बुढना गांव की 83 वर्षीय विधवा असहाय ,लाचार-इनकी भी सुनो सरकार

 रामरतन सिंह पवांर/जखोली


  • शासन प्रशासन नही गरीबों के  प्रति सजग....
  • जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते बुढना गांव की 83 बर्षीय विधवा असहाय ,लाचार
  • महिला इक्कीसवीं सदी मे भी है आवास विहिन
  • सरकारी तंत्र मे नही होती है गरीबों की सुनवाई
  • सरकार के पहाड़ों मे निवास करने वाले गरीब, असहाय, परिवारो को 
  • रैबार पहाड़ पोर्टल के माध्यम से बोली की मेरू रैबार मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत तैं पहुंचे दियांन
असाय लाचार महिला भाग देई देवी बुढ़ना


जखोली-आवास देने मे हर बार नकारा साबित होती है चाहे इन्दिरा आवास आवास हो अटल आवास या वर्तमान समय मे प्रधानमंत्री आवास योजना हो ,इन सभी योजनाओं का लाभ हमेशा ही समाज मे गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों परिवारो को कम ही मात्रा मे प्रदान की गयी यानी सरकारी लाभ से वंचित रखा गया इसका मुख्य कारण ये भी है कि गाँवो बी पी एल सर्वेक्षण के समय  ऐसे परिवारों को गरीबी रेखा के दायरे मे लाया गया जो कि बी पी एल के दाहिरे मे आते ही नही नही है और ऐसे परिवार का चयन आवास के लिए किया जाता है, जबकि  भाग देई देबी का अन्त्योदय का कार्ड होने के बावजूद भी उसका चयन प्रधानमंत्री आवास के लिए चयनित भी नही किया गया,जबकि   अधिकतर अपात्र परिवारों को आवास का लाभ दिया जाता है। 



विदित को कि जखोली  के अंतर्गत ग्राम पंचायत बुढ़ना की रहने वाली ल 82 वर्षीय  एक बेसहारा,असहाय, विधवा महिला  भाग देवी देबी पत्नी स्वर्गीय,गम्भीर सिह लगभग 40 बर्षो से विधवा की जिन्दगी जी रही है बता  भाग देई देबी के पति की दो शादियां थी और अभी दोनो जिन्दा है महिला के सौतन के दो बेटे हैं और दोनो अलग रहते है, जबकि भाग देई  देबी की अपनी कोई संतान नही है जिससे बिना औलाद की यह पीड़ित महिला आज इस जीर्ण शीर्ण खण्डहर पर मरणासन्न की स्तिथि मे पड़ी हुई है।



जब  यह सुनकर कर कि बुढना गांव की रहने वाली भाग देई  देबी का जीवन विपरीत परिस्थितियों मे गुजर रहा है तो तब दैनिक हाक की टीम जायजा लेने महिला के घर पहुंची तो वहाँ जाकर देखा तो विवश, लाचार महिला अपने टूटे फूटे एक अन्धेरे कमरे मे खटिया के उपर लेटी थी , और ठीक ढंग से खाना भी नहीं खा सकी, उसका कहना है कि  जब से मेरे पति गंभीर सिह का देहांत हुआ है तब से मै दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर हूँ कोई मदद करने को तैयार नही है महिला का ये भी कहना है कि मैने अपने टूटे फूटे

झोपड़ी के  मरमत आवास देने हेतू ग्राम प्रधान, क्षेत्रीय पटवारी को कई बार बोल चुकी हूँ लेकिन मेरी बातो को हर बार अनुसार ही कर दिया जिससे कि अब मुझे शासन प्रशासन पर भी बिश्वास नही है   आज दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर है,महिला के पास ना तो शौचालय है नाही  पीने के लिए  पानी का कनेक्शन ,तो फिर विद्युत और गैस कनेक्शन तो बड़े दूर की बात है महिला के पास न पानी का कनेक्शन नाही विधूत,गैस का कनेक्शन न होना सरकार की हर घर जल,उज्वला योजना, व कुटीर ज्योति जैसे महत्वाकांक्षी योजनाओं पर सवालिया निशान खड़े करती है,अवगत करा दे कि

महिला के दोनो घुटनों मे भी काफी दर्द है जिससे कि महिला को इधर उधर जाने मे भी भारी परेशानियो का सामना करना पड़ता कि वृद्ध महिला के कहने के मुताबिक  भले ही सरकार मुझे 

समाज कल्याण से 1200 सौ रुपये देती हो लेकिन सरकार से मिलने. वाली इस धनराशि का मै क्या करुँगी जब मेरे पास रहने के लिए छत ही नही है  भाग देईदेबी का ये भी कहना है कि मैने किसी उच्च अधिकारियों से आज तक अपना दुखः दर्द तो नही बताया लेकिन जनप्रतिनिधियों व क्षेत्रीय पटवारी को जरूर अपना दुखड़ा जरूर सुनाया लेकिन कुछ फायदा नही हुआ।साथ महिला ने कहा कि मेरे इस दुखः की घड़ी मे क्षेत्र के ही सेवानिवृत्त अध्यापक और सामाजिक कार्यकर्ता नारायण सिह बुटोला मेरे घर पर मेरी देख रेख करने जरूर आते है।यहां तक एक बार  वह इस असहाय महिला को इलाज हेतू अस्पताल भी लेके गये।अब   वृद्ध महिला ने सरकार से अपने लिए आवास की मांग कर ही है ,जबकि  भाग देई देवी की  मांग जायज है ,गाँवो मे किसी लाचार महिलाओं के साथ भेद भाव जैसे व्यवहार पर महिला आयोग को भी संज्ञान लेने की आवश्यकता है

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