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Tuesday, June 29, 2021

ये होंगे नेता प्रतिपक्ष तो इनका अध्यक्ष बनना तय?

 ये होंगे नेता प्रतिपक्ष तो इनका अध्यक्ष बनना तय?

उत्तराखंड कांग्रेस में उपनेता प्रतिपक्ष VS अध्यक्ष

रैबार पहाड़ की पड़ताल


देहरादून-उत्तराखंड कांग्रेस के अंदर आजकल खूब गहन चिंतन-मनन चल रहा है, वजह है उप नेता प्रतिपक्ष का चुनाव लेकिन उप नेता प्रतिपक्ष के चुनाव के साथ ही, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय इंदिरा हृदयेश की मृत्यु के बाद नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी खाली हो गई थी। जिसके बाद हर किसी की नजर इस बात पर है, कि आखिर कांग्रेस के बचे हुए 10 विधायकों में से कौन अब जाकर नेता प्रतिपक्ष बनेगा l

वैसे तो सबसे आगे जिसका नाम चल रहा है वह है उपनेता प्रतिपक्ष करण मेहरा करण मेहरा न सिर्फ कांग्रेस के अच्छे और कद्दावर नेताओं में शुमार हैं अपितु वह कुमाऊं से भी हैं और अन्य सभी विधायकों के साथ भी उनकी अच्छी बॉन्डिंग बताई जाती है, इस वजह से भी करण मेहरा का नाम सबसे आगे चल रहा है।


लेकिन पिछले 3 दिनों में जो कुछ दिल्ली में चल रहा है(कांग्रेस के सभी विधायक प्रदेश प्रभारी वरिष्ठ नेता दिल्ली में मौजूद है और लगातार बैठक के चल रही हैं) उसे यह बिल्कुल नहीं लगता कि करण मेहरा नेता प्रतिपक्ष बनने जा रहे हैं।

और सूत्रों की माने तो लगातार हाईकमान हो या फिर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सभी की पसंद नेता प्रतिपक्ष के लिए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह बताए जा रहे हैं।

और लगातार उनको उन नेता प्रतिपक्ष बनाने की बात कही जा रही है,ऐसा नहीं है कि इस दौड‌ में प्रीतम सिंह अकेले हैं लेकिन वो सबसे आगे जरूर दिखाई दे रहे हैं।

वहीं कांग्रेस के अंदर के सूत्रों की माने तो प्रीतम सिंह नेता प्रतिपक्ष नहीं बनना चाहते, वजह भी साफ है। चुनाव के लिए अब सिर्फ कुछ महीनों का समय बचा है, और कोई भी मौजूदा अध्यक्ष यह नहीं चाहेगा कि जिसने इतना लंबा समय पार्टी में अध्यक्ष के रूप में बिताए हैं वो आखिरी समय में इस पद से पद मुक्त कर दिया जाए।

वहीं दूसरी तरफ लगातार विधायक के चाहते हैं कि प्रीतम सिंह को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाए।

वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी यह चाहते हैं कि पार्टी की कमान कोई दूसरा बड़ा नेता संभाले। ताकि चुनाव के समीकरण को और बेहतर ढंग से बनाया जा सके।


वहीं इन सबके बीच में एक खबर मंगलवार देर शाम को भी सामने आई, बताया जा रहा है कि कांग्रेस के ज्यादातर विधायक प्रीतम सिंह का साथ छोड़ कर मीटिंग से चले गए, ऐसे में यह भी साफ नजर आता है इस वक्त प्रीतम सिंह अकेले जूझ रहे हैं।


यह पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस में है इस तरह से राजनीति हावी चल रही हो जब 2017 में कांग्रेस विधानसभा चुनाव में हार कर सिर्फ 11 विधायकों में सिमट कर रह गई थी तो उस वक्त भी उप नेता प्रतिपक्ष के लिए खूब जोड़ गणित हुई थी लेकिन उस वक्त स्थिति यह थी कि नेता प्रतिपक्ष कौन बनेगा लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने वरिष्ठ नेता स्वर्गीय इंदिरा हृदयेश पर ही अपना भरोसा जताया था।


वहीं कांग्रेस के अंदर की गुटबाजी पिछले लंबे समय से हर किसी को नजर आती है, माना तो यह भी जाता है कि प्रीतम सिंह के सामने हमेशा से ढाल की तरह इंदिरा खड़ी रहती थी, लेकिन आज स्थिति बदल गई है। और वो  अकेले पड़ गए हैं।


इन सबके बीच में अब हर किसी की नजर इसी बात पर है कि आखिर नेता प्रतिपक्ष कौन होगा क्योंकि नेता प्रतिपक्ष ही तय करेगा कि अब आने वाले विधानसभा चुनाव में प्रदेश कांग्रेस की कमान किसके हाथ में रहेगी यदि प्रीतम नेता प्रतिपक्ष बनते हैं तो कांग्रेस की कमान किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ में जाएगी इसके लिए गढ़वाल कुमाऊं ब्राह्मण राजपूत इस सभी समीकरण देखे जाएंगे और इन समीकरणों के बीच में कई सारे नाम भी सामने आएंगे।


तेरी गढ़वाल से नेता प्रतिपक्ष बनते हैं तो पार्टी हाईकमान कोशिश करेगी कि कुमाऊं से ही प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव हो, इसमें प्रकाश जोशी, मथुरादत्त जोशी जैसे बड़े नाम शामिल है।


लेकिन सब नामों पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की हमें भी जरूरी पड़ जाएगी और यदि समीकरणों को नहीं देखा गया तो गणेश गोदियाल जो कि ब्राह्मण चेहरा भी हैं और उन्हें कई बड़े नेताओं का पसंदीदा व्यक्ति भी बताया जाता है इसके साथ ही वह मृदुभाषी भी है तो उनका नाम भी तय हो सकता है।

लेकिन कॉन्ग्रेस हाईकमान राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा के नाम पर भी विचार कर सकती है।


लेकिन अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत का नाम आखिर क्यों नहीं है हो सकता है कि हरीश रावत को ही प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए लेकिन सूत्रों की माने तो हरीश रावत खुद नहीं चाहते कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जाए,  वह चाहते हैं यह जिम्मेदारी किसी और को दी जाए और वह आने वाले चुनाव के लिए पार्टी को तैयार करें इसके लिए वह कांग्रेस पंजाब प्रभारी के दायित्वों से भी मुक्त होना चाहते हैं।


इस वक्त कांग्रेस हाईकमान और कांग्रेस प्रदेश प्रभारी योगेंद्र यादव के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी चुनौती है उपनेता प्रतिपक्ष का नाम तय करना इसके बाद जो चुनौती सामने आएगी वह है प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय करना।

और आखिर में जो सबसे बड़ी होगी वह है इन नामों को तय करने के बाद गुटबाजी और रूठने मनाने के दौर को संभालना।

और अब देखना होगा कि आखिर कांग्रेस हाईकमान इन सब चीजों को कैसे संभव कर पाती है।