जान बचाने के लिए जान को दाव पर लगाकर ,गोलाबारी के बीच उत्तराखंड की आयुषी का खारकीव से पैदल सफर की दास्ताना

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नैनीताल । यूक्रेन के खारकीव शहर में कई दिन से रूसी सेना के बमबारी के बीच घिरी नैनीताल की आयुषी जोशी जान की परवाह किये बिना पैदल ही लीविव रेलवे स्टेशन निकली है । जहां से वह पोलैंड का सफर तय करेगी
। आयुषी जोशी ने अपने मामा शीतल तिवारी को फोन सुबह 10 बजे बताया कि वे जिस बंकर में है उसके आसपास लगातार बमबारी हो रही है मिसालों का अटैक हो रहे है
अब जो उनके सबसे बड़ी समस्या आ खड़ी थी वो भोजन की कुछ दिन मैंगी, ब्रेड खाकर गुजारा किया परतुं अब खाना भी खत्म ही गया है ,सुपर मार्किट खाली हो चुका है, रूसी सैनिक खारकीव में घुस आए हैं , अब डर ज्यादा बढ़ने लगा है कभी भी किसी भी पल कुछ भी हो सकता है कल से खाना नही खाया है अगर बमबारी से बच भी गए तो भूख नही छोडगी । खारकीव के लोकल ग्रुप से पता चला है खारकीव से लीविव के लिए शायद ट्रेन है ,पर वो जिस बंकर में छुपी है रेलवे स्टेशन वहां से 2,3 किमी है इसलिए अब जान बचाने के लिये जान को दाव पर लगाने के अलावा कोई रास्ता नही है। इसकिये आयुषी ने अपने मामा को बताया है कि वह अब पैदल स्टेशन के लिए निकलेगी हालांकि चारों तरफ गोलाबारी हो रही है पर कोई रास्ता भी नही इसके सिवाय । उसने कहा कि मोबाईल टावर ध्वस्त कर दिया गया है जिससे नेटवर्क की समस्या है ,मैं अगर मैं सही सलामत पोलैंड पहुंची तो मैसेज या कॉल करूंगी। परिजन बहुत चिंतित थे। तभी शाम को 5:30 पर आयुषी का मैसेज शीतल तिवारी के मोबाईल पर आया की वह पोलैंड पहुंच गयी हैं लेकिन पोलैंड से उनके एयरलिफ्ट की क्या व्यवस्था  यह उन्हें नहीं मालूम । पोलैंड पहुँचने की सूचना से आयुषी के परिजनों की जान में जान आयी अब बस उंसके हिंदुस्तान पहुंचने का इंतज़ार है।

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