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Tuesday, June 22, 2021

अंतरराष्ट्रीय शूटर सड़को पर चिप्स नमकीन बैचने को मजबूर-देखिए वीडियो

 अंतरराष्ट्रीय शूटर सड़को पर चिप्स नमकीन बैचने को मजबूर

उपेन्द्र सिंह राणा, देहरादून


  • अंतराष्ट्रीय स्तर मे जीते 24 गोल्ड मेडल
  • 8 सिल्वर व 3 ब्रांच मेडल भी जीतें  
  • 2007 मे ताइवान मे वर्ल्ड और 2015 मे क्रोएशिया मे वर्ल्ड गेम में लिया हिस्सा
  • 2009 में बेंगलूरू मे वर्ल्ड गेम में जीता सिल्वर मेडल  
देखिए वीडियो



देहरादून- आज  आपको उत्तराखंड की एक ऐसी बेटी से मिलाने जा रहे हैं जो सिस्टम के सितम के कारण सड़को पर चिप्स नमकीन बैचने को मजबूर हो गई है। जी हां हम बात कर रहे है अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी की जिसने पदक जीतकर देश और राज्य का नाम उंचा किया ,,,,, और देश के लिए कई पदक अपने नाम किये । लेकिन आज हालात ये है की सड़कों पर सामान बैचकर गुजर बसर करनी पड़ रही है।  देखिए एक रिपोर्ट ।

तस्वीरों मे आज जो ये बुजुर्ग महिला और एक विकलांग लड़की देख रहे है । यह कोई और नहीं बल्कि अंतराष्ट्रीय पैरा शूटर खिलाड़ी है,,, जो की सिस्टम के सितम के कारण देहरादून की सड़को पर धक्के खाने को मजबूर है। आज जब कोई इनका हाल पूछते है तो मां बेटी फफक कर रो पड़ती है । मां बेटी के आंसू उत्तराखंड मे राज्य आन्दोलकारियों और खिलाड़ियों की दुर्दशा को बंया करते है।  20 साल के करियर मे अंतराष्ट्रीय पैरा शूटर दिलराज कौर ने 24गोल्ड, 8  सिल्वर और 3 ब्रांज मेडल जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया लेकिन स्थिति आज ऐसी है की  खुद का और अपनी मां का भरण पोषण करने के लिए गांधी पार्क के बाहर नमकीन बिस्किट बेचने को मजबूर होना पड़ा ।


कुछ साल पहले पिता की मृत्यु व भाई की मौत के बाद दिलराज कौर के  परिवार की जिंदगी बड़ी मुश्किल दौर से गुजर रही है। दिलराज कौर ने बताया की 2019 मे किडनी की समस्या से जूझते हुए पिता खो दिया वहीं इस साल तीन माह पूर्व भाई की मौत हो गई । जिसके बाद दु:खो का पहाड़ टूट गया ं अब स्थिति यह है कि पिता की पेशन पर किसी तहर घर का गुजर बसर हो  रही है । साथ ही कोरोना की दुश्वारियों ने आर्थिक रूप से तौड़ दिया ।
आपको बता दें की दिलराज कौर की मां ने उत्तराखंड राज्य आन्दोलन के लिए लड़ाई भी लड़ी और आन्दोलनकारी होने के नाते 2011 मे सरकारी नौकरी का आॅफर दिया गया था । मगर उन्होने नौकरी का आॅफर यह कहते हुए ठुकराया था ताकि उनकी आश्रित बेटी दिलराज कौर को यह नौकरी दी जाए। क्योकि शासनादेश मे यह जिक्र था की अपने बदले अपने आश्रित का नाम दे सकते है। लेकिन अभी तक दिलराज कौर को नौकरी नहीं मिल सकी । जिसकी उसकी मां  लगातार सरकार से गुहार लगा रही है । ताकि उनकी घर आर्थिक स्थिति सुधर सके ।

दिलराज कौर जैसी कई ऐसी खिलाड़ी है जिन्होने देश के साथ साथ प्रदेश का नाम भी रोशन किया है। ऐसे खिलाड़ियों के लिए सरकार को काम करने की जरूरत है ताकि आने वाले समय मे प्रदेश का नाम रोशन कर सके । लेकिन सिस्टम की बेबसी और घर की आर्थिक तंकी के कारण दिलराज कौर जैसी कई खिलाड़ियों को बीच में ही खेल छोड़ना पड़ता है। आज उसका परिवार सरकार से मदद की गुहार लगा रहा है ।