देश विदेश के प्रतिष्ठित लोगों ने लिया एच.एन .बी विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के आयोजित सुंदरलाल बहुगुणा स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम में हिस्सा

 

देश विदेश के प्रतिष्ठित लोगों ने लिया एच.एन .बी विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के आयोजित सुंदरलाल बहुगुणा स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम में हिस्सा


  • हे.न.ब.गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सुंदरलाल बहुगुणा स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित 
  • देश विदेश के प्रतिष्ठित लोगों के व्याख्यान आयोजित
  • देश के कई राज्यों में भूगोल के छात्रों द्वारा सुंदरलाल बहुगुणा की स्मृति में वृक्षारोपण



हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग द्वारा आज अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के अवसर पर ऑनलाइन सुंदरलाल बहुगुणा स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया,


 जिसका उद्घाटन कुलपति हेमंती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय प्रोफेसर अन्नपूर्णा नौटियाल द्वारा किया गया. इस कार्यक्रम में जहां देश विदेश से बहुगुणा जी से बहुत निकट के साथ संबंध रखने वाले अपने क्षेत्र की महान विभूतियों को व्याख्यान हेतु आमंत्रित किया गया, वही इसमें बड़ी संख्या में विभिन्न विश्वविद्यालय से जुड़े हुए शिक्षकों शोध छात्रों एवं छात्रों ने भाग लिया.


 भूगोल विभाग जो कई वर्षों से विश्व पृथ्वी दिवस, पर्यावरण दिवस एवं हिमालय दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करता रहा है, इस वर्ष भी कोरोना महामारी के कारण सभी छात्रों ने अपने अपने गांव में वृक्षारोपण का कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें मुख्य रूप से जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली,उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल एवं असम से छात्रों ने वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संवर्धन के लिए चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों को संचलित किया . 



इस अवसर पर अपने संबोधन में कुलपति प्रोफेसर अन्नपूर्णा नौटियाल ने अपने संबोधन में कहा  प्रत्येक दिन पर्यावरण दिवस मनाए जाने की आवश्यकता है और पर्यावरण को संरक्षित व सुरक्षित रखने के लिए जहां एक तरफ कुछ लोग नायक की भूमिका में खड़े नजर आते हैं वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण का विनाश व उनका शोषण करते हुए खलनायक के रूप में समाज में कुछ लोग विद्यमान हैं। इसलिए वृक्षों को लगाकर पुत्र की भांति उसकी देखरेख करने की आवश्यकता है।

कुलपति महोदया ने 2013 की उत्तराखंड त्रासदी का जिक्र करते हुए कहा कि हम प्रकृति के नियमों को नकार नहीं सकते हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करके ही आगे बढ़ना होगा। 




इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक एवं विभागाध्यक्ष भूगोल हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय प्रोफेसर महावीर सिंह नेगी ने कहा इस वर्ष का विश्व पर्यावरण दिवस  गांधीवादी विश्व प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा जी की स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें अपनी सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की गई. भूगोल विभाग के छात्रों द्वारा जो देश के विभिन्न स्थानों पर इस समय निवास कर रहे हैं बहुगुणा जी की स्मृति में वृक्षारोपण किया गया . उन्होंने अपने संबोधन में कहा 10 वर्षों तक टिहरी में रहने के दौरान बहुगुणा जी का जो सानिध्य प्राप्त हुआ उसका उनके जीवन पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा है. सुन्दर लाल बहुगुणा एक ब्यक्ति नहीं पूरा एक जीवन दर्शन है. उनके द्वारा कही गई बातें कई बुद्धजीवीयों  की अब समझ मे आ रही हैँ.आज के कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में कुमायूं विश्वविद्यालय के प्रोफेसर प्रमुख इतिहासकार डॉ शेखर पाठक ने बताया कि सुंदरलाल बहुगुणा जी का 94 वर्ष का जीवन हिमालय की ही तरह विराट था, उन्होंने वन आंदोलन, चिपको आंदोलन, ठक्कर बापा आंदोलन व टिहरी बांध जैसे आंदोलनो में अहम भूमिका निभाई जिसका परिणाम आज भी लोगों के समक्ष है।उन्होंने कहा कि अभी हाल में अमेजन के जंगलों का कटान भारतीय मानसून को प्रभावित कर रहा है और विश्व का पर्यावरण अंतर संबंधित होता है।

 आज भी हिमालय में लगभग 7 करोड़ लोग निवास करते हैं और लगभग 50 करोड़ लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हिमालय पर आश्रित हैं। इसलिए नियोजन कर्ताओं को नीतियां बनाते समय तार्किकता व वैज्ञानिकता को ध्यान में रखते हुए नीति निर्माण करने की आवश्यकता है।

पर्यावरणविद् व बहुगुणा जी के सहयोगी धूम सिंह नेगी ने बताया कि सुंदरलाल बहुगुणा जी पर्यावरण को सुरक्षित व सरंछित रखने के लिए जो निर्णय एक बार ले लेते थे उस पर अडिग रहते थे.उन्होंने कहा आंदोलन करते समय हम लोगों को कई बार जेल भी जाना पड़ा और सरकार की लालफीताशाही का भी सामना करना पड़ा परन्तु बहुगुणा जी जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों से कभी अलग  नही हुए.माटू संगठन के संस्थापक विमल भाई ने इस अवसर पर कहा कि पर्यावरण को संरक्षित व सुरक्षित रखने के लिए स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा जी ने अद्वितीय योगदान दिया, उन्होंने कहा कि लोगों को वृक्ष लगाने के साथ-साथ यह भी ध्यान देने की आवश्यकता है कि जो वृक्ष लगे हुए हैं उसका संरक्षण व संवर्धन किस प्रकार किया जाए।आज भी गांधीवादी जीवन जीने की आवश्यकता है ताकि कम प्रदूषण करते हुए स्वस्थ पर्यावरण में जीवन यापन किया जा सके। . यूकोस्ट के महानिदेशक डॉ राजेंद्र डोभाल ने सुन्दर लाल बहुगुणा जी के साथ अपने पूर्व अनुभवों को साझा किया.उन्होंने कहा उनके जीवन पर सुन्दर लाल बहुगुणा जी के ब्यक्तित्व बहुत प्रभाव पड़ा. इस अवसर उन्होंने कहा उनके द्वारा किए गए कार्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए एक संग्रहालय की आवश्यकता बताई जहां उनसे जीवन से जुड़ी वस्तुओं, अभिलेखों को संग्रहित किया जा सके. विश्वविद्यालय स्तर पर उनके नाम से एक अलग पीठ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया तथा पाठ्यक्रम में  उन्हें स्थान दिए जाने की आवश्यकता हैजिससे आने वाली पीढ़ी उनसे प्रेरणा लें सके. प्रसिद्ध इकोलॉजिस्ट व सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ हर्षवंती बिष्ट ने अपने संबोधन में कहा उनका पूरा जीवन अपने आप में एक पूरा इतिहास है, अपने  संबोधन में उन्होंने कहा पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य करने की प्रेरणा सुंदरलाल बहुगुणा जी से उन्हें प्राप्त हुई.हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित सुंदरलाल बहुगुणा स्मृति व्याख्यान एवं उनकी स्मृति में देश के विभिन्न हिस्सों में भूगोल विभाग के छात्रों ने वृक्षारोपण का जो कार्य किया गया वह अपने आप में एक मिसाल है.    एन डी टी वी के वरिष्ठ पत्रकार सुशील बहुगुणा ने बताया कि पर्यावरण के दूरगामी परिणाम को नजरअंदाज करते हुए हिमालय मेँ आव्यवहारिक परियोजनाओं का निर्माण किया गया है जिसका दुष्प्रभाव आज देखने को मिल रहा है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने श्रीनगर बांध परियोजना का हवाला देते हुए कहा कि यह श्रीनगर शहर के ऊपर एक बम के रूप में स्थापित किया गया है, आगे कहा कि पर्यावरण को संरक्षित व सुरक्षित रखने के लिए एक ऐसे आभासी संगठन बनाए जाने की आवश्यकता है जो विभिन्न प्रकार के दबावों से मुक्त हो और एक दबाव समूह के रूप में कार्य कर सकें। काठमांडू नेपाल के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् संता लाल मुलमी के परिवार का श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी से बहुत निकट का संबंध रहा है अपने संबोधन में कहा सुंदरलाल बहुगुणा जी एक महान पर्यावरणविद थे जिन्होंने कई आंदोलनों में  सहभागिता की.दक्षिण एशिया में हिमालय क्षेत्र सभ्यता की रीढ़ है क्योंकि यहां से सिंधु,ब्रह्मपुत्र, गंगा व यमुना आदि नदियां निकलती हैं।और उन्होंने कहा कि विकास के इस दौर में पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए स्मार्ट सिटी की नहीं बल्कि इको फ्रेंडली सिटी की आवश्यकता है। दिल्ली विश्वविद्यालय मैं भूगोल विभाग के प्रोफेसर एवं कार्य परिषद के सदस्य प्रोफेसर वी एस नेगी. ने कहा उनके जीवन पर सुंदरलाल बहुगुणा जी का बहुत असर हुआ है. उन्होंने कहा बहुगुणा जी कितने विराट व्यक्ति थे उसका पता जब किसी कार्यवस  वह विदेश जाते थे  तथा वहां के प्रतिष्ठित लोगों से मिलते थे तब पता चलता था बहुगुणा  जी कितने महान व्यक्तित्व के धनी हैं.दिल्ली विश्वविद्यालय भूगोल विभाग के के प्रोफेसर वी.एस नेगी ने बताया की सुंदरलाल बहुगुणा जी का व्यक्तित्व प्रभावशाली के साथ-साथ विराट था जो लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करता था,बहुगुणा जी स्थानीय पर्यावरणविद ना हो करके एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पर्यावरणविद थे जो हमेशा सतत पोषणीय विकास की बात करते थे।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से 20 वीं सदी गांधी के नाम से जानी गई उसी प्रकार से 21वीं सदी सुंदरलाल बहुगुणा के नाम से जानी जायेगी.

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए महिपाल नेगी ने कहा जिन कार्यों को बहुगुणा  जी अधूरा छोड़ गए थे किस तरह से  मिलकर हम उन्हें आगे बढ़ा सकते हैंइसके लिए पहल करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा चिपको आंदोलन कोई वृक्षों का आंदोलन नहीं था बल्कि यह पर्यावरण के संरक्षण व संवर्धन का आंदोलन था उन्होंने आगे कहा कि सुंदरलाल बहुगुणा ने 1970 के दशक से ही पर्यावरण के संरक्षण व संवर्धन पर विशेष ध्यान देना शुरू किया उन्होंने बहुगुणा जी के लम्बे संघर्ष को विस्तार से रखा व जो कार्य उनसे छूट गऐ थे उसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है.इस अवसर पर प्रोफेसर बी पी नैथानी ने कहा कि सुंदरलाल बहुगुणा जी आज भले ही हम लोगों के बीच नहीं हैं लेकिन उनके विचार व उनके द्वारा किये गए कार्य आज भी हम लोगों को प्रेरित करते हैं और हमेशा प्रेरित करते रहेंगे. इस दौरान विभाग के वरिष्ठ शिक्षक प्रोफेसर मोहन पवार ने विभाग की ओर से सभी का आभार व्यक्त किया व विभागाधयच प्रो नेगी की इस पहल की सराहना की.इस अवसर पर प्रोफेसर अनीता रुडोला, डॉक्टर एल पी लखेड़ा, डीन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग प्रोफेसर वाई पी रेवानी, प्रोफेसर आर.सी रमोला,प्रोफेसर एच सी नैनवाल, प्रोफेसर केसी पुरोहित प्रोफेसर एम.एम सेमवाल, प्रोफेसर बीपी सती प्रोफेसर भारती चौहान प्रोफेसर प्रभाकर बडोनी, डॉक्टर एसपी सती,डॉ आर बी गोदियाल प्रोफेसर संतोष वर्मा, प्रोफेसर एम के सिंह डॉक्टर गुड्डी बिष्ट डॉक्टर कंचन सिंह डॉक्टर आलोक सागर डॉक्टर अरुण बहुगुणा डॉक्टर उमाकांत डॉ आशुतोष गुप्त, डॉ किरण त्रिपाठी डॉ उमेश गैरोला डॉक्टर आरसी भट्ट डॉ राजेश भट्ट डॉ अतुल कुमार,डॉक्टर शेयरी चौधरी  डॉक्टर नरेंद्र कुमार डॉ उपेंद्र भाई डॉक्टर नीमा डॉ ताजबर पडियार डॉ लक्ष्मण चौहान डॉ राखी बिष्ट डॉ हर्ष खंडूरी उत्कर्ष जैन डॉक्टर उनियाल उमेश गैरोला डॉक्टर कंचन सिंह डॉ राजेश भट्ट डॉ वाईएस नेगी डॉ मुकेश नैथानी डॉ विजय बहुगुणा डॉक्टर विक्रम शर्मा डॉक्टर कोमल सिंह डॉ प्रमोद सिंह डॉ मंजू भंडारी डॉ उपेंद्र चौहान डॉ भगवती पंत प्रोफेसर डीएस नेगी, डॉक्टर बच्चन लाल सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षक, शोध छात्र एवं अन्य छात्रों ने भाग लिया. इस कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग सुनील सिंह, नेहा चौहान, गौरव गोरी, शुभम मिश्रा, विकास रावत व कार्यक्रम का संचालन शोध छात्रा नेहा चौहान ने किया.

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