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Monday, July 12, 2021

अनील बलूनी का विकास मॉडल -पर वरिष्ठ पत्रकार डॉ.वीरेन्द्र बर्त्वाल की कलम से

   अनील बलूनी का विकास मॉडल -पर वरिष्ठ पत्रकारडॉ.वीरेन्द्र बर्त्वाल की कलम से     


देहरादून-उत्तराखंड के राज्यसभा सांंसदों में अनिल बलूनी ही ऐसे हैं,जिन्हें लोग जानते ही नहीं,बल्कि उनका नाम सभी की जबान पर होता है। वे मीडिया की सुर्खियों में रहते हैं,नहीं तो अधिकांश राज्यसभा सांसद तो चुनाव जीतने के बाद ही इतिहास बन जाते हैं। बलूनी जी से अभी कुल दो बार मिला(निजी काम से नहीं) हूँ। एक बार हल्द्वानी में, एक बार दिल्ली में। दोनों बार उन्होंने मसलों को गंभीरता से लिया और निस्तारण की कार्रवाई की। प्वाइंट टु प्वाइंट बात,लारे-लप्पे नहीं। मिलने का समय किसी को दिया तो मिलकर ही रहेंगे। वे देवप्रयाग के निकट के हैं,लेकिन मैं नहीं जानता कि उन्हें गढ़वाली आती है या नहीं,परंतु इतना जानता हूँ कि गढ़वाली के प्रति उनका अनुराग है। 

संसद में भाषण देते हुए उन्हें गढ़वाली की लोकोक्ति का प्रयोग करते हुए सुना गया है। उत्तराखंड जैसे पिछड़े राज्य के विकास के प्रति उनका विजन न्यारा है। वे उन सुविधाओं पर अधिक सोचते हैं,जिनकी अधिक दरकार है। यहाँ चिकित्सा सुविधा के लिए उनका प्रयास सराहनीय है। उत्तराखंड में टाटा कैंसर इंस्टीट्यूट की स्थापना का उनका सपना पूरा होने वाला है। स्वयं इस बीमारी से ग्रस्त होकर उन्होंने मुंबई में उपचार कराया और स्वस्थ हो गए थे। यहीं से उनके मन में आया कि काश! मेरे राज्य के पीडि़त लोगों को भी इस स्तर की चिकित्सा मिल पाती। ऐसी अनेक योजनाओं पर वे कार्य कर रहे हैं। उत्तराखंड की हवाई सेवाओं में सुधार के उनके प्रयास प्रशंसनीय हैं। दिखावे की दूनिया को दूर से नमस्कार करने वाले अनिल बलूनी के विकास का मॉडल उत्तराखंड के मौजूदा हालात के दृष्टिगत सम्यक है। 

उनका लिखा यह वाक्य बहुत गंभीर और सराहनीय है-

"ईश्वर करे कोई बीमार ना हो। दुर्भाग्य से अगर बीमार हो गए तो उन्हें घर में ही उच्च कोटि का उपचार मिले।"

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