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Saturday, July 03, 2021

राजा वही,जो हृदय पर राज करे-सीएम पुष्कर सिंह धामी को लेकर एक हकीकत

        राजा वही,जो हृदय पर राज करे-सीएम पुष्कर सिंह धामी को लेकर एक हकीकत

   वरिष्ठ पत्रकार डॉ.वीरेंद्र बर्त्वाल,की कलम से



  रैबार पहाड़ का-  पुष्कर सिंह धामी से लगभग सात साल पहले एक महत्त्वपूर्ण और संवेदनशील जनहित के मसले पर एक बार मिला था। उन्होंने जिस हिसाब से गंभीरता के साथ उसका संज्ञान लेकर समाधान करवाने का प्रयास किया था,उससे मैं बहुत प्रभावित हुआ था। यानी उनका  'पब्लिक डीलिंग' का तरीका मुझे भा गया था। 

उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री पुष्करसिंह युवा हैं,लेकिन सियासी अनुभव वरिष्ठ नेताओं से कम भी नहीं है। ठेठ पहाड़ी क्षेत्र के रहने वाले हैं,इसलिए पहाड़ को गंभीरता से अवश्य समझते होंगे। भाजपा के आनुषंगिक संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के माध्यम से सियासत में दाखिला लिया है,इसलिए पार्टी की संस्कृति और प्रकृति को बेहतर समझते होंगे। अनेक तथ्यों और खूबियों के कारण पार्टी ने उनका राजतिलक किया है,लेकिन पार्टी उन्हें आगे तभी पसंद करेगी,जब वे जनता की पसंद के उच्च पायदान पर पहुंच पाएंगे।

इस समय उत्तराखंड बुरे दौर में है। जर्जर और हिचकोले खाती नाव को पार लगाने के लिए कुशल और मंझे हुए मांझी की बडी़ आवश्यकता है। इस वक्त सूबे के मुखिया के अनुभव की कम,बौद्धिक शक्ति और क्षमता की अधिक आवश्यकता है। युवा नौकरियों की राह देख रहा है,बीमार सुविधासंपन्न अस्पताओं की प्रतीक्षा में हैं। सूने गांवों के खंडहर हो रहे मकानों को देख कइयों के कलेजे फटे जाते हैं। सूअर,बंदर, आपदा,भ्रष्टाचार,स्थायी राजधानी...इस छोटे-से राज्य में समस्याओं की फेहरिस्त छोटी नहीं है। एतदर्थ,मंत्री रहे बिना सीधे मुख्यमंत्री बनाए गए पुष्करसिंह के सामने बडी़ चुनौतियां हैं,लेकिन उनसे पार पाना असंभव भी नहीं। इसके इतर पार्टी के लोगों और अपनी सेना को भी उन्हें खुश रखना है,वह भी ऐसे समय में जब समय और पैसा कम है तथा चुनाव आसन्न हैं।

यदि पुष्करसिंह पहाड़ को अंदर से महसूस करते हैं तो यह भी जानते होंगे कि यहाँ का आदमी बहुत महत्वाकांक्षी नहीं होता है। यहाँ का आदमी कुछ लोकदेवताओं की तरह रोट, बाडी़- हलवा,धुपाणे,ज्यूंदाल़,पिठैं से ही प्रसन्न हो जाता है। यानी आप आसानी से यहाँ की प्रजा के हृदय में जगह बना सकते हो। आपको संवेदनशील बनना होगा। यहाँ ऐंठन,बड़प्पन वाले को दूर से नमस्कार किया जाता है। ठेकाप्रिय, डेनिशप्रिय राजा को नकारा जाता है। यहाँ दिलों पर वही राजा राज कर पाएगा,जो कांटों से बिधे गरीब के पैरों की वेदना से छटपटा जाए,जो सूने घर में कैद बुजुर्ग के आंसुओं को देख विचलित हो जाए,जो बिना काम के युवा हाथों की लाचारगी को शिद्दत से महसूस करे, जो पहाड़ के बहते पानी को रोककर यहाँ के खेतों के लिए इस्तेमाल करे। यह संभव है,बिल्कुल संभव है। पहाड़ की विशेषता रही है कि यहाँ देवता भी वही सर्वाधिक लोकप्रिय हुए,जो यहाँ के लोगों की तरह सीधे,सच्चे और परिश्रमी रहे। नागराजा (श्रीकृष्ण), गंगू,सिदवा-विदवा नाग इसलिए लगभग हर गांव में पूजा जाता है,क्योंकि वे पशुचारक थे और पशुओं की रक्षा करते हैं,दुग्ध समृद्धि दाता हैं। नरसिंह को इसलिए लगभग हर घर में पूजा जाता है,क्योंकि वह साधारण व्यवहार के तहत टिमरू का सोट्टा धारण करता है,शरीर पर राख मलता है और अन्याय करने वाले को दंड देता है।