रूद्रप्रयाग में सोशल मीडिया में वायरल वीडियो से स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप-जानिए खबर को विस्तार से

  •  रूद्रप्रयाग- रूद्रप्रयाग में सोशल मीडिया में चल रहे एक विडियो ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कम्प मचा दिया है, जिला अस्पताल पर सवाल इतने गम्भीर हैं कि आज गरीब आदमी जिला अस्पताल जाने से पहले सोचने को मजबूर है कि कहीं सस्ते ईलाज के चक्कर में वो भी किसी साजिश का शिकार न हो जाए, क्या है पूरा मामला पढ़ें पूरी खबर





  • रूद्रप्रयाग जिला अस्पताल एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार सवाल सोशल मीडिया में वायरल हो रहे चमोली जिले के निवासी महिपाल सिंह के विडियो से उठे हैं। पहले आप इस वायरल वीडियो में लगे आरोपों को सुनिए- 


           वायरल विडियो- महिपाल सिंह, मरीज के पिता। 


  • दरअसल चमोली के महिपाल सिंह के बेटे के हाथ में फैक्चर हो गया था जिसके ईलाज के लिए वो बेटे को लेकर जिला चिकित्सालय रूद्रप्रयाग आए, जहां तैनात आर्थोसर्जन मनोज बड़ोनी ने उन्हें हाथ का आपरेशन होने की बात कह कर आपरेशन के सामान के लिए "श्री मेडिकोज" नाम के मेडिकल स्टोर में भेज दिया, जहां महिपाल से साढे तेरह हजार रूपये लेकर शाम को सामान आने की बात कही गयी। लेकिन शाम को सामान न आने पर महिपाल अपने बेटे को  श्रीनगर ले गये जहां पूरे मामले की पोल उनके सामने खुल गयी। श्रीनगर में डाक्टर ने उन्हें बताया कि बच्चे के हाथ का आपरेशन की तो कोई जरूरत ही नही है इसमें तो प्लास्टर होना था। जिला अस्पताल रूद्रप्रयाग में मरीजों से साजिशन पैसे ऐंठने का पहला मामला नही है, बल्कि प्राईवेट मेडिकल स्टोरों और सरकारी अस्पताल में तैनात डाक्टरों का एक गठजोड़ इस पूरे रैकेट को अंजाम दे रहा है।  लेकिन इस बार पूरा प्रकरण सोशल मीडिया में आने के बाद चर्चा का विषय बना हुआ है।

   

 अंकुर खन्ना, जिलाध्यक्ष व्यापार मण्डल

सन्तोष रावत, जिलाध्यक्ष यूथ कांग्रेस

 सुरेन्द्र रावत, मण्डल अध्यक्ष। 

मनोज बड़ोनी, सीएमएस।  

विदेश शुक्ला, सीएमओ। 

  •   महिपाल जब श्रीनगर से लौटे तो मेडिकल स्टोर ने पैसे वापस करने से भी मना कर दिया, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद महिपाल को उनके पैसे वापस मिल पाए। महिपाल सिंह तो अस्पताल में चल रहे रैकेट की चुंगल में फंसने से बच गये लेकिन हर दिन ऐसे मामलों को लेकर जिला अस्पताल चचाओं में रहता है। शिकायत ज्यादा बढी तो जांच भी होती है लेकिन कार्यवाही कभी भी नही हो पाती है। इस बार मामला लोगों के बीच आने से स्वास्थय विभाग भी बचाव की मुद्रा में आ गया है। डाक्टरों द्वारा आरोपों को जहां अभी भी नाकारा जा रहा है वहीं सीएमओ उच्च अधिकारियों से बात कर मामले में जांच की बात कर रहे हैं। 
  •  पूरा मामला गरीब लोगों के स्वास्थ्य से जुडा है ऐसे में देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इसे कितनी गम्भीरता से लेता है, और कब तक इस पूरे मामले की जांच के बाद कार्यवाही कर ऐसी घटनाओं पर लगाम लग पाती है।

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