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Thursday, June 17, 2021

क्वांसु पराण' पोथि कु ह्वे लोकार्पण

 'क्वांसु पराण' पोथि कु ह्वे लोकार्पण 

रैबार पहाड़ का




कोरोना काल तैं देखि अचग्याल सब्बि लोग वर्चुअल मीटिंग का जादा परयोग कन्ना छन । ये हि क्रम मा एत्वारो खुणि नै छ्वाळि का साहित्यकार मनोज भट्ट 'गढ़वळि' की तीसरि पोथि 'क्वांसु पराण' का लोकार्पण ह्वे । लोकार्पण गोष्ठी की अध्यक्षता 'रंत रैबार'समाचार पत्र का जण्या मण्या संपादक व वरिष्ठ साहित्यकार श्री इश्वरी प्रसाद उनियाल जी द्वारा कर्ये ग्ये । ये मौका  पर वरिष्ठ साहित्यकार श्री वीरेंद्र पंवार जी व डॉ उमेश चमोला जी वक्ता का रूप मा उपस्थित छा । श्री मदनमोहन डुकलाण जी द्वारा पोथि की समीक्षा कर्ये ग्ये । वर्चुअल गोष्ठी का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती बीना बेंजवाल जी द्वारा कर्ये ग्ये ।



         'क्वांसु पराण' श्री मनोज भट्ट 'गढ़वळि' की तीसरि पोथि च यां से पैलि 2017 मा 'एक अंज्वाळ द्वी मुट्ठी' काव्य संग्रैं , व 2020 मा 'घेरा' नौं से कथा संग्रैं , प्रकाशित ह्वे चुकैनि जु काफी चर्चित रैनि ।  ये मौका पर श्री वीरेंद्र पंवार जीन बोलि कि कवि द्वारा यिं पोथि मा लियां इक्यावन रचनाओं मा जु बिम्ब व प्रतीक लियां छन वू इत्यासिक छन त श्री मदन मोहन डुकलाण जीन बोलि कि जैका पराण क्वांसु होलु वी इनि रचना कैरि सकदो, कवि का गौं, पाणी, पुंगड़ा, जिंदगी, माया,  बालपन, ज्वानि, बुढ़ापा सब्बि विषयों पर अपणी कलम चलैं । डॉ उमेश चमोलान् बोलि कि कवि हम तैं हमरु बचपन मा ल्हीजांदु अर वख हम तैं हमरा बचपन याद दिले देंदु । यूं रचनाओं मा पर्यावरण, से लेकि पौन पंछियों तक कि चिंता च त माया की उच्च रचना बि छन ।अंत मा श्री उनियाल जीन बोलि कि या पोथि लिख्वारु पैलिक पोथियूं तरां लोगों तैं भौत पसंद आलि व भविष्य मा बि हम तैं इनि हौर बि पोथि पढणों मिललि । श्रीमती बीना बेंजवाल जी द्वारा श्री भट्ट जी तैं एक संवेदनशील व ऊर्जावान लिख्वारु बतै ग्या । पोथि रावत डिजिटल द्वारा प्रकाशित कर्ये ग्ये व गोष्ठी का प्रसारण रावत डिजिटल का अलावा 'स्वर्ग है अपना पहाड़ं व 'पहाड़ी गीत संगीत संस्कृति साहित्य' का फेसबुक पेज पर प्रसारित ह्वे ।