या सेंटिंग से लगाये जाते हैं न हीं हर साल इनकी कार्यक्षमता का आंकलन किया जाता है। यह प्रथा समाप्त होने से समस्त प्रदेश में परीक्षा के माध्यम से पदों को भरा जायेगा तथा मेहनती तथा योग्य अभ्यथियों को सेवा करने का मौका मिलेगा।