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Sunday, July 04, 2021

मोदी, योगी जैसे दिग्गजों की पांत में शामिल हुए धामी-जानिए विस्तार से

 मोदी, योगी जैसे दिग्गजों की पांत में शामिल हुए धामी

-पहली उड़ान में सीधे सीएम की कुर्सी पर लैंड करने वालों ने लिखी सफलता की इबारत


(वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन सिंह बिष्ट की फेसबुक वॉल से)


उत्तराखंड के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

देहरादून। रविवार को देहरादून राजभवन में आयोजित शपथ समारोह में जैसे ही 5.15 पर नये मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी की शपथ पूरी हुई, वो देश के उन विशिष्ट नेताओं की पंक्ति में शामिल हो गये।, जिन्होंने पहली उड़ान में सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर लैंड किया।  दिलचस्प बात यह है कि सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने वाले ये लोग राजनीति में लंबी रेस के घोड़े साबित हुए और वे राजनीति के क्षितिज पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने में कामयाब हुए। 

भारतीय जनता पार्टी की ही बात करें तो यहां सीधे सीएम की कुर्सी संभालने वाले नेताओं की एक लंबी फेहरिस्त है। इस कड़ी में सबसे बड़ा नाम नरेन्द्र मोदी का है। मोदी को जब 2001 में गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया था तो उन्हें भी सरकार चलाने का कोई भी अनुभव नहीं था। यानि वे केशुभाई पटेल को हटाने के बाद मुख्यमंत्री बने और यह सब जानते हैं कि 2014 में देश का प्रधानमंत्री बनने तक मोदी ने गुजरात में एकछत्र राज किया। मोदी सीएम की कुर्सी संभालने से पहले महामंत्री संगठन के पद पर थे। यह भी सर्वविदित है कि पहली बार ही लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद वे 2014 में सीधे प्रधानमंत्री जैसे अति महत्वपूर्ण पद पर पहुंच गये और तब से इसी पद पर बने हैं। 

भाजपा ही बात करें तो उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी 2017 में बिना किसी अनुभव के सीधे एनेक्सी के पंचम तल पर पहुंचने में कामयाब रहे। योगी इससे पहले पांच बार सांसद बन गये थे। सीधे सीएम का पद संभालने वाले भाजपा नेताओं की बात करें तो इसकी शुरूआत हिमाचल के पूर्व सीएम शांता कुमार ने की थी। शांता कुमार जिला परिषद के अध्यक्ष से आगे नहीं बढ़ पाये थे, लेकिन 1977 में हिमाचल की पहली गैर कांग्रेसी सरकार (जनसंघ की सरकार) बनी तो पहली बार विधायक चुने जाने के साथ ही वे मुख्यमंत्री भी बन गये। इस प्रसंग में यूपी के दिग्गज सीएम कल्याण सिंह का जिक्र भी आवश्यक हो जाता है। नब्बे के दशक में देश के सबसे चर्चित राजनेताओं में शुमार कल्याण सिंह पहले एमएलसी हुआ करते थे और 1991 में भाजपा की सरकार बनते ही सीधे मुख्यमंत्री बनाये गये। सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने वाले देश के अन्य नेताओं का राजनीतिक इतिहास देखें, तो ये सभी लंबी रेस के घोड़े साबित हुए। जयललिता 1991 में संगठन से सीधे मुख्यमंत्री के पद पर आयी। वह तब तमिलनाडु की सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री बनी थी, तब उनकी उम्र 47 साल थी। इसी तरह प्रफुल्ल कुमार महंत असम के मुख्यमंत्री बिना किसी अनुभव के पहली बार विधायक बनते ही बन गये। तब उनकी आयु महज 33 साल थी। वे दो कार्यकाल असम से सीएम रहे। चार बार मिजोरम के मुख्यमंत्री रहने वाले एल. ललथनहावला भी 1984 में बिना किसी अनुभव के सीधे सीएम बन गये थे। इसी राज्य में एक समझौते के तह अलगाववादी नेता पी. लालडेंगा भी ऐसे ही सौभाग्यशाली नेताओं में शुमार हैं। इस कड़ी में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कैसे छोड़ सकते हैं वे नयी पार्टी बनाने के साथ ही 2013 से सीधे सीएम के पद पर बैठे तो आज तक बैठे ही हैं। एक दिलचस्प बात यह है कि उत्तराखंड के नये सीएम पुष्कर धामी सहित पहली उड़ान में ही सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर लैंड करने वाले ये सभी नेता 45 से 50 साल की उम्र में ही ये करिश्मा करने में सफल रहे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि धामी ऐसे नेताओं के लंबी रेस को घोड़ा होने के मित्थक को कितना सच साबित कर पाते हैं।