हरक सिंह रावत का ये विधायक दोस्त निकला बडा दगाबाज- जिसका हरक ने हरदम दिया साथ वही कर गया विश्वासघात

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यह लगभग तय हो चुका है की हरक सिंह रावत अपनी बहू के साथ आज दोपहर में कांग्रेस में वापसी कर लेंगे. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में जो सवाल सबसे बड़ा खड़ा हो रहा है वो ये है की आखिर हरक सिंह रावत जैसे परिपक्व राजनेता ने इतनी बड़ी गलतियां कैसे कर ली. कैसे भाजपा को भनक लग गई की वो कांग्रेस में जा रहे हैं और उससे पहले ही भाजपा ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. सवाल कई सारे खड़े हो रहे हैं और ऐसे ही सवाल के जवाब हमने भी तलाशने की कोशिश की है जिसके बाद जो सामने आया है वो चौकाने वाला है.

और इन सब में हरक सिंह रावत और विजय बहुगुणा के करीब भाजपा विधायक का नाम सामने आ रहा है, वो विधायक जो हर वक्त हरक सिंह रावत के करीबी रहे हैं. पिछले पूरे घटना क्रम में हरक सिंह रावत ने उन पर अंधा विश्वास किया है. हम इस वक्त उनका नाम नही लिख रहे लेकिन स्थिति आपके सामने साफ है.

बताया जा रहा है की जिस वक्त यशपाल आर्य भाजपा से कांग्रेस में जा रहे थे तो उस वक्त भी ये भाजपा विधायक उनके साथ थे और उनको भी इनपर बहुत भरोसा था साथ ही लगातार वो यशपाल आर्य को समझा रहे थे की हम सब आपके साथ हैं आप कांग्रेस में जायेंगे तो हम भी आपके साथ जायेंगे. लेकिन ऐसा हुआ नही और विधायक जी ने यशपाल आर्य के हर घटना क्रम को भाजपा हाईकमान के पास पहुंचा दिया. लेकिन यशपाल आर्य ने कांग्रेस ज्वाइन कर ली और विधायक जी भाजपा में ही रहे.

अब बारी थी हरक सिंह रावत की, लेकिन यहां पर पेच कुछ अलग था हरक सिंह रावत भाजपा से कांग्रेस में जाने का विचार नही कर रहे थे, और वो लगातार हाईकमान को विश्वास में भी ले रहे थे की वो भाजपा के सच्चे सिपाही हैं और भाजपा में ही रहने वाले हैं. इसके लिए उन्होंने कई बार भाजपा के बड़े केंद्रीय नेताओं से मुलाकात भी की और उन्हें बताया भी की वो कांग्रेस में नही जा रहे हैं, और हर वक्त भाजपा के साथ ही रहने वाले हैं. जबकि उनके साथ भी भाजपा के वही विधायक हर वक्त थे. लेकिन यहां पर मामला थोड़ा अलग हो गया और हरक सिंह रावत जो सोच रहे थे उससे उलट भाजपा हाईकमान के पास बात पहुंचाई जाने लगी. इसकी भी वजह अलग थी सूत्रों की माने तो विधायक यह सोच रहे थे की जैसे ही हरक सिंह रावत कांग्रेस में जायेंगे तो जो मंत्रीपद खाली होगा उसपर उनकी ताजपोशी हो जायेगी.

इस दौरान हरक सिंह रावत भी उन पर विश्वास करते रहे. आखिर में हरक के साथ भी वही हुआ हरक की हर बात भाजपा हाईकमान के पास पहुंच रही थी लेकिन जो हरक सोच रहे थे ठीक इसके उलट. और आखिर में भाजपा ने उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया

भाजपा अपने इस विधायक को पार्टी से बाहर नही निकलना चाहती है, क्योंकि अपने क्षेत्र में इनकी अच्छी पकड़ है और हर किसी को पूरा यकीन है की एक बार फिरसे वो क्षेत्र से जितकर आ रहे हैं. और यही वजह है की भाजपा उन्हें बहुत ज्यादा तवज्जो दे रही है.

बताया जा रहा है की इस वक्त हरक सिंह रावत सोच रहे हैं की उन्होंने कैसे एक व्यक्ति पर अंधा भरोसा कर दिया.

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